अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
31 दिस॰ 2013
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अन्त श्रावण केर ई मेघ - वैद्यनाथ मिश्र यात्री
अन्त श्रावण केर ई मेघ - वैद्यनाथ मिश्र यात्री
बरिसइत रहओ अहिना
भरि दिन, भरि राति
अन्त रावण केर ई मेघ
भिजबइत रहओ अहिना
कर्मातअन ज’न ज’नीक गत्र गत्र
अन्त श्रावण केर ई मेघ
सुनइत रहओ अहिना
रिकशावला इसखी छोंड़ा क गारि
अन्त श्रावण केर ई मेघ
लोकोक कतवहि मेँ
अर्ध दग्ध ऊपर फाँटू कोइला बिछइत
आयत आँखिवाली सँथाल-छँउड़ीक उपराग
सेहो सुनइत रहओ अहिना
अन्त श्रावण केर ई मेघ
तितबइत रहउ अहिना
तीसी तेलक चिकनाओल ओकर खोपा
अन्त श्रावण केर ई मेघ
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