अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
28 जन॰ 2014
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जून अबए भरि राति ट्रेन - वैद्यनाथ मिश्र यात्री
जून अबए भरि राति ट्रेन - वैद्यनाथ मिश्र यात्री
बइसल बइसल मेल ट्रेनक प्रतीक्षामेँ
बहार भए गेल आँखिक सूत
घंटा भरि लेट
आधा घंटा आओर लेट
पैतालीस मिनट आओर लेट...
आहि रे दैव, की भेलहु तोरा?
कइएक खेप फोड़ल आङुर
कइएक बेर भेल हाफी
चाटि गेल छी मुल्की मैगजीन
सुङुकि आएल छी सात कप चाह
सोँटि लेल अछि दू पाकिट सिगरेट
आहि रे दैव, आब की करू?
रङल-टीपल पेटारक भरेँ ओठङलि
दुरगमनिया कनिआ
सूतल अछि कि जागलि
वोधक अ’ ढ तर!
व’ र मुदा कटइ छइ फोँफ
करिआ कंबल पर ठामहि
सामान रखने अछि सँइति सिरमादिश
कए रहलइए अइहबक ओगरबाहि
सूति-पातिबाली अधबएसू लोकदिन
लालपाढ़िक पीअर साड़ी पहिरन...
माङुर सन एनमेन ओकरा देहक कांति
लगइए केहेन दिब
आब किए बहरैत आँखिक सूत
जूनि अबउ मेल ट्रेन भरि राति।
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