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18 नव॰ 2020

मिथिलाक मुंगेर मे मां सीता केने छलथि पहिल छठि व्रत

मुंगेर : लोक आस्थाक महापर्व छैठ के मिथिलाक मुंगेर मे विशेष महत्व अछि। छैठ के ल'के चारिटा लोक कथा प्रचलित अछि। ओहिमे सं एकटा कथा के अनुसार छैठ के शुरुआत मुंगेर ( Munger District ) सं भेल छल। आनंद रामायण के अनुसार मुंगेर जिला के बबुआ घाट सं 2 किलोमीटर पर गंगा के बीच मे पर्वत पर ऋषि मुद्गल के आश्रम मे मां सीता छैठ केने छलथि जतय मां छैठ केने छलथि ओ स्थान वर्तमान मे सीता चरण मंदिर ( Sita Charan Mandir ) के नाम सं जानल जाइत अछि।  तहने सं मिथिला सहित पूरा देश मे छठी मनायल जाय लागल।

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आनंद रामायण मे अछि एकर वर्णन
आनंद रामायण के पृष्ठ संख्या 33 सं 36 धरि सीता चरण और मुंगेर के बारे मे उल्लेख कैल गेल अछि। आनंद रामायण के अनुसार राम द्वारा रावण के वध कैल गेल छल। चूकि रावण एकटा ब्राह्मण छलथि, ताहिलेल राम के ब्रह्म हत्या के पाप लागल छलनी। अहि ब्रह्म हत्या के पापमुक्ति लेल आयोध्या के कुलगुरु मुनि वशिष्ठ जी तत्कालीन मुगदलपुर (मुंगेर के पूर्व के नाम) मे ऋषि मुग्दल के ल'ग राम सीता के भेजलनी। भगवन राम के ऋषि मुद्गल वर्तमान कष्टहरणी घाट मे ब्रह्महत्या मुक्ति यज्ञ करौलनी और माता सीता के अपन आश्रमे म रहबाक आदेश देलथि। चूकि महिला यज्ञ मे भाग नै ल सकैत छलथि, ताहिलेल माता सीता ऋषि मुद्गल के आश्रम मे रही के हुनके निर्देश पर सूर्योपासना के पांच दिन धरि चलय बला षष्ठी व्रत छठि केलनि। सूर्य उपासना के दौरान मां सीता अस्ताचलगामी सूर्य के पश्चिम दिशा के दिश आ उदयाचलगामी सूर्य के पूब दिश अ‌र्घ्य देने छलथि। आयो मंदिर के गर्भ गृह मे पश्चिम और पूब दिशन माता सीता के पैर के छाप मौजूद अछि। अहिके अलावा सूप, डाला और लोटा के निशान शीला पट पर आयो नजैर आबय अछि।

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● सूर्य उपासनाक महा पर्व छैठ पूजा कथा आ व्रत विधि

मंदिर के गर्भ गृह साल के 6 महीना गंगा के गर्भ मे समायल रहैत अछि आ गंगा के जलस्तर घटला पर 6 महीना ऊपर रहैत अछि। एहन मान्यता अछि जे मंदिर के प्रांगण मे छठ केला सं लोगक मनोकामना पूर्ण होइत अछि।

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