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मिथिला धरोहर | मैथिली पंचांग 2026-27, मैथिली लोकगीत लिरिक्स...

मिथिला धरोहर — मैथिली लोकगीत लिरिक्स, विवाह गीत, मैथिली भगवती गीत लिरिक्स, मैथिली शिव भजन लिरिक्स, भजन, छठ, होली, मधुश्रावणी गीत लिरिक्स। मैथिली पंचांग, विवाह, उपनयन मुहूर्त, मिथिला के मंदिर, लोकदेवता, साहित्यकार परिचय, कथा-कहानी, गोनू झा के कहानी एवं मिथिला संस्कृति से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी।

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7 अप्रैल 2023

मैथिली छौमास गीत लिरिक्स | Chhaumasa Geet Lyrics Maithili

Maithili Chhamasa Song Lyrics - छमासा गीत लिरिक्स मैथिली में

● चलू सखि हे सहेलिया Lyrics

चलू सखि हे सहेलिया, बिषम लागे
आइ अषाढ़ मास हे सखिया, 
चहु दिस बुन्द बरसे दिन रतिया
विषम लागे

साओन के दुखदाओन रतिया, 
कुबजी हरकनि हुनको मतिया
विषम लागे

भादव के निशि राति अन्हरिया, 
सपनो मे देखल हुनकर सुरतिया
विषम लागे

आसिन आस लगाओल सखिया, 
नहि आयल पिया निरमोहिया
विषम लागे

कातिक कंत उरन्त भेल सखिया, 
सिन्दूर-काजर ने शोभय सुरतिया
विषम लागे

अगहन अग्र सोहावन सखिया, 
सारिल धान कटायब कहिया
विषम लागे



● पूस हे सखि पड़ि गेल फुहार Lyrics

पूस हे सखि पड़ि गेल फुहार, 
भीजि गेल आँचर चीर यो
सगरि रैनि हम बैसि गमाओल, 
होयत कखन भोर यो

माघ हे सखि जाड़ लगै छै, 
पिया बिनु जाड़ो ने जाय हो
एहि अवसर मे पिया के पबितहुँ, 
सतितहुँ हृदय लगाय यो

फागुन हे सखि फगुआ लगै छै, 
उड़त अबीर गुलाल यो
रंग अतर घोरि कऽ ढ़ारितहुँ, 
जँ गृह रहितथि नन्दलाल यो

चैत हे सखि फूलल बेली, 
भ्रमर लेल निज बास यो
सब सखि पहिरय पीअर पीताम्बर, 
हम धनी गुदरी पुरान यो

बैसाख हे सखि उखम ज्वाला, 
घामे भीजय शरीर यो
एहि अवसर मे पिया के पबितौं, 
अँचरे सऽ बेनियां डोलाय यो

जेठ हे सखि बाँस कटबितौं,
रचि-रचि बंगला छराय यो
ओहि बंगला मे दुनू मिलि सुतितौं, 
पुरति छबो मास यो



● प्रथम तोहर सुनिय सोहर Lyrics

प्रथम तोहर सुनिय सोहर, 
सुखक मास अखाढ़ यो
बारी वयस प्रीतम विदेश, 
हमर कोन अपराध यो

साओन हे सखि सर्व सोहाओन, 
फूलल बेली चमेलि यो
ताहि फुल देखि भमरा लुबधल, 
करय मधुर झंकार यो

भादव हे सखि रैनि भयाओन, 
दोसर राति अन्हार यो
लौका जे लौकै, बिजुरि चमकै, 
ककरा असरा हेबै ठाढ़ यो

आसिन हे सखि आस लागल, 
आसो नू पूरल हमार यो
आसो जे पुरितै, कुबरी सौतिनियां 
मोर कन्त राखल लोभाय यो

कातिक हे सखि पर्व लगै छै, 
सब सखि गंगा स्नान यो
सब सखि पहिरय पीअर पीताम्बर, 
हमरो दैव दुख देल यो

अगहन हे सखि सारिल लिबि गेल, 
लीबि गेल सब रंग सीस यो
ताहि सारिल देखि चिड़ै लुबुधल, 
सैह देखि हिय मोर साल यो



● आएल अखाढ़ इहो सुख भेल Lyrics

आएल अखाढ़ इहो सुख भेल
अमुआँ सऽ जमुआँ कटहर पाकि गेल, 
मोहन नहि मिलिहैं
हो भगवान, केहन बेकल भेल प्राण, 
मोहन नहि मिलिहैं

साओन बेली फुलय भकरार
देखि देखि नयना बहय जलधार, 
मोहन नहि मिलिहैं
हो भगवान, केहन बेकल भेल प्राण, 
मोहन नहि मिलिहैं

भादव के निसि राति अन्हार
पिया बिनु धर्म नहि बांचत हमार, 
मोहन नहि मिलिहैं
हो भगवान, केहन बेकल भेल प्राण, 
मोहन नहि मिलिहैं

आसिन मन में छल बिसवास
औता गोकुल सऽ पूरत अभिलास, 
मोहन नहि मिलिहैं
हो भगवान, केहन बेकल भेल प्राण, 
मोहन नहि मिलिहैं

कातिक पिया भेल कठोर
पछिला प्रीत बिसरि देल मोर, 
मोहन नहि मिलिहैं
हो भगवान, केहन बेकल भेल प्राण, 
मोहन नहि मिलिहैं

अगहन सारिल लिबि गेल धान
सबहक श्याम बसै छथि धाम, 
मोहन नहि मिलिहैं
हो भगवान, केहन बेकल भेल प्राण, 
मोहन नहि मिलिहैं



● चैत आहो रामा चित भेल चंचल Lyrics

चैत आहो रामा चित भेल चंचल
बितल मास बैसाख यो

रगड़ि चन्दन अंग लेपितहुँ
रहितहुँ प्रभुजी के साथ यो
जेठ पहु नहि हेठ अयला
करब कओन उपाय यो

कोन गुण ओझरयला प्रभु जी
के कहत निज बात यो
अखाढ़ आहो रामा बुन्द बरिसय
सभ सखि सांठल धान यो

साओन सिन्दुर काजर शोभय
भादब राति अन्हार यो
कोन गुण ओझरयला प्रभु जी
करब कओन उपाय यो



● प्रथम तोहर सुनिय सोहर Lyrics

प्रथम तोहर सुनिय सोहर, 
प्रथम मास अखाढ़ यो
हमरो बालम ओतहि गमाओल, 
कोना खेपब छबो मास यो

साओन आहो रामा सर्व सोहाओन, 
फूलल बेलि-चमेलि यो
ओहि फूल देखि भमरा लुबुधल, 
करय मधुर संग खेलि यो

भादव आहो रामा रैनि भयाओन, 
दोसर राति अन्हार यो
ओहि जल बिच दादुर कुहुके, 
कुहुकि-कुहुकि हिया साल यो

आसिन आहो रामा आस लगाओल, 
आसो ने पुरल हमार यो
आसो जे पुरलै, कुबजी सौतिनियाँ, 
मोर कंत राखल लोभाय यो

कातिक आहो रामा कन्त उरन्त भेल, 
प्रेमनाथ बताह यो
ककरा संगे हम कातिक खेपब, 
के कहत निज बात यो

अगहन आहो रामा, सारिल लुबुधि गेल, 
लबि गेलै सब रंग धान यो
चिड़ै-चिनमुन सब सुखहिं खेपहिं, 
हम धनि विरह बताहि यो



● हो भगवान, कोन कसुर Lyrics

हो भगवान, कोन कसुर विधना भेल बाम
मोहन तेजि गेला

अखाढ़हि मास इहो दुख भेल
आमुन - जामुन - कटहर पाकि गेल
कहब दुख ककरा

साओन बेलि फुलय कचनार
ककरा लय गांथब सुन्दर हार
ककरा पहिरायब

भादव रैनि भयाओन राति
ककरा शरण धय होयब ठाढ़
कि झहरय नीर

आसिन मास छल बिसबास
अओताह यदुपति पूरत आस
कहब दुख हुनके

कार्तिक कन्त गेलाह बिदेस
हमहुँ मरब जहर - बिख खाय
जमुना-जल धसि कय

अगहन खेते-खेते उपजल धान
रहितथि अवधपति, लबितथि धान
कि करितहुँ मे खीरे
करितौं लबान, बिनुपिया अगहन बिषम समान
कि झहरय नीरे


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