अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
22 जून 2017
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कतय छी हे अम्बे, श्रवण चखु मुनने (जननि पूर्णकामा) - मैथिली पुत्र प्रदीप
कतय छी हे अम्बे, श्रवण चखु मुनने (जननि पूर्णकामा) - मैथिली पुत्र प्रदीप
कतय छी हे अम्बे, श्रवण चखु मुनने,
दशा की ने देखी सुनइ छी न अपने ?
हमर दुर्दशा की अहाँ नै देखै छी,
हमर ई व्यथा की अहाँ नै बुझै छी
जगत व्यापनी की जनइ छी न,
दशा की ने देखी सुनइ छी न अपने
सुनल अछि कतेको कथा माँ दया के
सुनल अछि अनेको अमर कीर्ति माँ के
शरण मे एलौ तँ सम्हारु ने अपने।
दशा की ने देखी सुनइ छी न अपने
धरणि सँ गगन धरि अहिकेर माया,
अहिकेर सुधा सँ बनल शुभ्र काया,
तखन मंजुषा कोन छी नेह रखने।
दशा की ने देखी सुनइ छी न अपने।
रचनाकार: मैथिली पुत्र प्रदीप (प्रभुनारायण झा)
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