शनिवार, 28 नवंबर 2020

ललितेश झा - मैथिली सिनेमाक पहिल सुपर स्टार

मैथिली के अखन धरिक सबसं सुपरहीट फिल्म "ससता जिनगी महग सेनुर" के सुपरस्टार हीरो ललितेश झा जी (कृष्णा भैया) के जन्म 29 दिसम्बर 1960 के भेल छनि। ललितेश जी के ज्यों मैथिली फिल्मक पहिल स्टार ( Lalitesh Jha ) कहल जाय त अहिमे कोनो हर्ज नै। ललितेश जी एहन कलाकार छैथ जे हिन्दी, अंग्रेजी, मैथिली, भोजपुरी, मराठी, गुजराती फिल्म आ धारावाहिक मे खूब काज केने छैथ। 

ललितेश जी एखन धरि पांचटा हिन्दी फ़िल्म में सेहो नीक अभिनय केने छैथ। ललितेश जी द्वारा अभिनित किछु फ़िल्मक नाम अछि - 'योगेश', 'गणेशा माय फ़्रेन्ड', 'शबनम मौसी', 'बन्धु बॉक्सर',  'इन्साफ़ द जस्टिस', 'सरगना' 'दिल साला सनकी' आदि। ललितेश जी  एकटा अंग्रेजी फिल्म 'Where the Truth Lies' में सेहो काज केने छैथ।

मैथिली आ हिन्दी फ़िल्म आ धारावाहिक के अलाबा, ललितेश जी भोजपुरी फ़िल्म उद्योग में सेहो अपन एकटा पहचान बनेने छैथ। हुनकर भोजपुरी के किछु फिल्म के नाम अछि  "लागल चुनरी में दाग", "नाग देवता", "हे तुलसी मैया", "नैहर की चुनरी", "हमार घर हमार संसार", "आम्गन की लक्ष्मी", "माय्या आबाद रखिया सेनुरवा के", "गंगा ज्वाला", "गंगा तोहरे कारण", "दुल्हिनिया लेके जायब हम", "दुल्हन बानी मोर बहिनिया", "लाल चुनरिया बाली",  "होके तु रहबू हमार" आदि।


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ललितेश जी एखन धरि एकटा मराठी फ़िल्म "नाग देवता" में सेहो अभिनय केने छैथ। ललितेश जीक किछ रास गुजराती फिल्म में सेहो अभिनय केने छैथ जाहिमें "मारी जायनु मामेरु", "चुनरीनी लाज", "मारा देश नी धरती" आ "समाज ना छोड़ू" महत्वपूर्ण नाम अछि। 

ललितेश जी रजनीगंधा पान मसाला, रिजर्व बैंक  ऑफ़ ईंडिया आ किचन किंगक के विज्ञापन सेहो केने छैथ।
ललितेश जी किछ टीवी धारावाहिक में काज केलैथ जे चर्चित रहल जेना "मंजिल के रास्ते", "इनतकाम",  बेटी है वरदान", "जाल", "त्याग", "सुहाग", "सुख दुख", "सिंघासन", "एक और कुरुक्षेत्र",  "बसेरा", "अपनापन", "अपने अपने सुरजमुखी",  "खोज", "इन्साफ़", "कहीं दिया जले कहीं जिया", "सबका मालिक एक है", "अर्धांगिनी", "आहट", "तितलियां", "ओ डार्लिंग ये है इंडिया", "घर पहुंचा द देबी मैया", "थोड़ी सी जमीन थोड़ा आसमान" आदि प्रमुख अछि।

गुरुवार, 19 नवंबर 2020

लउका जे लउकइ रामा बिजुरी जे छिटकइ - बटगबनी गीत

लउका जे लउकइ रामा बिजुरी जे छिटकइ
कौने वन कुहुकय मयूर यो
घर पछुअरबा मे हजमा रे भइया,
झट-झट चिठिया पहुँचायब यो
जाहि ठाम देखिह नउआ ससुर भैंसुरबा,
ताहि ठाम चिठिया छपायब यो
जाहि ठाम हेतइ नउआ एसगर बलमुआं,
ताहि ठाम चिठिया खसायब यो
चिठिया पढ़इते बालमु जियरा सुखाय गेल,
कते धनी लिखल वियोग यो
लीअ-लीअ आहे राजा अपनो नोकरिया,
हम जाइ छी धनी के उदेश यो
जब पियबा अयलइ दलान केर बिचबा,
धनी बैसल रोदना पसारि यो
जब पियबा अयलइ आंगन केर बिचबा,
धनी ठोकल बज्र केबार यो
खोलू-खोलू आहे धनी बज्र केबरिया,
हम अयलहुँ अहीं केर उदेस यो
हम नहि खोलबइ बालमु बज्र केबरिया,
अंचरे सूतल नन्दलाल यो
हमहुँ त छलहुँ धनी देश विदेशिया,
ककर जनम नन्दलाल यो
घरहि मे छैक बालम छोटका देओरबा
हुनके जन्मल नन्दलाल यो

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बुधवार, 18 नवंबर 2020

मिथिलाक मुंगेर मे मां सीता केने छलथि पहिल छठि व्रत

मुंगेर : लोक आस्थाक महापर्व छैठ के मिथिलाक मुंगेर मे विशेष महत्व अछि। छैठ के ल'के चारिटा लोक कथा प्रचलित अछि। ओहिमे सं एकटा कथा के अनुसार छैठ के शुरुआत मुंगेर ( Munger District ) सं भेल छल। आनंद रामायण के अनुसार मुंगेर जिला के बबुआ घाट सं 2 किलोमीटर पर गंगा के बीच मे पर्वत पर ऋषि मुद्गल के आश्रम मे मां सीता छैठ केने छलथि जतय मां छैठ केने छलथि ओ स्थान वर्तमान मे सीता चरण मंदिर ( Sita Charan Mandir ) के नाम सं जानल जाइत अछि।  तहने सं मिथिला सहित पूरा देश मे छठी मनायल जाय लागल।

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आनंद रामायण मे अछि एकर वर्णन
आनंद रामायण के पृष्ठ संख्या 33 सं 36 धरि सीता चरण और मुंगेर के बारे मे उल्लेख कैल गेल अछि। आनंद रामायण के अनुसार राम द्वारा रावण के वध कैल गेल छल। चूकि रावण एकटा ब्राह्मण छलथि, ताहिलेल राम के ब्रह्म हत्या के पाप लागल छलनी। अहि ब्रह्म हत्या के पापमुक्ति लेल आयोध्या के कुलगुरु मुनि वशिष्ठ जी तत्कालीन मुगदलपुर (मुंगेर के पूर्व के नाम) मे ऋषि मुग्दल के ल'ग राम सीता के भेजलनी। भगवन राम के ऋषि मुद्गल वर्तमान कष्टहरणी घाट मे ब्रह्महत्या मुक्ति यज्ञ करौलनी और माता सीता के अपन आश्रमे म रहबाक आदेश देलथि। चूकि महिला यज्ञ मे भाग नै ल सकैत छलथि, ताहिलेल माता सीता ऋषि मुद्गल के आश्रम मे रही के हुनके निर्देश पर सूर्योपासना के पांच दिन धरि चलय बला षष्ठी व्रत छठि केलनि। सूर्य उपासना के दौरान मां सीता अस्ताचलगामी सूर्य के पश्चिम दिशा के दिश आ उदयाचलगामी सूर्य के पूब दिश अ‌र्घ्य देने छलथि। आयो मंदिर के गर्भ गृह मे पश्चिम और पूब दिशन माता सीता के पैर के छाप मौजूद अछि। अहिके अलावा सूप, डाला और लोटा के निशान शीला पट पर आयो नजैर आबय अछि।

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● सूर्य उपासनाक महा पर्व छैठ पूजा कथा आ व्रत विधि

मंदिर के गर्भ गृह साल के 6 महीना गंगा के गर्भ मे समायल रहैत अछि आ गंगा के जलस्तर घटला पर 6 महीना ऊपर रहैत अछि। एहन मान्यता अछि जे मंदिर के प्रांगण मे छठ केला सं लोगक मनोकामना पूर्ण होइत अछि।

शनिवार, 14 नवंबर 2020

हजमा मांगै छै रुपैया गे लिरिक्स - Hajma Mangai Chhai Rupaya Ge Lyrics

हजमा मांगै छै रुपैया गे हे गे दैय्या गे दैय्या
हजमा मांगै छै रुपैया गे हे गे दैय्या गे दैय्या

हजमा मांगै छै मामी गे, कोना देबय गे दैय्या
हजमा मांगै छै मामी गे, कोना देबय गे दैय्या
मामी बिनु मामा रहतो कोना, हे गे दैय्या गे दैय्या...

हजमा मांगै छै नानी गे, कोना देबय गे दैय्या
हजमा मांगै छै नानी गे, कोना देबय गे दैय्या
नानी बिनु नाना रहतो कोना, हे गे दैय्या गे दैय्या...

हजमा मांगै छै मौसी गे, कोना देबय गे दैय्या
हजमा मांगै छै मौसी गे, कोना देबय गे दैय्या
मौसी बिनु मौसा रहतो कोना, हे गे दैय्या गे दैय्या...

गुरुवार, 12 नवंबर 2020

नान्हि नान्हि टा फूल - वैद्यनाथ मिश्र 'यात्री'

नान्हि नान्हि टा फूल
उज्जर उज्जर फूल
लाल लाल डंटीवला फूल
सिङरहारक फूल
आसिनक निशाशेष
नबकी पोखरिक दुबिआही भीड़
भए रहल धन्य फूलक पथारसँऽ
कए रहल गम गम गम
बायुमंडल चारू दिशुका
इएह थीक परिजात?
इएह थीक हरसिङार?
रोपि गेल छथि एक्के पाँतो मेँ
सात टा सिङरहारक गाछ
अपन इष्ट देवताक प्रीत्यर्थ
कोनो पुण्यवान् व्यक्ति
के रहथि आ महानुभाव?
की छल हेतइन हुनक नाम?
हृदयानन्द प्रतिहस्त!
तृप्तिनारायण मल्लिक!
प्राणमोहन पाठक!
शुभंकर लाभ!
की छल हेतइन हुनक नाम?
माए अथवा मातामहीक खुनवाओल

हेतइन ई नबकी पोखरि
किंवा मोसम्मात सासुक खुनबाओल होइन
से बेश .... से बश.....
ककरो खुनवाओल हाउक ई पोखरि
किच्छु रहल होइन हुनक नाम!
जे लगा लेग छथि एक्के पाँतीमेँ
???? टा सिङारहारक ई नबगुछली
हुनकहिं नामेँ बीछब हम दू आँजुर फूल
नान्हि नान्हि टा फूल
लाल लाल डंटीवला फूल

केबार लागल धनी सोचथि, माय बाप सुमिरथि रे लिरिक्स - मैथिली सोहर गीत

केबार लागल धनी सोचथि, 
माय बाप सुमिरथि रे
ललना रे, उठल पंजरबा मे तीर, 
कि केकरा जगायब रे

सासु जे सुतल भानस घर, 
ननदो कोबर घर रे
ललना रे, मोरो पिया सूतल दरबज्जा, 
कि ककरा जगायब रे

अही अवसर पिया पबितहुँ, 
झुलफी झुलबितहुँ रे
ललना रे, भइया जी सँ मारि खुअबितहुँ, 
वेदन वेयाकुल रे

होइत भिनसर पह फाटल, 
हारिला जनम लेल रे
ललना रे, गाबय सब सोहर गीत, 
कि ननदो बधैया मांगय रे

बुधवार, 11 नवंबर 2020

तिलकोर के तरुआ - Tilkor Taruaa

सामग्री

8 तिलकोर के पत्ता

1 बड़का चम्मच अरवा चाउर (पीसल)

1 छोट चम्मच हरैद

1 छोटकी चम्मच लालका मिरचाइ बुकनी

1 बड़का चम्मच नून (स्वादनुसार )

2 बड़का चम्मच तेल

विधि:-

सबसं पहिले तिलकोरक पत्ता के निक चँका धोइ लिअ । चाउर के 1 घण्टा लेल पैइन मे फूलय (भिगो के) लेल राइख दियौ फेर ओकरा पीस लिअ। एक दिस चूल्हा पर कढ़ाही राखी क ओहिमे 2 बड़का चम्मच तेल द क गरम क लिअ। आब पीसल गेल चावल मे हरैद, नून, लाल मिर्च बुकनी, द दियौ और घोल तैयार क लिया आब तिलकोर के पत्ता क घोल मे नीक सं लपेट क गर्म तेल मे द दियौ। एकरा दुनु दिस सं तरु जहन दुनु दिस लाल भ जाय त निकाइल लिअ। आब अहाँ तिलकोर के तरुआ तैयार अछि। आब एकरा डाइल भात संगे इसे परैस सकै छि ।

 

शनिवार, 7 नवंबर 2020

देखहुँ हो शिवशंकर योगी लिरिक्स - Dekhahu Ho Shivshankar Yogi Lyrics

देखहुँ हो शिवशंकर योगी, अति विचित्र विरागी
अंग भस्म सिर गंग सम्हारे, भाल चन्द्र विराजी

बूढ़ बरद पर करथि सवारी, भाङ-घथूर अहारी
कटि कोपीन पहिरि हर घूमथि, उपर बघम्बर धारी

अर्धअंग श्री गौरी राजे, देखितहिं मन भ्रमकारी
कार्तिक-गणपति दुइ जन बालक, तिनकहुँ गतिअति न्यारी

मोर-मूस चढ़ि ईहो दुहु घूमथि, घरके सुरति बिसारी
कहथि महारूद्र, भजहुँ एहि शिवकेँ, इहो छथि त्रिभुवन हितकारी

सोमवार, 2 नवंबर 2020

Ganpatganj Temple, Shri Vishnupad Mandir | विष्णुपद मंदिर गणपतगंज : स्थापत्य कलाक अदभुत स्वरूप

सुपौल जिला अंतर्गत गणपतगंज स्थित इ मंदिर ( Shri Vishnupad Temple, Ganpatganj, Supaul ) लोगक आस्था के केंद्र बनी चुकल अछि। इ विष्णु धाम मंदिर चेन्नई के विख्यात विष्णु मंदिरों के तर्ज पर बनायल गेल अछि। दक्षिण भारतीय शैली मे निर्मित इ मंदिर मिथिला के प्रसिद्ध मंदिर मे सं एक अछि। मंदिर के स्थापत्यकला और वास्तुकला अहिके औरो दर्शनीय बनाबैत अछि। 
करीब 14 एकड़ भूमि मे बन विष्णुधाम के नाम सं प्रसिद्ध वरदराज पेरूमल देवस्थानम् विष्णुपद मंदिर दक्षिण भारत के कांचीपुरम् स्थित विष्णु मंदिर के तर्ज पर बनल अछि। जाहिके निर्माण करोडोंक लागत सं सुपौल के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ पीके मलिक करौने छलथि। 
अहि भव्य विष्णु मंदिर के नींव वर्ष 2004 मे राखल गेल छल। करीब 10 वर्षक निर्माण के उपरांत वर्ष 2014 मे मंदिर बनि के तैयार भ गेल। 

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मंदिर के गर्भगृह मे भगवान विष्णु केर संग-संग आन देवी-देवता के सेहो मूर्ति स्थापित अछि जिनक पुजा वैष्णव आचार्य करैत अछि। इ भव्य आ आकर्षक मंदिर अहि क्षेत्र मे आस्था और पर्यटन के प्रमुख केन्द्र अछि जतए दुर-दुर सं लोग दर्शन लेल आबय छथि।

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