गुरुवार, 21 जुलाई 2016

अमुआं मजरि महु तूबल सजनी गे लिरिक्स - मधुश्रावणी पाबनिक गीत

अमुआं मजरि महु तूबल सजनी गे
सुन मोर सजनी, कुसुम लेल पतझार
अही बाटे औता महादेव सजनी गे
सुन मोर सजनी, बहि गेल चाननक धार
चानन छिलकि पाग पड़ल सजनी गे
सुन मोर सजनी जुगे-जुग जीवथु फल्लांक पुत्र
सुन मोर सजनी, जुगे जुग जीबथु महादेव
अही बाटे औती गौरीदाइ सजनी गे
सुन मोर सजनी, बहि गेल सिनूरक धार
सिनूर छिलकि सींथ पड़ल सजनी गे
सुन मोर सजनी, जुगे जुग बढ़नु अहिबात
अमुआं मजरि महु तूबल सजनी गे
सुन मोर सजनी, कुसुम लेल पतझार

शुक्रवार, 15 जुलाई 2016

नाहि करब बर हर निरमोहिया लिरिक्स - विद्यापति - Nahi Karab Bar Har Nirmohiya Lyrics

नाहि करब बर हर निरमोहिया। 

बित्ता भरि तन बसन न तिन्हका,
बघछल काँख तर रहिया॥ 

बन-बन फिरथि मसान जगावथि,
घर आंगन उ बनौलन्नि कहिया। 

सास ससुर नहिं ननद जेठौनी,
जाए बैठति धिया केकरा ठहिया॥ 

बढ़ बरद, ढकढोल मोल एक, 
संपति भाँगक झोरिया। 

भनइ विद्यापति सुन हे मनाइन,
सिब सन दानि जगत के कहिया॥ 

सुन-सुन सुंदर कन्हाई लिरिक्स - विद्यापति

Pahile badri kuch pun nawrang 


सुन-सुन सुंदर कन्हाई। 
तोहि सोंपलि धनि राई॥ 

कमलिनि कोमल कलेबर। 
तुहु से भूखल मधुकर॥ 

सहज करह मधु पान। 
भूलह जनि पँचबान॥ 

परबोधि पयोधर परसह। 
मधुकर जइसे सरोरुह॥ 

गनइत मोतिम हारा। 
छलें परसब कुच भारा॥ 

न बुझए रति-रस-रंग। 
खन अनुमति खन भंग॥ 

सरिस-कुसुम सम तनु। 
थोरि सहब फुल-धनु॥ 

विद्यापति कवि गाब। 
दूतिक मिनति तुअ पाब॥ 

गुरुवार, 14 जुलाई 2016

छोटी-मोटी अंगनामे बहुत पसार लिरिक्स

Chhoti moti anganame bahut pasaar

छोटी-मोटी अंगनामे बहुत पसार
राम, मिलैत-जुलैत विषहरि के भए गेल साँझ
आमा गर मिलय गेली पउती-पेटार
राम, बाबा घर मिलय गेली देल धेनु गाय
भउजो गर मिलय गेली, मुखहु ने बोल
राम, भइया गर मिलय गेली लहंगा-पटोर

हर जनि बिसरब मो ममिता लिरिक्स - विद्यापति har jani bisrab mo mamita lyrics

हर जनि बिसरब मो ममिता, हम नर अधम परम पतिता। 

तुम सन अधम उधार न दोसर, हम सन जग नहिं पतिता॥ 

जम के द्वार जबाव कौन देब, जखन बुझत निज गुनकर बतिया। 

जब जम किंकर कोपि पठाए त, तखन के होत घरहरिया॥ 

भन विद्यापति सुकवि पुनित, मति संकर बिपरित बानी। 

असरन सरन चरन सिर नाओल, दया करु दिय सुलपानी॥ 

गुरुवार, 7 जुलाई 2016

भोले करुणामय सरकार लिरिक्स - Bhole Karunamay Sarkar Lyrics

अढरण-ढरण अहाँ शिव शंकर महिमा अपरम्पार।
भोले करुणामय सरकार॥

यदपि दिगम्बर अहाँ कहाबी, छी बाघम्बर धारी।
पारवती पति पार के पाओत, हे शंकर त्रिपुरारि। 
अहिंक दया सागर में भरी, डुबकी बारंबार। 
भोले करुणामय सरकार।।

अपने पंचानन शिव शंकर अम्बा दस मुख धारी।
चम-चम कर त्रिशूल दशो दिसि प्रबल प्रभाव पसारी।
अर्ध चन्द्रसिर सुधा संग छथि निर्मल गंगाधर। 
भोले करुणामय सरकार॥

वाहन वरद अहाँक, जननि रखने छथि सिंह सवारी। 
गणपति मूस, मयूर खड़ानन ई अदभूत परिवारी।
सह- सह साँप सगर तन करइछ डमरू वेदोच्चार। 
भोले करुणामय सरकार॥

तेसर नेयन प्रदीप मुदा छी शान्तिपथक अनुगामी। 
पसरल पुनः अशान्ति जगत मे हे करुणामय स्वामी।
हे गौरी हर शिवशंकर, अपने पर सभ भार ।
भोले करुणामय सरकार॥

अदरण हरण अहांका शिवशंकर महिमा अपरम्पार।
भोले करुणामय सरकार॥
                                                          
गीतकार: मैथिली पुत्र 'प्रदीप' (प्रभुनारायण झा)