शुक्रवार, 29 जनवरी 2016

लाल छउ लिलोह माँ करेज लगाले लिरिक्स - Lal Chhau Liloh Maa Karej Lagale Lyrics

लाल छउ लिलोह माँ करेज लगाले, 
कोरा मे उठा ले।
दुनिया मे अपन आर के हेतइ ? 

जे किछु अपराध हमर बिसरि जाउ मैया,
भव समुद मे डुबैछ आइ हमर नैया। 
नेह नाव पर चढा किनार लगादे,
कोरा मे उठाले॥ 
दुनिया मे...

प्रेम के पियास लेने देख कियो एलउ, 
माय माय करैति कियो चरण मे लोटेलउ 
चरण के नहि झाङ मा शरण मे लगाले, 
कोरा मे उठा ले॥
दुनिया में...

स्नेह बिनु प्रदीप केर मिझा न जाइक बाती,
कहतै के माय छौ कठोर तोहर छाती। 
हम अन्हार में उदार ज्योति देखा दे, 
कोरा मे उठा ले। 
दुनिया मे अपन आर के हेतई ?

गीतकार: मैथिली पुत्र प्रदीप (प्रभुनारायण झा)

शुक्रवार, 22 जनवरी 2016

Writer Pandit Madhukant Madhukar Bio | मिथिला के दोसर विद्यापति पंडित मधुकांत मधुकर

मिथिला धरोहर, सहरसा : मिथिला के दोसर विद्यापति के रूप मे चर्चित सहरसा जिलाक चैनपुर ग्राम निवासी पंडित मधुकांत मधुकर जी केर ९४वां जन्म दिन मंगलदिन के धूमधाम सँ मनायल गेलनि। एकटा अप्रितम शिवभक्त और संस्कृत संगेह मैथिली भाषा साहित्य के श्रष्टा के रूप मे मानल जाइत छथि।श्री मधुकांत मधुकर जी अपन पिता स्वरूप लाल झा और माता छेदनी देवी के निरंतर प्रयास सँ शिक्षा-दीक्षा प्राप्त कऽ शिक्षक पद के बखूबी दायित्व निर्वहन केलनि। अपन शिक्षण पेशा के संगेह लेखन कार्य मे सेहो महारत हासिल केलनि। 

इहो पढ़ब :-

१९६८ सँ १९७४ धरि मधुकर बाबा आकाशवाणी पटना मे योगदान दऽ सांस्कृतिक प्रवचन के माध्यम सँ  समाज के नवचेतना प्रदान केलथि। हुनक प्रकाशित रचना मे समाज सौगात नवीन नचारी अभिनव नचारी, मधुकर नचारी, नीलकंठ मधुकर पदावली समलित अछि। ओहि प्रकार नारद भक्ति सूत्र केर मैथिली अनुवाद सेहो कऽ मिथिला के नव दिशा आ ऊंचाई प्रदान केलनि। मधुकर बाबा १९७१ मे नीलकंठ कमरथुआ संघ के स्थापना केलनि जे परम्परा आयो चली रहल अछि। ताहिके अंतर्गत माघ मास मे हजारों कमरथुआ हरे-राम हरे राम..हरे-कृष्ण केर कीर्तन कऽ बैद्यनाथ धाम जा रहल छथि। मधुकर बाबा मिथिला मे अध्यात्म आ समाजसेवा के नव आयाम देलनि। हुनकर दीर्घायु जीवनक कामना करते हुनक द्वारा मैथिली एवं संस्कृत साहित्यक क्षेत्र मे हुनक उल्लेखनीय कार्य के देखैत हुनका मिथिला रत्न आ साहित्य अकादमी के द्वारा पुरस्कृत कैल जेवाक ग्रामीणों सब मांग केलैथ अछि।

गुरुवार, 21 जनवरी 2016

अहिंक सिनेह भेटल से सही लिरिक्स, जीवन गीत - Ahink Sineh Bhetal Se Sahi Song

जननि उदरसँ, भेलहुँ बहार, 
माय हमर पड़ि गेलीह बीमार। 
सतत उपेक्षित बनल रही
अम्बे! अहिंक सिनेह भेटल से सही॥ 

भेटइत छल नहि बकरीक दूध, 
कनइत-कनइत होइ बेसूध। 
अहिंक दयामृत पिबैत रही, 
अम्बे! अहिंक सिनेह भेटल से सही॥

जखन भेटल नहि पुष्ट अहार, 
झक-झक जागल छातीक हाड़। 
करुण नयनसँ तकैत रही, 
अम्बे! अहिंक सिनेह भेटल से सही॥

बैसल कण्ठ क्षणिक संचार, 
आँखिमे छल गुज-गुज अन्हार। 
आश अहिंक छल आठो घड़ी, 
अम्बे! अहिंक सिनेह भेटल से सही॥

भेलहुँ जखनहि वयस कशोर, 
अहिंक चरणकेर धयल पछोड़। 
भजन अहिंक नित रचैत रही, 
अम्बे! अहिंक सिनेह भेटल से सही॥

संसारी सभ शिक्षा लेल, 
सरकारी सेवा भेटि गेल। 
सदिखन बनल तबाह रही, 
अम्बे ! अहिंक सिनेह भेटल से सही॥

स्वप्न देखल जगजननी रूप, 
भेटि गेल संबल सुपथ अनूप। 
जागल पूर्व पुण्य श्रद्धामयी, 
अम्बे! अहिंक सिनेह भेटल से सही॥

मा सीते! अहाँ भेलहुँ समीप,
तेँ श्रीमैथिलिपुत्र 'प्रदीप'।
जनम-जनम तुअ चरण गही, 
हे अम्बे! अहिंक सिनेह भेटल से सही॥

गीतकार: मैथिली पुत्र प्रदीप (प्रभुनारायण झा)

श्यामल पहुनमा बिनु निन्दियो ने भावे लिरिक्स - मैथिली कीर्तन Shyamal pahunma binu nindiyo ne bhave

श्यामल पहुनमा बिनु निन्दियो ने भावे, सुनू हे सजनी
मनमा चोरौने नेने जाय, सुनू हे सजनी...

नीको नहि लागे मोरा, दिन और रतिया, सुनू हे सजनी
दुअरो अंगनमा ने सोहाय, सुनू हे सजनी...

सीया जी के पाबी भेल, मोन परसनमा, सुनू हे सजनी
भेलथिन विधाता बड़ सहाय, सुनू हे सजनी...

लतिका स्नेह गाबे, किछुओ ने भावे, सुनू हे सजनी
प्रभु पर सँ दिल नहि जाय, सुनू हे सजनी...

रहि-रहि कऽ जिया ललचाय हो लिरिक्स - मैथिली कीर्तन

रहि-रहि कऽ जिया ललचाय हो, 
मुरलिया के धुन सुनि
मुरलिया के धुन सुनि, बसुरिया के धुन सुनि, 
रहि-रहि कऽ जिया ललचाय हो, 
मुरलिया के धुन सुनि...

ब्रह्मा त्यागल ब्रह्मलोक केँ, 
शिवजी तेजल कैलाश हो
राजा छोड़ल राजपाट केँ, 
रानी छोड़ल शृंगार हो, 
मुरलिया के धुन सुनि ...

गइया छोड़ल घासो चरब, 
बछडू छोड़ल हुंकार हो, 
मुरलिया के धुन सुनि...

शुक्रवार, 15 जनवरी 2016

गोठ बिछनी - वैद्यनाथ मिश्र यात्री

बीछि रहल छैं बंगोइठा तों
घूमि घामि कएँ बाध-बोनमे
पथिआ नेने भेल फिरई छैं
तिनू खूट, चारिओ कोनमे
मैल पुरान पचहथ्थी नूआ
सेहो फाटल चेफड़ी लागल
देहक रङ जमुनिआ, तइपर
मुँह माइक गोटीसँ दागल

बगड़ा जेना लगाबाए खोंता
तेहने रुच्छ केस छउ तोहर
दू छर हारी मात्र गराँमे
केहने विचित्र भेस छउ तोहर

माघक ठार, रौद बैसाखक
तोरा लेखे बड़नी' धन सन
दीन बालिके अजगुत लागए
केहेन कठिन छउ तोहर जीवन

कने ठाढ़ी हो, सुन कहने जो
नाम की थिकउ, कतए रहइ छैं
बीतभरिक भए कोन बेगतें
एते कष्ट आ दुक्ख सहई छैं

वंदना - वैद्यनाथ मिश्र यात्री

हे तिरहुत, हे मिथिले, ललाम !
मम मातृभूमि, शत-शत प्रणाम !
तृण तरु शोभित धनधान्य भरित
अपरूप छटा, छवि स्निग्ध-हरित
गंगा तरंग चुम्बित चरणा
शिर शोभित हिमगिरि निर्झरणा
गंडकि गाबथि दहिना जहिना
कौसिकि नाचथि वामा तहिना
धेमुड़ा त्रियुगा जीबछ करेह
कमला बागमतिसँ सिक्त देह
अनुपम अद्भुत तव स्वर्णांचल
की की न फुलाए फड़ए प्रतिपल
जय पतिव्रता सीता भगवति
जय कर्मयोगरत जनक नृपति
जय-जय गौतम, जय याज्ञवल्कय
जय-जय वात्स्यायन जय मंडन
जय-जय वाचस्पति जय उदयन
गंगेश पक्षधर सन महान
दार्शनिक छला’, छथि विद्यमान
जगभर विश्रुत अछि ज्ञानदान
जय-जय कविकोकिल विद्यापति
यश जनिक आइधरि सब गाबथि
दशदिश विख्यापित गुणगरिमा
जय-जय भारति जय जय लखिमा
जय-जय-जय हे मिथिला माता
जय लाख-लाख मिथिलाक पुत्र
अपनहि हाथे हम सोझराएब
अपनेक देशक शासनक सूत्र
बाभन छत्री औ’ भुमिहार
कायस्थ सूँड़ि औ’ रोनियार
कोइरी कुर्मी औ’ गोंढि-गोआर
धानुक अमात केओट मलाह
खतबे ततमा पासी चमार
बरही सोनार धोबि कमार
सैअद पठान मोमिन मीयाँ
जोलहा धुनियाँ कुजरा तुरुक
मुसहड़ दुसाध ओ डोम-नट्ट...
भले हो हिन्नू भले मुसलमान
मिथिलाक माटिपर बसनिहार
मिथिलाक अन्नसँ पुष्ट देह
मिथिलाक पानिसँ स्निग्ध कान्ति
सरिपहुँ सभ केओ मैथिले थीक
दुविधा कथीक संशय कथीक ?

ई देश-कोश ई बाध-बोन
ई चास-बास ई माटि पानि
सभटा हमरे लोकनिक थीक
दुविधा कथीक संशय कथीक ?
जय-जय हे मिथिला माता
सोनित बोकरए जँ जुअएल जोंक,
तँ सफल तोहर बर्छीक नोंक !
खएता न अयाची आब साग !
ककरो खसतैक किएक पाग ?
केओ आब कथी लै मूर्ख रहत ?
केओ आब कथी लै कष्ट सहत ?
केओ किअए हएत भूखैं तबाह ?
केओ केअए हएत फिकरें बताह ?
नहि पड़ल रहत, भेटतैक काज !
सभ करत मौज, सभ करत राज !
पढ़ता गुनता करता पास-
जूगल कामति, छीतन खवास
जे काजुल से भरि पेट खएत
ककरो नहि बड़का धोधि हएत
कहबओता अजुका महाराज
केवल कामेश्वरसिंह काल्हि
हमरालोकनि जे खाइत छी
खएताह ओहो से भात-दालि

अछि भेल कतेको युग पछाति
ई महादेश स्वाधीन आइ
दिल्ली पटना ओ दड़िभंगा
फहराइछ सभटा तिनरंगा
दुर्मद मानव म्रियमाण आइ
माटिक कण कण सप्राण आइ
नव तंत्र मंत्र चिंता धारा
नव सूर्य चंद्र नवग्रह तारा
सब कथुक भेल अछि पुनर्जन्म
हे हरित भरित हे ललित भेस
हे छोट छीन सन हमर देश
हे मातृभूमि, शत-शत प्रणाम!!

मिथिले - वैद्यनाथ मिश्र यात्री

मुनिक शान्तिमय-पर्ण कुटीमे
तापसीक अचपल भृकुटीमे
साम श्रवणरत श्रुतिक पुटीमे
छन अहाँक आवास।
बिसरि गेल छी से हम
किन्तु न झाँपल अछि इतिहास

यज्ञ धूम संकुचित नयनमे,
कामधेउनु -ख़ुर खनित अयन में
मुनिक कन्याक प्रसून चयन में
चल आहांक आमोद
स्मरणों जाकर करॆए अछि छन भरि,
सभ शोकक अपनोद।

शारदा -यति जयलापमे
विद्यापति -कविता -कलापमे
न्यायदेव नृप-पतिक प्रतापमे
देखिय तोर महत्व
जाहि सं आनो कहेइच जे अछि
मिथिलामे किछु तत्व।

कीर दम्पतिक तत्वादमे
लखिमा कृत कविताक स्वादमे
विजयि उद्यनक जयोन्माद मे
अछि से अद्वूत शक्ति
जहि सं होएछ अधर्मारिकहुकें
तव पद पंकज मे भक्ति

धीर अयाची सागपात मे
पद बद्ध प्रतिभा - प्रभातमे
चल आहाँक उत्कर्ष
ऒखन धरि जे झाप रहल अछि
हमर सभक अपकर्ष।

लक्ष्मीनाथक योगध्यान मे
कवी चंद्रक कविताक गान में
नृप रमशेवर उच्च ज्ञानमे
आभा अमल आहाँक
विद्याबल विभवक गौरवमे
अहँ ची थोर कहांक?

बुधवार, 13 जनवरी 2016

कविक स्वप्न - वैद्यनाथ मिश्र यात्री


जननि हे! सूतल छलहुँ हम रातिमे
नीन छल आयल कतेक प्रयाससँ।
स्वप्न देखल जे अहाँ उतरैत छी,
एकसरि नहुँ-नहुँ विमल आकाशसँ।
फेर देखल-जे कने चिन्तित जकाँ
कविक एहि कुटीरमे बैसलि रही।
वस्त्र छल तीतल, चभच्चामे मने
कमल तोड़ै लै अहाँ पैसलि रही।
श्वेत कमलक हरित कान्ति मृणालसँ
बान्हि देलहुँ हमर दूनू हाथकेँ।
हम संशकित आँखि धरि मुनने छलहुँ,
स्नेहसँ सूँघल अहाँ ता’ माथकेँ।
फेर देखल कोनमे छी ठाढ़ि मा,
किछु कहय ओ किछु सुनय चाहैत छी।
भय रहल अछि एहन कोनो वेदना
जाहिसँ शिरकेँ धुनय चाहैत छी।
बाजि उठलहुँ अहाँ हे कल्याणमयि!
उठह कवि! हमही थिकहुँ ओ देवता।
राति-दिन जकरा तकैत रहैत छह
आँखि मुनि, लय कल्पनाक सहायता।
विद्ध क्रौंचक वेदनासँ खिन्न भय
बाल्मीकिक कण्ठसँ फूटलि रही।
आइओ हम पड़लि कमला कातमे
छी उपेक्षित, पूल जनु टूटलि रही।
तोर तन दौड़ैत छहु कोठाक दिस,
पैघ पैघ धनीक दिस, दरबार दिस।
गरीबक दिस ककर जाइत छै नजरि,
के तकै अछि हमर नोरक धार दिस।
कय रहल छह अपन प्रतिभा खर्च तोँ
ताहि व्यक्तिक सुखद स्वागत गानमे।
जकर रैयति ठोहि पाड़ि कनैत छै
घर, आङन, खेत ओ खरिहान मे।
श्वेत कमलक हरित कान्ति मृणालसँ
बान्हि देलियहु तोहर दूनू हाथकेँ।
ओम्हर देखह हथकड़ी सँ बद्ध-कर
देशमाता छथि झुकौने माथकेँ।
हाय! ई राका निशा, तोँ मस्त भय
करइ छह अभिसार नीलाकाशमे।
कल्पनाक बनाय पाँखि उड़ैत छह
मन्द मलयानिलक मृदुच्छवासमे।
तोँ जकर लगबैत छह सदिखन पता,
सुनह कवि! हमही थिकहुँ ओ देवता।
जिन्दगी भरि जे अमृत-मन्थन करय,
जिन्दगी भरि जे सुधा संचित करय,
ओ पियासेँ मरि रहल अछि, ओकरे
अमृत पीबासँ जगत वंचित करय,
परम मेधावी कते बालक जतय
मूर्ख रहि, हा! गाय टा चरबैत छथि।
कते वाचस्पति, कते उदयन जतय
हाय! वन-गोइठा बिछैत फिरैत छथि।
तानसेन कतेक रविवर्मा कते,
घास छीलथि वाग्मतीक कछेड़मे।
कालिदास कतेक, विद्यापति कते
छथि हेड़ायल महिसवारक हेँड़मे।
अन न छैं, कैंचा न छैं, कौड़ी न छै’
गरीबक नेना कोना पढ़तैक रे!
उठह कवि! तोँ दहक ललकारा कने,
गिरि-शिखरपर पथिक-दल चढ़तैक रे!
हमर वीणा-ध्वनि कने पहुँचैत जँ
सटल पाँजर बोनिहारक कानमे।
सफल होइत ई हमर स्वर-साधना
चिर-उपेक्षित जनक गौरव-गानमे।
नावपर चढ़ि वाग्मतीक प्रवाहमे
साँझखन झिझरी खेलाइ छलाह तोँ।
वास्तविकता की थिकै’ से बुझितहक
बनल रहितह जँ कनेक मलाह तोँ।
आइ गूड़ा, काल्हि खुद्दी एहिना,
तोहर बहिकिरनी कोना निमहैत छहु?
साँझ दैं छहु हाय! ओ पतलो जरा,
गारि, फज्झति मोन मारि सुनैत छहु।
ओकर नोरक लम्बमान टघारमे
गालपरसँ कवि! हमहु बहि जाइ छी।
कल्पनामय प्रकृति तोहर देखिकेँ,
की करू हम ऐंचि कय रहि जाइ छी।
छह तोरा जकरा सङे एकात्मता,
सुनह कवि! हमही थिकहुँ ओ देवता।

शनिवार, 9 जनवरी 2016

एहि एप'क जरिए विदेशी सेहो सीख सकता मैथिली

मैथिली भाषा आब सेहो हाईटेक भ रहल अछज। मैथिली मे वेबसाइट त बहुते अछि। मुदा पहिल बेर एकटा मोबाइल एप बनायल गेल अछि। मैथिली साहित्य संस्थान, पटना के लेल इ एप इंटर पास युवक अच्युत तैयार केलैथ छथि। एहि एप'क माध्यम आब गैर मैथिली भाषी सेहो आसानी सँ मैथिली सीख स्कताह। आबय वला दिन मे एहि मदद सँ जर्मन, फ्रेंच भाषी सेहो जर्मनी और फ्रांस मे बैसले मैथिली सीख सकताह। मैथिली भाषा के पहिल एप के लोकार्पण शुक्रवार भेल अछि

संस्थान के सचिव भैरवलाल दास और कोषाध्यक्ष डा.शिव कुमार मिश्रा के मुताबिक एहि एप के किओ भी अपन एंड्रॉयड मोबाइल पर आसानी सँ डाउनलोड क सकैत अछि। शुरुआत मे त एहि पर संस्थान सँ जुड़ल सबटा जानकारियां उपलब्धकैल जायत। संगेह मिथिलांचल के समृद्ध कला-संस्कृति, मैथिली के गीत, साहित्य आ धरोहर के जानकारी भेट सकत। धीरे-धीरे एहि मैथिली सीखबाक ट्रेनिंग सेहो देल जायत।

एहि लेल ऑडियो और वीडियो सेहो एहि पर अपलोड कैल जायत। एहि एप के प्रयोग यूपीएससी के परीक्षा मे बैसय वला मैथिली भाषा के परीक्षार्थी सेहो क सकताह। एहि एप'क मदद सँ आब छात्र-छात्रा दिल्ली, मुंबई केतओ भी घर बैसल मैथिली के तैयारी क सकता। एहि एप के विकसित केनिहार अच्युत अमेरिका के दु विश्वविद्यालय मे इंजीनियरिंग मे नामांकन के लेल पात्रता परीक्षा पास केने छथि।
Report : Live हिन्दुस्तान

शुक्रवार, 8 जनवरी 2016

प्रेरणा - वैद्यनाथ मिश्र यात्री

जगमे सभसौं पछुआयल छी, मैथिल गण! आबहु आगु बढू;
निज अवनति-खाधिक बाधक भै मिलि उन्नति-शिखरक उपर चढू।

अछि हाँइ हाँइ कै लागि पड़ल सभ अपना अपना उन्नतिमे,
उत्थानक एहि सुभग क्षणमे घर बैसि अहीं ने बात गढू।

‘राणा प्रताप, शिवराज, तिलक’ हिनका लोकनिक जीवन-कृति सैं,
तजि आलसकेँ प्रिय बन्धु वृन्द! किछु सेवाभावक पाठ पढू।

भाषा, भूषा ओ भेष अपन हो जगजियार झट जगभरिमे,
ई अटल प्रतिज्ञा ऐखन कै पुनि मातृभूमि पर सोन मढू।

गुरुवार, 7 जनवरी 2016

विषहरि विषहरि, करे छी पुकार लिरिक्स

Vishahari Vishahari kare chhi pukar

विषहरि विषहरि, करे छी पुकार
कतहुँ ने देखै छी, जननी हमार
तेल दे रे तेलिया भइया, दीप दे कुम्हार
बाती दे रे पटबा भइया, लेसू प्रहलाद
नाव दे रे मलहवा भइया, घरू करूआर
जायब सरोवर-पार होइए अबेर

बुधवार, 6 जनवरी 2016

मैथिली सिनेमा मे प्राण फुकत “मिथिला मखान"

मिथिला धरोहर, दिल्ली, प्रभाकर मिश्र : क्षेत्रीय भाखा मे एहन फ़िल्म निर्माण कुनो जुनूनी निर्देशक टा कऽ सकैत अछि। निर्देशक नितिन नीरा चन्द्र किछु एहने जुनून लऽ के चलल छैथ। एक बेरा फेर सँ ओ मिथिलांचलक गाम मे छथि। एही बेरा हिनक भाखा मैथिलि अछि। फ़िल्मक नाम अछि 'मिथिला मखान" और खास बात इ अछि जे ओ वास्तविक लोकेशन पर फ़िल्म शूट कऽ केने छैथ। मैथिली सिनेमा के ५० बरख पूर्ण भऽ चुकल अछि, अपन प्रोडक्शन कंपनी चंपारन टॉकीज के दिस सँ ओ मैथिली सिनेमा के आदरांजलि दऽ रहल छथि, फ़िल्म “मिथिला मखान प्राइवेट लिमिटेड" के रूप मे। बरख १९६५ मे पहिल मैथिली फ़िल्म कन्यादान प्रदर्शित भेल छल।

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आबै वला एही फ़िल्म के फिल्मांकन न्युयोर्क आ टोरंटो के उपरान्त मिथिलांचल (दरभंगा), सुपौल आ नेपाल कैल गेल अछि। निर्देशक नितिन नीरा चन्द्र के पूर्ण कोशिश अछि जे फ़िल्म के तकनीकी रूप सँ सर्वश्रेष्ठ तरीका सँ प्रस्तुत कैल जाय। ताहि लेल एही फ़िल्म मे सिनेमेटोग्राफर के रूप मे जस्टिन जे चैंबर्स जेहन दक्ष तकनिशियन के शामिल कैल गेल अछि। कलाकार रूप अधिसंख्य नाम एहेन अछि जे हिन्दी फिल्म उद्योग मे अपन प्रतिभा प्रदर्शित कऽ चुकल छथि। मुख्य भूमिका मे क्रान्ति प्रकाश, अनुरिता झा आ पंकज झा एहने नाम अछि। तहिना मैथिली रंगमंच केर माँ प्रेमलता मिश्र प्रेम संग अनेको परिपक्व अभिनेता-अभिनेत्रीक उपस्थिति अछि एहि फिल्म मे। प्रवेश मल्लिक केर संगीत मे सुरेश वाडकर आ श्रेया घोसाल केर मधुर गायन सेहो सुनवा के लेल भेटत। आय जे पहचान मराठी सिनेमा बनेलक अछि, वैह पहचान अगर मैथिलि फ़िल्म के भेटत तऽ नव सभ्यता विकसित होयत। मैथिली फिल्म लेल कैल गेल इ प्रयास निश्चित रूप सँ मैथिलि सिनेमा के वैश्विकता प्रदान करबाक मे सफल रहत, से शुभकामना अछि।

शुक्रवार, 1 जनवरी 2016

गुरू चरणमे अभिनन्दन लिरिक्स - Guru Charan Me Abhinandan Song

गुरू चरणमे अभिनन्दन। 
गुरूदेव चरणमे अभिनन्दन। 
अपने मे मातृ ममत्व सदा, 
माताक हृदय मे गुरूक रूप। 
जेहि ठाम न भाव अहाँक गुरू,
 से हृदय सदा थिक अन्धकूप। 
जे गुरूक कृपा नहि पाबि सकय, 
तकरे होइत अछि दुर्गजन॥
गुरूदेव चरण...

 छी स्वयं अहाँ श्री ब्रह्म रूप, 
छथि ब्रह्म अहीं मे व्याप्त सदा। 
ब्रह्मण्य देव छी अहीं सदा, 
अपने श्रृष्टिक सभ मर्यादा। 
तें अहिंक भावसँ प्रमुदित अछि, 
सभ शिष्य समूहक स्पन्दन। 
गुरूदेव ...

अपने छी गंगाजल समान, 
शिव शंभु जटा कैलाशधाम।
 गुरूदेव महेश्वर स्वयं अहाँ, 
अपनेक तुल्य नहि अछि प्रमाण। 
गंगासागर सन छी विशाल, 
कल कल निनादिनी अभिगुंजन। 
गुरूदेव ....

अपने श्री विष्णु समान गुरू, 
दर्शन मे महासुदर्शन छी। 
सर्वश्व शक्ति- सम्पन्न अहाँ, 
श्रृष्टिक अनुपम आकर्षक छी। 
कमलाशन हे श्री कमलनेत्र, 
पालन कर्ता संहार सृजन। 
गुरूदेव...

आरती हेतु सत् - सत् प्रदीप, 
राखल अछि अपने केर समीप। 
महिमा अपार के गिाबि सकत, 
कवि कोविद हो वा स्वर महीप। 
कण कण मे महिमा आछि व्यापित, 
भगवान भक्त मे अनुबंधन। 
गुरूदेव चरणमे अभिनन्दन॥
गुरूदेव चरणमे अभिनन्दन॥

गीतकार: मैथिली पुत्र प्रदीप (प्रभुनारायण झा)

संतशिरोमणि सदा सरलचित सीताराम उपासी - सीता महिमा लिरिक्स

संतशिरोमणि सदा सरलचित सीताराम उपासी
रामचन्द्र शुभ नाम रामप्रिय श्रद्धाभक्ति हुलासी 
मठाधीश गरिमा गुण गौरव गाहर ग्राम निवासी
रामचरितमानस के मधुकर हरिपद प्रीति पियासी
भाव सुमनमय छोट पुस्तिका भक्त समाजक दर्पण
स्नेहलता लतराय चरण पर सादर कयल समर्पण