अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
8 मार्च 2016
मधुश्रावणी व्रत कथा : मौना पंचमी के पहिल दिनक कथा
पहिल दिनक कथा — मौना पंचमीक कथा
एक दिन एक बूढ़ी स्नानक हेतु धार गेला पर देखलनि जे धारमे चिकनी पात पर पाँच गोट किछु लहलहाइत छल। ओ जीव बूढ़िके देखि बाजल–हे बूढ़ी। गाम जा लोकके सूचित करियौ जे आइ मौना पंचमी थिकैक। आइ लोक पाँच झाक चिक्कनि माँटि आनि, घर आँगन पवित्रसँ नीपि, तेलकूड़ लगाए, स्नान कए अँगनामे चिकनी माँटिक पाँच टा थूम्हा बनाबथि। ताहिमे सिन्दुर-पिठार लगाए उपरसँ दुबि साटि देथि। नव वासनमे खीर-घोरजाउर रान्हथि। विसहराक पूजा कए हुनका दूध-लाबा चढ़ाबथि आ खीर-घोरजाउर उत्सर्गथि। झोआ नेबो, आमक पखूआ, अमतौआ दाड़िम, नीमक पात, नेड़रा कुश आ धामिक पात आदि चढ़ाबथि। ई सब केलाक बाद आइ सब केओ तीतकोत खाए खीर-घोरजाउर खाथि। घरक दुआरिक दुनू भाग गोबरसँ फेंच काढ़ने नागक चित्र बनाए, ओकर मुँहमे दही आ दूबि लगा देथि। जे केओ एहि तरहें पाबनि करती तिनका सब प्रकारक कल्याण हेतन्हि आ जे ऐना नहि करती तिनका हानि होयतनि।
बूढ़ी नहाके आँगन एलीह तँ गाममे सबके कहि देलथिन। गामक किछु लोक ई पाबनि नहि केलक आ किछु लोक एकरा फूसि-फटक बूझि अनठाए देलक, पाबनि नहि केलक। जे सब पावनि केलक से सब ठीक रहल आ जे सब नहि केलक से सब रातिएमे मरि गेल। गाममे हाहाकार मचि गेल। हारिकें लोक सब फेर बूढ़ीक ओतए आयल आ' पुछलक जे आब कोन उपाय सँ मुइल लोक सब जीवित होएत। बूढ़ीकें किछु नहि फुरलनि तँ फेर दौड़लि धारक किनार गेलीह। ओतय चिकनी पात पर पाँचो जीव ओहिना लहलहाइत छल। ओ पाँचो बहिन बिसहरा छलीह। बूढ़ी हुनका प्रणाम कए गामक सब वृत्तान्त सुनाए पुछलनि जे मुइलहा लोक सबके पुन: जिएबाक कोन उपाय कएल जाए।
बिसहरा कहलनि जे पहिने तँ हमरा अनुसारे ओ सब पावनि नहि केलक तें सब मरि गेल। अब एके उपाय अछि। गाममे जँ ककरो कराहीमे खीर-घोरजाउर लागल होइक तँ ओकरा घोरिकें मुइल लोक सबके चटा देबैक, इहो बुझा देबैक जे अगिला पंचमीकें नाग-पंचमी होएतैक। ओहि दिन सब नियमपूर्वक पावनि करए, तखनहि कल्याण होएतैक।
बूढ़ी गाममे घरे-घरे कराहीमे लागल खीर-घोरजाउर ताकि मुइलहा सबके चटाओल, तखन पुन: ओ सब जीवि गेल। आब ओहो सब प्रसन्न भए बिसहराक बुझाओल अनुसारे पाबनि करए लागल आ' आनन्द सँ रहय लागल। मुइलहा लोक सब पुन: जीबि उठल आ नाग पंचमीक दिन पाबनि केलक से "मड़रए" कहौलक।
• विसहराक जन्म
एक दिन महादेव गौरीक संग सरोवरमे जल-क्रीड़ा करैत छलाह। संयोगवशहुनक वीर्यस्खलन भए गेल। महादेव ओकरा एक पुरैनिक पात पर राखि देलनि। ओहिसँ बिसहरा पाँचो बहिनक जन्म भेल। महादेवकें एहि पाँचो बहिन पर ममता होएब स्वाभाविक छल। ओ नित्य ओहि सरोवरमे स्नान लेल जाथि आ बड़ी-बड़ी काल तक ओहि साँपक पोआ संग खेलाथि। गौरीकें सन्देह होमए लागल जे महादेव एतेक काल तक पोखरिमे की करैत रहैत छथि। एक दिन ओ महादेवक पाछू-पाछू गेलीह तँ देखलनि जे महादेव पोआ सभक संग खेलाइत छथि। ई देखि गौरी तमसाए गेलीह। ओ पोआ सबकें पएरसँ पीचि-पीचिकं फेंकए लगलीह। महादेव मना कएलनि जे ई सब मारबाक पात्र नहि थीक, ई सब अहाँक बेटी थीक। ई सब अनेको कष्ट दूर करत आ कहियो अहूँक उपकार करत। मृर्त्यभुवनमे साओन मासमे एकरा सभक पूजा होयत। जे ऐ पाँचो बहिनक पूजा करत तकरा साँपक डर नहि रहतैक। ओ धन धान्यसँ पूर्ण होयत आ ओकरा सब तरहें कल्याण होएतैक। हम एहि पाँचो बहिनक नाम रखने छी जाया, बिसहरि, शामिलबारी, देव आ दोतलि।
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