अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
1 अक्टू॰ 2024
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एक बेर हर हमरो दिस हेरू | Ek Ber Har Hamaro Dish Heru
एक बेर हर हमरो दिस हेरू | Ek Ber Har Hamaro Dish Heru
एक बेर हर हमरो दिस हेरू
पार्वती पति दारिद्र फेरू
करियो अनुग्रह निज जन जानि
होऊ सहाय शिव सहित भवानी
एक बेर हर हमरो
काम, क्रोध, मद रिपु के जारू
लोभ, मोह, ममता सब टारू
एक बेर हर
दुख भंजन, जन रंजन शंकर
संत सुधाकर दुष्ट भयंकर
एक बेर हर
निज जन जानि धरू करुआर
लक्ष्मीपति हर पार उतारू
एक बेर हमरा
रचनाकार: लक्ष्मीनाथ गोसाई
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