गुरुवार, 24 अगस्त 2017

जय भारती जननी! - वैद्यनाथ मिश्र 'यात्री'


जय जय जय जय भारत जननी!
शत सहस्त्र संस्कृति संगमनी!
जय जय जय जय भारत जननी!

शतश्रुति, शतगंधा, शतरूपा!
शत रस ओ शत परम, अनूपा!

शत शत शत शत दल संचारिणि!
बिध्य-हिमाचल-शिखर-विहारिणि!

शत शत शश्य सुशोभित धरणी!
खनिज भरित, त्रिभुवन मन हरणी!

जय जय जय जय भारत जननी!
शत सहस्त्र संस्कृति संगमनी!
जय जय जय जय भारत जननी।

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