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मिथिला धरोहर | मैथिली पंचांग 2026-27, मैथिली लोकगीत लिरिक्स...

मिथिला धरोहर — मैथिली लोकगीत लिरिक्स, विवाह गीत, मैथिली भगवती गीत लिरिक्स, मैथिली शिव भजन लिरिक्स, भजन, छठ, होली, मधुश्रावणी गीत लिरिक्स। मैथिली पंचांग, विवाह, उपनयन मुहूर्त, मिथिला के मंदिर, लोकदेवता, साहित्यकार परिचय, कथा-कहानी, गोनू झा के कहानी एवं मिथिला संस्कृति से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी।

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1 फ़र॰ 2014

नव नचारी - वैद्यनाथ मिश्र यात्री Nav nachari yatri ji ki poem


अगड़ाही लागउ, वज्र खसउ,
बरू किच्छु होउक...
नहि नबतै तोरा खातिर किन्नहु हमर माथ !
पाथर भेलाह तों सरिपहुँ बाबा बैदनाथ !
बेत्रेक अन्न भ’ रहल आँट नेना-भुटका
दुबरैल आंगुरें कल्लर सभ बीछए झिटुका
मकड़ाक जालसँ बेढ़ल छइ चुलहाक मूँह
थारी-गिलास सब बेचि बिकिनि खा गेलइ, ऊँह
कैंचा जकरा से, खाए भात
क’ रहल मौज से, जकरा छइ कोनो गतात
सरकारी राशन द’ रहलइए-
अन्हरागाँही चउबरदामे चाँइ-चोर
आन्हर-बहीर, बम्भोला !
तोरा पर उठैत अछि तामस हमरा बड्ड जोर
गौरी पहिरथि फाटल भूआ
कार्तिक-गणेश छथि गीड़ि रहल
उसिनल अगबे अल्हुआक पात
बइमान बापसँ की माँगथु ग’ दालि-भात
अपने पबैत छह भोग छप्पनो परकारक
अनका लेखें तँ दुर्लभ छइ आको धथूर
बुझि पड़ितहु जँ सुनितहक-
उपासल कमरथुआ केर मुइल सूर !
बरू किच्छु कह’
पचकल लोढ़ा, तों धन्न रह’
नहि आब नचारी केओ गओतहु !
जे बूड़ि हैत से बोकिअओतहु !
नहि रहलइ ककरो किच्छु मात्र तोहर भरोस ....
माटिक महत्तवकें चीन्हि लेलक ई देश-कोश !
पाथर भेलाह तों सरिपहुँ बाबा बैदनाथ !
नहि नबतै तोरा खातिर किन्नहु हमर माथ !

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