अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
8 फ़र॰ 2024
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गौरी हमर कसुरबा हे लिरिक्स - Gauri Hamar Kasurba He Lyrics Shiv Bhajan
गौरी हमर कसुरबा हे लिरिक्स - Gauri Hamar Kasurba He Lyrics Shiv Bhajan
गौरी हमर कसुरबा हे
माफ करथि शंकर सौं कहबनि हमर कसुरबा हे
अपन शुभाशुभ कर्म दोषसँ सभटा भोग भोगइ छी
जेहि विधि रखने छथि बमभोला तेहिना हमहुँ रहइ छी
जे जीवनमे कहियो ने देखल, से सभ आब देखइ छी
बितल घड़ी सभी याद परैयै, तदपि ने चेत रखै छी
जनिका-जनिका अप्पन बुझल, से विरान भय गेला
आइ बुझड़ छी अइ दुनिया मे, सब स्वारथ के खेला
थाकल तन-मन थाकल पैरुख, आब होइछ पछतावा
स्नेहलता बुझि पड़ल आब जे, हमर अपन छथि बाबा
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