शनिवार, 25 जून 2022

Mithila Dharohar Android App Download Free

Mithila Dharohar 

( Mithila Panchang, Maithili Kahani, Lokgeet Lyrics, Mithila Festival, Lok Kala, etc.


Name
Mithila Dharohar
Offered ByTechmi Computer Solutions
Version1.1.4
Package Name com.mithiladharohar.android
Catagory News and Information
Size
22 MB
Release on2022
Update on2022
Requires Android4.0.3 and up


Screen shots -



गुरुवार, 23 जून 2022

चैत मास गृह अयोध्या त्यागल लिरिक्स | विद्यापति

रचनाकार - विद्यापति
बारहमासा गीत

चैत मास गृह अयोध्या त्यागल हानि से भीपति परी
अलख निरञ्जन पार उतरि गेल तपसी के वेश धरी
हो विकल रघुलाथ भये…

कहाँ विलमस हनुमान विकल रघुलाथ भये।
धूप-दीप बिनु मन्दिर सुन्न भैल मास बैसाख चढ़ी
सीमा बीना मन्दिर भेल सुना बन बीच कुहकि रही
कहाँ विलमल हनुमान…

जेठ वान लगे लछमन के धरनी से मरक्षि खसी
वैद्य सुखेन बताबय श्रीजमणि तब लछमन उबरी
हो विकल रघुनाथ भये…
कहाँ विलमल हनुमान…

राम सुमरि बीड़ापान उठायल धवलगिरि चली
मास अषाढ़ घटा-घन घहरे राम सुमरिक चली
हो विकल रघुनाथ भये…
कहाँ विलमल हनुमान…

साबन सर्व सुहावन रघुबन सजमनि लेख न पटी
दामिनि दमके तरस दिखाबे जब मोन सब घबरी
हो विकल रघुनाथ भये…
कहाँ विलमल हनुमान…

भादब परबत भोर उखारल बुन्दक मार परी
निसि अन्धयारी पंथ नहिं सूझल राम सुमरि क चली
हो विकल रघुनाथ भये…
कहाँ विलमल हनुमान…

आसिन मास देखे रघुबर जी देखि लथुमन हहरी
सीता सोचती सोचे रघुबरजी लछुमन सुधि बिसरी
हो विकल रघुनाथ भये…
कहाँ विलमल हनुमान…

अगहन रघुबर आशिष मांगथि हर्षित सब भई
ओहि अबसर अञ्जनिसुत अचला सब मोन हर्षित भई
हो विकल रघुनाथ भये…
कहाँ विलमल हनुमान…

शनिवार, 18 जून 2022

मालविका राज मिथिला पेंटिंग कलाकार

Mithila Painting Artist Malvika Raj 

मालविका राज के जन्म 18 सितंबर 1990 समस्तीपुर के दलित परिवार मे भेलनि। निफ्ट मोहाली सं स्नातक क चुकली मालविका राज फैशन डिजाइनर सेहो छथि। पहिले मालविका राज दिल्ली मे फैशन डिजाइनर के तौर पर काज करय छलीह मुदा बाद कुनो कारणक सं ओ पटना आबि गेलीह। एतय ओ कलाकार अशोक विश्वास के द्वारा मिथिला कला मे प्रशिक्षण लेलीह।

कतेको प्रमुख प्रदर्शनि मे सेहो हुनक कलाक प्रदर्शन भ चूकल छनि। हुनकर एकटा पेंटिंग बाबासाहेब अंबेडकर के मिथिला प्रस्तुति एडिनबर्ग विश्वविद्यालय मे प्रदर्शित भ चुकल छनि। मालविका राज बुद्ध के समयक लोकगीत के चित्रित क के एहि शैली मे सालो सं चली आबि रहल पारंपरिक प्रथा मे विशेष रूप सं बदलाव अनबाक काज केलनि।

मालविका राजक कला के भारत मे जहांगीर आर्ट गैलरी, मुंबई आ भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद आ दिल्ली मे ललित कला अकादमी मे प्रदर्शित कैल गेल अछि। सावित्रीबाई फुले पर आधारित एकटा किताब “सावित्रीबाई और मैं”, संगीता मुले द्वारा लिखित एकटा पुस्तक के चित्रण सेहो केलनि।

बुधवार, 15 जून 2022

चानन रगड़ि सुहागिनी हे गेले फूलक हार - लिरिक्स Chanan ragri suhagini he gele phalak haar

रचनाकार - विद्यापति
बारहमासा गीत

चानन रगड़ि सुहागिनी हे गेले फूलक हार।
सेनुरा सँ संगिया भरल अछि हे सुख मास अषाढ़।।

राजा गेलाह मृग मारन हे वन गेलाह शिकार।
जोगी एक ठाढ़ अंगना में हे रानी सुनि लीय बात हमार।
द दिय भीक्षा जोगी के हे ओ त छोड़ता द्वार।।

सावन बड़ा सुख दावन हे दु:ख सहलो ने जाय।
इहो दुख होइहन्डु रानी कुब्जी के जो कन्त रखली लोभाय।।

भादब भरम भयावन हे गरजै ढ़हनाय
सबके बलम देखि घर में हे ककरा संग जाय

आसिन कुमर आबि गेल हे कि ओ आब ने जिथि
चीढ्ढी में लीखल वियोगिया हे हजमा हाथे देब

कातिक परबहिं लागि गेल हे गोरी-गंगा-स्नान
गंगा नहाय लट झारलऊँ हे सीथ लागे उदास

अगहन सारी लबीय गेल हे फुटि गेल सब रंग धान
प्रभुजी त छथि परदेसिया हे कियो भोगत आन

पुसहिं ओसहिं गिड़ि गेल हे भीजि गेल लाम्बी-लाम्बी केस
केसब सुखाबी ओसरबा हे सीथ लागे उदास

माघहि मास चतुर्दशी हे शीब-ब्रत तोहार
घुमि-फिरि अचलऊँ मन्दिरबा हे चित लागय उदास

फागुन फगुआ खेलबितऊँ हे निरमोहिया के साथ
प्रभुजी के हाथ पीचकारी हे उड़िते अतरी गुलाब

चैतहिं बेली फूलाय गेल हे फूलि गेल कुसुम गुलाब
फूलबा के हार गुथबितहुँ हे भेजितऊँ प्रभु के सनेश

वैसाखहिं बंसबा कटबितऊँ हे रचि बंगला छेबाय
ओहि दे बंगला बीच सुतितऊँ हे रसबेनिया डोलाय

जेठहिं मास भेंट भा गोल हे पिरि गेल बारह मास
प्रभुजी त एला जगरनाथ हे कन्त लीय समुझाय।।

हेरौ उगना हमर भंग पिसना लिरिक्स - He Re Ugna Hamar Bhang Pisna Lyrics

Ugna Hamar Bhang Pisna Lyrics

हेरौ उगना, हेरौ उगना
हमर भंग पिसना, कते गेलैं रूसना
कतेक तोरा तकबौ रौ
एही बऽन में, एही बऽन में
हेरौ उगना, हेरौ उगना
हमर भंग पिसना, कते गेलैं रूसना
कतेक तोरा तकबौ रौ
एही बऽन में, एही बऽन में

हमर गलती के माफ तू क दे
हमर गलती के माफ तू क दे
हमर खाली झोरी तों भैर दे
हमर खाली झोरी तों भैर दे
हेरौ उगना, हेरौ उगना
हमर भंग पिसना, कते गेलैं रूसना
कतेक तोरा तकबौ रौ
एही बऽन में, एही बऽन में

बड़ प्यासल छी प्यास बुझा दे
बड़ प्यासल छी प्यास बुझा दे
अप्पन जटा से गंगा बहा दे
अप्पन जटा से गंगा बहा दे
हेरौ उगना, हेरौ उगना
हमर भंग पिसना, कते गेलैं रूसना
कतेक तोरा तकबौ रौ
एही बऽन में, एही बऽन में

जे कहता उगना उदेता
जे कहता उगना उदेता
तिनका देबेन हम कंगना सनेशा
तिनका देबेन हम कंगना सनेशा
हेरौ उगना, हेरौ उगना
हमर भंग पिसना, कते गेलैं रूसना
कतेक तोरा तकबौ रौ
एही बऽन में, एही बऽन में

विद्यापति हेरैत एही बऽन में
विद्यापति हेरैत एही बऽन में
उगना बैसल छथि हमर मन में
उगना बैसल छथि हमर मन में
हेरौ उगना, हेरौ उगना
हमर भंग पिसना, कते गेलैं रूसना
कतेक तोरा तकबौ रौ
एही बऽन में, एही बऽन में

एल्बम : सनेस ( Maithili Song Lyrics )
गायक : हेमकांत झा ( Singer: Hemkant Jha ) 

बुधवार, 8 जून 2022

कवि चन्दा झा परिचय - Chanda Jha

मिथिला रामायण के रचयिता आ मैथिली साहित्य के प्रख्यात कवि कविवर चंदा झा केर जन्म 1831 ई० मे हिनक नानी गाम सहरसा जिलाक बडगांव मे भेल छलन्हि। कविश्वर लगभग 17-18 वर्षो धरि अपन नानी गांव बडगांव मे रहिके अपन विद्वान नाना पंडित गिरिवर नारायण झा के सानिध्य मे रहिके शिक्षा ग्रहण केने छलाह। कविश्वर चंदा झा के मूल नाम चन्द्रनाथ झा छलनी।

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हिनकर पैतृक ग्राम दरभंगा जिला पिंडारुच गांव ( Pindaruch Darbhanga ) मे छलनी। ओतय स्थानीय जमींदार सं कुनो परेशानी के चलैत अपन गाँव छोइड़ के मधुबनी जिलाक अपन सासुरा थड़ी गाँव जा बसलाह। कविश्वर दरभंगा मे महाराज लक्ष्मीश्वर सिंहक दरबार मे साहित्य विभागक अध्यक्ष सेहो छलाह।
आर्थिक रूप सं विपन्नताक उपरांतो चन्दा झा मैथिली के संरक्षण आ संवर्द्धन के लेल बहुते रास ग्रंथ के रचना करबाक काज केलाह। हिनकर प्रकाशित 19 पुस्तक मे मैथिली भाषा रामायण, (Mithila Bhasha Ramayan ) अहिल्या चरित्र, रस कौमुदी, विद्यापति पद संकलन, गीत सप्तशती, छन्दोग्रंथ, राजावली, चन्द्रपदावली, महेशवाणी, लक्ष्मीश्वर निवास आ गीत सुधा प्रमुख रूप सं शामिल अछि। चंदा झा 1901 मे प्रकाशित साहेब रामदास गीतावली के संपादन सेहो केलैथ। कविवर द्वारा रचित कृति पुरूष परीक्षा, अहिल्या चरित्र आदि के रचना सँ मैथिली साहित्य के एकटा नव आयाम देबाक महत्वपूर्ण कार्य हिनकहि द्वारा कैल गेलनि।

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कविवर चंदा झा के संकलन कार्य, संशोधन कार्य आ उत्साह वर्द्धन आयो कतेको अर्थ मे प्रासंगिक बनल रहल अछि। आधुनिक युग प्रवर्तक कविश्वर चन्दा झा मैथिली आ हिन्दी के प्रकांड विद्वान छलाह। 

शुक्रवार, 3 जून 2022

गायक राम बाबू झा परिचय - Maithili Singer Ram babu Jha Biography

मिथिला धरोहर : राम बाबू झा ( Singer Rambabu Jha ) मिथिलाक एहन गायक छथि जे मैथिली संगीतक तीनो दौर मे बहुते लोकप्रिय रहल छथि। चाहे ओ कैसेट्स के दौर होय या सीडी, डीवीडी के दौर और एखन डिजिटल रूप मे सेहो ओतबे लोकप्रिय छथि। राम बाबू झा के जन्म 26 मई 1974 के मूल रूप सं दरभंगा जिला अंतर्गत बेनीपुर मे भेलनि। पिता मुक्तिनाथ झा आ माता रीता झा के माझिल पुत्र रामबाबू झा के प्राथमिक शिक्षा जनता संस्कृत उच्य विद्यालय डखराम आ कॉलेजक पढ़ाई बहेड़ा कॉलेज सं पूर्ण केलाक उपरांत प्रयाग संगीत समिति इलाहाबाद सं संगीत प्रभाकर आ प्राचीन कला केंद्र चंडीगढ़ सं संगीत प्रवीण के डिग्री लेने छैथ।

प्रारम्भिक समय मे गामक कीर्तन सब मे गीत गेनिहार रामबाबू झा के पहिल ब्रेक भेटलनि 1999 मे नीलम कैसेट्स के माध्यम सं, अंहि एलम्ब के नाम छल 'पैजनिया' जे बहुते लोकप्रिय रहल छल।


इहो पढ़ब :-

● लिरिक्स - आइब गेलियौ परदेस गे मै


बाद मे रामबाबू झा के आवाज मे 'दुर्गा बन्दना', 'सिनुरिया', 'बाबा के धाम', 'झुलनियाँ', 'मइया के पूजा' आदि सहित बहुते रास एलबम रिलीज जे हिनका मिथिला मे चर्चित स्टार बना देलकिनी।

बुधवार, 1 जून 2022

मां कामाख्या मंदिर भवानीपुर, पूर्णिया - Maa Kamakhya Mandir Purnia

(छवि साभार - वरुण वर्मा)
पूर्णिया जिलाक केनगर अंतर्गत मजरा पंचायत के भवानीपुर गांव स्थित माता कामरू कामाख्या करूणामयी छथिन ( Maa Kamakhya Sthan Bhawanipur Majra )। एतय कुष्ठ रोगी के इलाज दैवीय कृपा सं होइत अछि। मान्यता ऐछ जे असम के कामरू कामाख्या मंदिर सं मां एतय आयल छलखिन, बाद मे एतय मुगल काल मे मंदिरक निर्माण कैल गेल छल। 
मान्यता छैक जे लगभग साढ़े चाइर सौ वर्ष पूर्व मजरा निवासी भागीरथ झा कर्जक बोझ आ सेठक दबदबा सं तंग छल। उपर सं दुटा कुमाइर कन्या के विवाहक लेल ओतय के फौजदार हुनका पर दबाव बना रहल छल। एहि चिंताक संग ओ असम के कामगिरी पर्वत पर स्थित माता कामरू, कामाख्या स्थान पहुंच गेलाह। हुनकर भक्ति सं प्रसन्न भऽ के देवी माता हुनका साक्षात दर्शन देबय आ संकट हरय के उपाय बतेलनी। हुनका माटीक किछ अवशेष दऽ के पंडित आ सेठ मानिक फौजदार के बीचक दूरी पर स्थापित करबाक सलाह देलथि। 

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छवि साभार - जर्नादन मेहता
भागीरथ झा नंग-धड़ंग पैदले भवानीपुर पहुंचलैथ आ ओ मिट्टी स्थापित कऽ पूजनोत्सव शुभारंभ कऽ देलैथ। एहिके उपरांत भागीरथ झा शक्तिरूपा माता के आदेशानुसारे अपन दुनु कन्या के विवाह मानिक फौजदारक संग करबाक संदेशा भेज देलैथ। मानिक फौजदार बरियाती लऽ के देवी माता स्थान धरि पहुंचते माता के माया रूपी खेल शुरू भऽ गेलनि।

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जाहिसँ सबटा बरियाती आपसे मे खूनी लड़ाई होमय लागल। देखिते-देखिते सबटा बरियाती सहित क्रूर सेठ मानिक फौजदार सेहो मइर गेल। तहन पंडित भागीरथ झा के ओतय सब मंगदिन के विधिवत पूजन करबाल आदेश भेटलनि। ओतय पंडित के दुनु कन्या श्यामा आ सुंदरी देवी माता के स्थान सं सटल पूबक धरती मे समा गेलीह। अखनो भी माता मंदिर सं सीधे उत्तर जाय बला सड़क कल्याणपुर मार्ग मे सेठ मानिक फौजदार गढ़ के टीला अवस्थित अछि। एहन मान्यता ऐछ जे सब मंगलदिन के असम स्थित माता कामरू कामाख्या मंदिर के दरबाजा दुपहर मे बंद रहैत अछि। एतय आबय बला सब श्रद्धालु माता के पूजनोत्सव के संगे-संग सती श्यामा सुंदरी, मानिक फौजदार, हनुमान मंदिर, शिव परिक्रमा अवश्य करैत अछि।