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मिथिला धरोहर | मैथिली पंचांग 2026-27, मैथिली लोकगीत लिरिक्स...

मिथिला धरोहर — मैथिली लोकगीत लिरिक्स, विवाह गीत, मैथिली भगवती गीत लिरिक्स, मैथिली शिव भजन लिरिक्स, भजन, छठ, होली, मधुश्रावणी गीत लिरिक्स। मैथिली पंचांग, विवाह, उपनयन मुहूर्त, मिथिला के मंदिर, लोकदेवता, साहित्यकार परिचय, कथा-कहानी, गोनू झा के कहानी एवं मिथिला संस्कृति से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी।

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18 जून 2026

Batgawani Geet

साओन मास नागपञ्चमी भेल - विषहरी गीत

मिथिला धरोहर
Saon maas nagpanchami bhel

साओन मास नागपञ्चमी भेल ।
बिसहरि गहवर सोहावन भेल ।

केओ नीपे गहवर केओ चौपारि ।
हमही अभागिन निपी दुआरि ।

केओ लोढ़े अदूल केओ वेलपत्र ।
हमहु अभागिन हरियर दूभि ।

केओ माँगे अनधन केओ माँगे पूत ।
हमहू अभागिन सिरक सिन्दुर ।

• Kathi ke chaukhandi mata kathi ke chaupaari
कथी के चौखण्डी माता कथी के चौपारि ।
कथी के ओठङनी बिसहरि खेले जुआ सारि ।
सोना के चौखण्डी मैया रूप चौपारि ।
तुलसी ओठङनी बिसहरि खेले जुआ सारि ।

27 नव॰ 2023

Batgawani Geet

लट छल खुजल बयस सजनी गे | विद्यापति, बटगवनी गीत

मिथिला धरोहर
रचनाकार - विद्यापति / बटगबनी गीत 

लट छल खुजल बयस सजनी गे
बैसल मांझ दुआरे
ताहि अवसर पहु आयल सजनी गे
देखल नयन पसारे
एक हाथ केस सम्हारल सजनी गे
अचरा दोसर हाथे
पहु के पलंग चढि बैसल सजनी गे
तखन करथि बलजोरे
नहिं-नहिं जओं हम भाखीय सजनी गे
तओं राखथि मन रोशे
भनहि विद्यापति गाओल सजनी गे पुरुषक यैह बढ़ दोषे।

4 अप्रैल 2023

Batgawani Geet

मैथिली बटगवनी गीत लिरिक्स | Batgabni Maithili Geet Lyrics

मिथिला धरोहर
बटगबनी मिथिलाक मधुर आ पारम्परिक मैथिली लोकगीत अछि। ई गीत सब में पति-पत्नी के बीच के प्रेम, विरह, आ प्रकृति के सुन्दर वर्णन के चित्रण रहैत अछि। ई गीत प्रायः नवविवाहिता दुल्हिन अपन पति के याद करैत जे दूर छथि, वा बसंत आ मानसून के मौसम खास के मधुश्रावणी पाबैन में गाबैत छथि।

पारम्परिक मैथिली बटगवनी गीत लिरिक्स


















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30 अग॰ 2021

Batgawani Geet

नव जौबन नव नागरि सजनी गे लिरिक्स - विद्यापति

मिथिला धरोहर
नव जौबन नव नागरि सजनी गे
नव तन नव अनुराग
पहु देखि मोरा मन बढ़ल सजनी गे
जेहेन गोपी चन्द्राल
बाधल वृद्ध पयोनित सजनी गे
कहि गेलाह जीवक आदि
कतेक दिन हेरब हुनक पथ सजनी गे
आब बैसलऊँ जी हारि
हम परलऊँ दुख-सागर सजनी गे
नागर हमर कठोर
जानि नहिं पड़ल एहेन सन सजनी गे
दग्ध करत जीब मोर
धरम जयनाथ गाओल सजनी गे
कियो जुनि करय प्रीति
धैरज धय रहु कलावति सजनी गे
आज करत पहु रीती

रचनाकार : विद्यापति / बटगवनी गीत



13 मार्च 2021

Batgawani Geet

कमल-कली कोना तेजल सजनी गे - बटगबनी गीत

मिथिला धरोहर
कमल-कली कोना तेजल सजनी गे
पहुन छथि देशक दूर सजनी गे

राखल पान सुबासल सजनी गे
अपनहि लेल पहु कोर सजनी गे

ठाढ़ि छलहुँ हम कदम तर सजनी गे
तरु दूसल मोर मूह सजनी गे

नयनक काजर स्याही भेल सजनी गे
अपनहि हाथ सऽ लिखब सजनी गे

चारू कात लीखब कुशल सजनी गे
बीचमे अपन वियोग सजनी गे

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