अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
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21 जन॰ 2022
Maithili Kavita
जय जय जय जय भारत माता!
सुखमयि, सुन्दरि, सुमुखि, सुजाता!
जय जय जय जय भारत माता!
पदम पुहुप दल आयत लोचनि!
दरस दान दारिद दुख मोचनि!
केरल काशमीर धरि पसरलि!
नगाभूमिसँ आगाँ ससरलि!
दिशि-दिशि सागर चुंबित चरणा!
सिक्त शीश, हिमगिरि निर्झरणा!
कौस्तुभमणिसम बिंध्य विराजित!
शत-शत छबी, शत शोभा साजित!
गति गभीर ओ मती अवदाता!
जय जय जय जय भारत माता!
14 दिस॰ 2020
Maithili Kavita
12 नव॰ 2020
Maithili Kavita
नान्हि नान्हि टा फूल
उज्जर उज्जर फूल
लाल लाल डंटीवला फूल
सिङरहारक फूल
आसिनक निशाशेष
नबकी पोखरिक दुबिआही भीड़
भए रहल धन्य फूलक पथारसँऽ
कए रहल गम गम गम
बायुमंडल चारू दिशुका
इएह थीक परिजात?
इएह थीक हरसिङार?
रोपि गेल छथि एक्के पाँतो मेँ
सात टा सिङरहारक गाछ
अपन इष्ट देवताक प्रीत्यर्थ
कोनो पुण्यवान् व्यक्ति
के रहथि आ महानुभाव?
की छल हेतइन हुनक नाम?
हृदयानन्द प्रतिहस्त!
तृप्तिनारायण मल्लिक!
प्राणमोहन पाठक!
शुभंकर लाभ!
की छल हेतइन हुनक नाम?
माए अथवा मातामहीक खुनवाओल
हेतइन ई नबकी पोखरि
किंवा मोसम्मात सासुक खुनबाओल होइन
से बेश .... से बश.....
ककरो खुनवाओल हाउक ई पोखरि
किच्छु रहल होइन हुनक नाम!
जे लगा लेग छथि एक्के पाँतीमेँ
???? टा सिङारहारक ई नबगुछली
हुनकहिं नामेँ बीछब हम दू आँजुर फूल
नान्हि नान्हि टा फूल
लाल लाल डंटीवला फूल
16 मार्च 2018
Maithili Kavita
हे निरभ्र आकाश!
हें भारल आकाश!
हे धीपल आकाश!
हे तानल आकाश!
हे तमसाएल आकाश!
कोना क’ जुड़ेतइन अभागलि पृथ्वीक कोखि?
कहिआ धरि पूर्ण हेतइ झरकल दूबिक मनोरथ?
हजार नाँगट गाछ यत्र तत्र ठाढ़
कार कउआक कर्कश स्वरमेँ
चिचिआ उठतहु मने अइखन।
"कतए नुकओने छह अपन ओ तरल अमृतधन"
"कतए नुकओने छह ओ सृष्टिक संजीवनी रसायन"
हमरा सभ ओहिना नहि नष्ट होएब
तोरहि नामेँ करैत जाएब आत्मदाह
एकक पछाति दोसर
तकरा बाद तेसर, तदुपरान्त चारिम
तत्पशचात् पाँचम
एही क्रमें हजारक हजार
आत्मदाह करैत जाएब हमरा सभ
हमरा सभक चिताधू क’ देतहु तोरा अकच्छ
पहुँचि अन्तरिक्षमेँ भ’ जेतहु प्रलयंकर मेध
प्रचंड़ धनघटाक ओ दुर्वान्ति झोंप महाझोंप
क देतहु तोहर दर्पकेँ चूर्ण विचूर्ण
की क’ लेबहक आकर?
तोहर एहि दंभपर खसहु बस बज्र तोँ जाह बरू निखत्तर
हे निरभ्र आकाश!
????धूसर आकाश!
हे धीपल आकाश!
हे भारल आकाश!
हे तानल आकाश!
हे तमसाएल आकाश!
2 फ़र॰ 2018
Maithili Kavita
केहेन बिखाह होइत अछि
बाँस क छाहरि
केहेन बिखाह होइत अछि
बाँस छाहरि
एकोटा धास किए जनमत
बँसबिट्टीक छायातर
कोनो टा अंकुर -
कथू टा बीजक उद्मिद
किंवा गुल्मग्रंथिक पेँपी
कहिओ किए देखबा मेँ आओत
बँसबिट्टी क छायातर ...
केहेन दूरदर्शी रहथि हमर पितामह
बुद्धि छलन कते मेँ ही
आरिसँ सटाकँ कइएक ठाम
लगा गेल छथिन बँसबिट्टी
ने जानि ककर खेत काते काते
कनै छइ हकन्न, सुनैत छइ गारि - फज्झति।

