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2 जन॰ 2019

हे हर विपति पड़ल सिर भारी लिरिक्स - He Har Vipatti Padal Sir Bhari Lyrics

हे हर विपति पड़ल सिर भारी
अन्न-बसन बिनु तन-मन बेकल, 
पुरजन भेल दुखारी हे
हर विपति पड़ल सिर भारी

अपन कि आन कान नहि सूनय, 
गूनय जानि भिखारी हे
मंगने कहय हाथ अछि खाली, 
रहितो द्वार बखारी हे
गंग नियर बसु गायब हम 
हँसि बनब जे तोर पुजारी हे

अछैत मनोरथ सभ भेल बेरथ,
बनलहुँ अन्त भिखारी हे
लिखल-पढ़ल कत बात गढ़ल कत,
किछुओ ने भेल हितकारी हे
शशिनाथ माथ पद टेकल, 
आबहु लएह उबारी हे

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