...
🌺🌸
✨ आगामी त्यौहार
मधुश्रावणी
📅 अगस्त 2026
और पढ़ें »
📢
आब मेनू के बहुत सरल बना देलगेल अछि, ऊपर में बांया कात तीन लाइन पर क्लिक क अपन पसन्दक सामग्री देखी-पढ़ी सकय छी।

13 फ़र॰ 2025

उतरहि साओन चढ़ल भादव, चहुदिसि कारी रे लिरिक्स - सोहर लोकगीत

उतरहि साओन चढ़ल भादव, चहुदिसि कारी रे
ललना रे, रिमिक-झिमिक मेघ बरिसत, बादल हरखित रे

देवकी दरदे बेयाकुल, दगरिन चाहीअ रे
ललना रे, गोकुल निकट एक नग्र, तहाँ बसु दगरिन रे

जब जन्म लेल यदुनन्दन, बन्हन खुजि गेल रे
ललना रे, खुजि गेल बज्र केबार, पहरू सब सूतल रे

माथ मुकुट कर कंगन, डांरहि घुँघरू बाजु रे
ललना रे, सैह देखि देवकी कानल, देहरी मुरछाइ खसु रे

कीए दैव देलनि, जे कंस हरि लेलनि रे
जूनि कानू अहाँ देवकी, जुनि पछताउ रे
ललना रे, इहो बालक दुखमोचन, ललित अभिलोचन रे

सखि सभ सोहर गाओल, गाबि सुनाओल रे
ललना रे, देवकी भेल बैकुण्ठ, कि पुत्र फल पाओल रे

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

अपन रचनात्मक सुझाव निक या बेजाय जरुर लिखू !

🎵 मैथिली लिरिक्स और देखें »
🪔 पावनि-तिहार और देखें »