मंगलवार, 29 जुलाई 2014

झिलमिल साड़ी के रेशमी किनारी रे लिरिक्स - डहकन गीत

झिलमिल साड़ी के रेशमी किनारी रे
चउपेतल साड़ी
सेहो साड़ी पहिरथु फल्लाँ छिनरिया
पहिरि ओढ़िए गली ठाढ़ी रे
घोड़बा चढ़ल अबथिन फल्लाँ रसिकबा
आइ किए गलियामे ठाढ़ी रे
चउपेतल साड़ी
ठाढ़ि तऽ ठाढ़ि रसिया अपन गलिया
तोहरो जीह किए तरसउ रे
चउपेतल साड़ी
सौंसे बदन छिनरो गोरी-भरी रे
तरक सुगबा किए ठाढ़ि-कारी रे
चउपेतल साड़ी
झिलमिल साड़ी के रेशमी किनारी रे
चउपेतल साड़ी

शनिवार, 26 जुलाई 2014

”Latakale T Gele Beta” a Maithili Romantic Comedy

मिथिला धरोहर : जाही गति सँ मिथिलांचल में मैथिलि फ़िल्मक निर्माण भऽ रहल ऐछ से कुनो चमत्कार सँ कम नइ कैह सकै छि। मैथिलि फ़िल्मक विकाश लेल नवका, निमन अनुभवी कलाकारक सहयोग बहुते जरूरी ऐछ। से तेहने युवा वर्ग कऽ सहयोग सँ बनल मैथिलि फ़िल्म रिलीज होबऽ लेल तैयार अछि जेकर नाम ऐछ ''लटकले त गेले बेटा" 
एक्सट्रिम मीडिया प्रोडक्शनक बैनरके अधीन बनल ''लटकले त गेले बेटा" मिथिल दर्शक लेल एही फ़िल्म में निमन कॉमेडी कऽ संगे चहटगर गीत आ संगीत देल गेल अछि। इऽ फ़िल्म एकटा पूर्ण कॉमेडी कऽ संगे पारिवारिक फ़िल्म सेहो अछि। फ़िल्मक निर्माता, निर्देशक संगे राइटर छैथ विक्की चौधरी। फ़िल्मक में मुख्य कलाकार छैथ - विक्की चौधरी, माधव राय, आरती गुप्ता, रेणुका कार्की, आर. के. दीपक, राघव झा, पिंकी चौधरी, महेंद्र चौधरी, आशुतोष सागर, रामसेवक ठाकुर आदि। गीत लिखने छैथ - प्रदीप पप्पू। फ़िल्म में मधुर आवाज देने छैथ -उदित नारायण झा, पवन नारायण, विकास झा, माधव राय, देवानंद झा, अनुज श्रीवास्तव।
फ़िल्मक कथा- कॉमेडीकऽ तरका संग एकटा आदमी कऽ दू गोट विवाह भेला के बादक परिस्थिति देखाओल गेल अछि। सम्भव अछि जे इऽ फ़िल्म अहि साल अपनेकऽ नजदीकी सिनेमा घर मऽ रिलीज होयत। फ़ि निमन गीत संगीत, कॉमेडी, सवटा देखैत ई फ़िल्म निश्चित रूप सँ मिथिलाक दर्शक के निमन लागत। मैथिलि प्रेमी सँ आग्रह जे ओ इ फ़िल्म देखैथ, आनन्द लैथ आ मैथिलि फ़िल्मक विस्तार में साझी बनैथ। (Report: प्रभाकर मिश्रा, मिथिला धरोहर)

मंगलवार, 22 जुलाई 2014

Mithilak Pokhair Aa Manchh: Photo Gallery

गुरुवार, 17 जुलाई 2014

दोहाइ हे इन्द्र महाराज! - वैद्यनाथ मिश्र यात्री


उपजत
मोनक खेतमेँ
अगबे कुंठाक फसिल

लागत
सृष्टिक क्रम-पात
आद्यनत बिल्कुल जटिल

झहरत
राति - दिन, सदक्षण
निराशाक कारी - कारी मेघ

लटकत
बढ़ल जाएत नहू - नहू
आवंछित असफलताक घेघ

मिझैत
प्रीतिक मधूर आँच
भेल जाएत सुरूचि नष्ट

मेटैत
बढ़िमका रेख तरहत्थीक
बढ़ल जाएत नानाविध कष्ट

सूझत
हँ, आन किच्छु टा नहि
भासित हैत मात्र त्रास - महात्रास

बूझत
सगरो जहान मतिक्षिप्त
मूह दूसत धुआँठल आकाश

ससरत
दोहाइ हे इन्द्र महाराज!
हिलाउ जुनि अपन कुंडल

उनटत
उनटित जाएत सरिपहुँ
हमरा लेखेँ समग्र भू—मंडल

बुधवार, 16 जुलाई 2014

माधव हमर रटल दुर देश लिरिक्स - Madhav Hamar Ratal Dur Desh Lyrics

माधव हमर रटल दुर देश। 
केओ न कहइ सखि कुसल सनेस।।

जुग जुग जीबथु बसथु लाख कोस। 
हमर अभाग हुनक नहिं दोस।।

हमर करम भेल विहि विपरीति। 
तेजलनि माधब पुरुबिल पिरीति।।

हृदयक बेदन बान समान।
आनक दुःख आन नहिं जान॥ 

भनइ बिद्यापति कवि जयराम। 
दैव लिखल परिनत फल बाम॥ 

रचनाकार: विद्यापति

मंगलवार, 8 जुलाई 2014

सब मनोरथ पूरा करै छथि मनीगाछी के माँ वाणेश्वरी भगवती

मिथिला धरोहर : दरभंगा जिला सँ लगभग 30 कि०मी० मनीगाछी क्षेत्रक भंडारिसम गांव (मकरंदा गामक बीच) के माँ वनेश्वरी भगवती केर ख्याति दूर-दूर तक पसरल छनि ( Maa Vaneshwari Bhagwati, Bhandarisam, Manigachhi) )। एतय श्रद्धालु सिमरिया सँ गंगाजल भैर के मंदिर में अर्पण करैत छथि। एही दरबार मे निक मून सँ जे भी मांगल जाइत अछि माता हुनक मनोकामना पूर्ण करैत छथिन। ओना तऽ एही स्थान पर भक्त के भीर सदिखन लागल रहैत अछि मुदा नवरात्र आ रामनवमी के अवसर पर एतय विशेष मेलाकऽ आयोजन सेहो कैल जाइत अछि। 
माँ वनेश्वरी केर कहानी बड़ पुराण मानल जाइत छनि, करिव आय सँ सैकड़ों बरख पहिले जही समय मुगल सम्राज्यक शाशन छल, मुगल शाशक द्वरा एही ल'ग-पासक ग्रामीण के बहुते तंग कैल जाइत छल, संगे वनेश्वरी (बिना) सँ मुगल शशक विवाह करबाक इच्छा राखय छल, एही करण सँ हिनक पिता श्री (वाने झा) बहुत दुखी रहैत छलथि। ताहि स्थिति सँ त्रस्त भऽ माता वनेश्वरी पोखैर मे समा गेलथी। किछ साल उपरांत माता अपन एकटा भक्त के स्वपन देलखिन, हिनक आदेश पर ओही पोखरी सँ माता वनेश्वरी मूर्ति के बाहर निकालल गेल छल। माता केर प्रतिमा के पीपड़ गाछक तौर राखि देल गेलनि, ताहि दिन सँ एही ठाम माँ वंसावरी केर पूजा-अर्चना होमय लागलनी। 


बुजुर्गक मानि तऽ सैकड़ों वर्ष पूर्व विख्यात मन्दिर मे दरभंगा के महराज लाक्ष्मेषर अपन पुत्र लेल कोबला केने छलथी, हिनक मनोकामना पूर्ण भेला पर दरभंगा महराज द्वरा ई०1872 मे एही स्थान पर मंदिरक निरमान कराओल गेलनी।

शनिवार, 5 जुलाई 2014

पद्मश्री महासुंदरी देवी: मिथिला पेटिंग के माय

मधुबनी, मि.ध: मिथिलांचल के मिथिला पेटिंग के देश विदेश मे लोकप्रिय बनेनिहारि आ पद्मश्री पुरस्कार सँ सम्मानित पद्मश्री महासुंदरी देवी  ( Mithila Painting, Padmashree Mahasundari Devi ) केर निधन 4 जुलाई 2013 भ गेलनि।  तखन ओ 92 वर्षक छलथि। महासुंदरी देवी अपन अंतिम दिन मे मधुबनी जिला कऽ राजनगर थाना क्षेत्र स्थित अपन पैतृक गाम रांटी मे रहि रहल छलथि। हुनका मिथिला पेंटिग के मायक (माता) रूप सेहो जानल जाइत छनि। हुनका मिथिला चित्र कला सँ बहुते लगाव छलनी। महासुंदरी देवी जी अपन अंतिम समयो में मधुबनी पेंटिंग के लेल कार्य कऽ रहल छलथी। 
पद्मश्री सं सम्मानित चारिम महिला कलाकार : हुनका पद्मश्री के अलावा शिल्प गुरु, तुलसी सम्मान आओर राष्ट्रीय, राजकीय पुरस्कार समेत कतेको सम्मान भेटि चुकल छलनी। हुनकर द्वारा निर्मित मिथिला पेटिंग के मांग देश के अलावा विदेशो मे सेहो छलनी। मिथिला पेटिंग के मादे सुंदरी देवी कतेको देशक भ्रमण सेहो केने छलथि। पेंटिंगक आ सशक्त हस्ताक्षर महासुंदरी देवी के नै रहला सँ कला जगत में आयल भारी छति के भरपाई मुश्किल लागी रहल अछि। आब बांस सँ बनल कर्ची-कलम में रंग के भऽरत।