शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2025

भरदुतिया (भ्रातृ द्वितीया) मंत्र - Bhardutiya Mantra Maithili

भाई-बहिनक प्रेमकऽ प्रतीक भरदुतिया (भ्रातृ द्वितीया) कऽ पर्व दीवाली कऽ दू दिनक बाद, कार्तिक मासक शुक्ल पक्ष केर द्वितीया तिथि केँ मनाओल जाईत अछि। एही पर्व में बहिन भाई केँ निमंत्रण दऽ केँ अप्पन घर बजावैत छथि। अरिपन बना कऽ पिड़ही पर भाई केँ बैसायल जाईत अछि। ललाठ पर पिठार आ सिंदुरक ठोप कऽ, पान सुपारी भाई केँ हाथ में दकेँ बहिन एही पन्ती केँ उचारण करैत छथि - 

मिथिला के भरदुतिया मंत्र :-
जमुना नौतलनि जम के, हम नोतै छी अपन भाई के जहिना जहिना गंगा-यमुना केँ धार बहय, हमर भाई सबहक औरदा बढ़य

गुरुवार, 20 फ़रवरी 2025

बाबा कोन कलम सँ लिखलौं हमर कपार यौ लिरिक्स - Baba Kon Kalam Sa Likhalau Lyrics

बाबा कोन कलम सँ लिखलौं हमर कपार यौ
फसलौं हम मजधार यौ ना
बाबा कोन कलम सँ घसलौं हमर कपार यौ
फसलौं हम मजधार यौ ना

माथा नाचय सदखन काल,
दुख सं रहै छी बेहाल, 
माथा नाचय सदखन काल,
दुख सं रहै छी बेहाल, 
कष्टक लागल रहै आठोधरि भरमार यौ
फसलौं हम मजधार यौ ना

क्यो नहि सुनय हमर ई बतिया,
सोचिते फाटत रहय छतिया,
क्यो नहि सुनय हमर ई बतिया,
सोचिते फाटत रहय छतिया,
बिपति परल ऐछ माथा पर अपार यौ
फसलौं हम मजधार यौ ना

रहल अपनेहि टा पर आस,
बनब अहि केर हम दास,
रहल अपनेहि टा पर आस,
बनब अहि केर हम दास,
मणिकांत सरण में आयल करियौ ने उधार यौ
फसलौं हम मजधार यौ ना
बाबा कोन कलम सँ लिखलौं हमर कपार यौ
फसलौं हम मजधार यौ ना
बाबा कोन कलम सँ लिखलौं हमर कपार यौ
फसलौं हम मजधार यौ ना

शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2025

भरि राति जरैत छी दीप पिया लिरिक्स - Bhari Raati Jarait Chhi Lyrics


भरि राति जरैत छी दीप पिया 
साँझ रहियहि हम मिझाय गेलौं 
कनगुरियहि लागलि जाइत हम 
नहि जानि कोना भुतियाय गेलौं

भोरक फक भेल चान जकाँ 
गाठक टूटल पान जकाँ 
खूजल खोइछक धान जकाँ 
जँह तँह सगरी छिड़ियाय गेलौं

हम खढ थिकहुँ हम पात थिकहुँ 
हम बिसरल कोनहुँ बात थिकहुँ 
बिनु करुआरिक नाव जकाँ 
जेम्हरे तेम्हरे भसियाय गेलों

थाकि गेलहुँ चलिते-चलिते 
तारा डुबले गानिते-गानिते 
काजर बहले कनिते-कनिते 
हम अपनहि नोर नहाय गेलौं

पाथर रहितहुँ, रहबे करितहुँ 
हम काठक जान धुनाय गेलौं 
कह रवींद्र सब ठामक ठामहि 
हम माँझहिं ठाम बिलाय गेलौं।

हमर सासुजी के जेठका दुलरूआ लिरिक्स - Hamar Sasu Jee Ke Chotka Dularua Lyrics


हम गुदरी पहिर रहि लेबै लिरिक्स 
Ham Gudri Pahir Rahi Lebai Lyrics

हम गुदरी पहिर रहि लेबै 
हमरा चाही नै रेशम के नुआ
हमर सासुजीक जेठका दुलरूआ
बौआ कमऊआ,
कतेक दिन रहबै यौ मोरंग में

हे यौ आम मजैर गेल महुआ
हाय सपने में बीतल फगुआ
कटलौ कुहैर दुपहरिया जीवन में

हमरा मरुए के रोटी नीक लागै
हमरा चाही ने खीर पूरी पूआ
अहाँ बिनु भादव अन्हरिया जीवन मे


गुरुवार, 13 फ़रवरी 2025

उतरहि साओन चढ़ल भादव, चहुदिसि कारी रे लिरिक्स - सोहर लोकगीत

उतरहि साओन चढ़ल भादव, चहुदिसि कारी रे
ललना रे, रिमिक-झिमिक मेघ बरिसत, बादल हरखित रे

देवकी दरदे बेयाकुल, दगरिन चाहीअ रे
ललना रे, गोकुल निकट एक नग्र, तहाँ बसु दगरिन रे

जब जन्म लेल यदुनन्दन, बन्हन खुजि गेल रे
ललना रे, खुजि गेल बज्र केबार, पहरू सब सूतल रे

माथ मुकुट कर कंगन, डांरहि घुँघरू बाजु रे
ललना रे, सैह देखि देवकी कानल, देहरी मुरछाइ खसु रे

कीए दैव देलनि, जे कंस हरि लेलनि रे
जूनि कानू अहाँ देवकी, जुनि पछताउ रे
ललना रे, इहो बालक दुखमोचन, ललित अभिलोचन रे

सखि सभ सोहर गाओल, गाबि सुनाओल रे
ललना रे, देवकी भेल बैकुण्ठ, कि पुत्र फल पाओल रे

बाँहि मे रहू ने रहू लिरिक्स - Banhi Me Rahu Ne Rahu Lyrics


बाँहि मे रहू ने रहू 
आँखि मे रहू 
दुनिया मे चारि दिन जे रहू 
सामने रहू 

छी फूल अहाँ माटिक 
हक आदमीक हो 
भँवरा के अहाँ सदिखन 
फटकारने रहू 

आँगन मे तोरा राखब 
गोबर सँ ठांव द 
माथ पर रहू तँ रहू
बामने रहू 

हम लौल-चौल खूब करब 
आओर कहब जे-से 
हमरा पियास धरि कैं 
परतारने रहू

हम बैसि जैब नहि तँ 
अपने सँ रुसि कऽ
कहता 'रविन्द्र' हॅसि कऽ
लट-झार ने करू।


रविवार, 2 फ़रवरी 2025

मैथिली सरस्वती लोकगीत लिरिक्स - मैथिली सरस्वती वन्दना

सरस्वती वन्दना - 1

जयति जय जय ज्ञानदात्री जयति शुभ्र वस्त्रा 
जयति जय जय जगतव्यापणि जयति ज्ञान स्वरुपा,
अज्ञानके अन्धकार हटाउ माँ, ज्ञान ज्योति देखाउ हे माँ । 
श्वेतपद्मासना सुशोभिता, जयति मंगलाकारणी
जयति विद्यादायनी माँ, विद्या करियाँ प्रदान है माँ
मनवाञ्छित फल दिय हे मैया, कलजोरी करै छी प्रार्थना ॥


सरस्वती वन्दना - 2

“हे ! जग जननी ,मातु शारदे , बुद्धि ज्ञान भण्डार भरू माँ !
दास केँ नहि कखनहुँ बिसरू माँ ,  अज्ञानक अन्हार  हरू माँ !
भव केर माया बिचरि रहल छी ,गरिमा ज्ञानक कोष भरू माँ ।
मोह जाल  तुअ बिसरि रहल छी ,भाव बंधन मे ससरि रहल छी ,
महासरस्वती हे ,कुल देवी ,हे ,वरदायिनी ,दया करू माँ ।


सरस्वती वन्दना - 3

महाभाग्यवती मैया आऊ पुन हे मैया अहाँ आऊ पुनः हे मैया।
वेद वेदान्त वेदांग विद्या स्वरुपा मैया

सवदेवता सँ वन्दिता अहां थिकौ हे मैया । 
अयलहुँ शरण अहाँ के विद्या दिय हे मैया अहां के विद्या दिय हे मैया........!


सरस्वती वन्दना - 4

हे उदार बुद्धिवाली बुद्धि स्वरुपा मैया, 
अज्ञानताक अन्धकार अहां हटाउ मैया। 
अएलहू शरण अहां के बुद्धि दिय हे मैया अहां बुद्धि दिय हे मैया।

श्वेत कमलासन ज्ञानस्वरुपा मैया, 
हे विशाल नेत्रवाली ज्ञानदात्री मैया। 
ज्ञानरुपी ज्योती अहां देखाउ मैया, अहां देखाउ मैया। 
जगतव्यापिणी छी आद्या थिक हे मैया,
मञ्जुल मूखवाली ब्रम्हाप्रिया छी मैया
विणा के सूरसं माँ जगके लुभाउ मैया, जग के लुभाउ मैया । 

स्वर लय तालमात्रा किरण ने किछु जनैया
सवहोय है माँ सुखी कलजोरिक कहैया 
दियौ माँ सबके आशिष रहियौ माँ प्रसन्न रहियाँ माँ प्रसन्न रहियौ।


सरस्वती गीत- 5

हंसपर स्वेत कमल आसन ताहि उपर सरस्वती॥
शुभवस्त्र के धारण कयने वीणा सँ शुशोभिता ।
हंसपर स्वेत कमल आसन ताहि उपर सरस्वती।

दहिन हाथमे स्फटिक माला वाम हाथ पोथी नेने। 
हंसपर स्वेत कमल आसन ताहि उपर सरस्वती।
ब्रम्हा विष्णु महेश जिनकर सदत स्तुती बंदिता। 
सदा प्रशन्न रहु किरण पर दिअ अभय वरदान सबके। 
हंस पर स्वेत कमल आसन ताही उपर सरस्वती।