शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2014

बीतल आध फागुन! - वैद्यनाथ मिश्र यात्री


बीतल आध फागुन!
चिबा चिबा कँऽ आमक मज्जर
कोइली सूर पिजाबए
भन भन भन मधुमाछी भनकए
चिप चिप करइछ दूबि
बचा बचा कँऽ पैर चलइए नेना-भुटका
मधुआ लागल पात चटइए बीछि बीछि कँऽ
उज्जर - पीअर - लाल - कषिश - लिधुराह
रंग बिरंगक मजर देखि कँ
आँखि हमर अगधैल
पतिचोभक ओइ कैल
बीतल आध फागुन!

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