अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
3 अप्रैल 2014
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टूटि गेल अछि निन्न - वैद्यनाथ मिश्र यात्री
टूटि गेल अछि निन्न - वैद्यनाथ मिश्र यात्री
टूटि गेल अछि निन्न
हे लिअऽ, भक दऽ भेल इजोत
तर्जनी पड़ितहिँ स्विचपर
टेबुल लैम्प स्वयं आलोकित,
आलोकित कएलक सउँसे छत....
काँपी सँऽ संपृक्त पड़ल अछि पेन एक दिश
पेपरवेटक भर सँऽ जाँतल मेघदूत अछि शान्त एक दिश
बिहुँसि रहल अछि ‘वाटरमैन’ क पॉट पियरका लेबुल सटने
-सभक बोझ माथापर धएने
निर्विकार अछि बांसक फट्ठिक ई सस्तउआ मेज
ठामहि छइ समगोत्री चेयर
-ततबे धरि परितोष!
बइसि जाइ छी
बइसव नहि तऽ मगजिक उसिना कोना हेतई तइआर?
हम हो टा नहि, आनो अछि बुधिआर!
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