अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
Batgawani Geet लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Batgawani Geet लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
18 जून 2026
Batgawani Geet
• Saon maas nagpanchami bhel
साओन मास नागपञ्चमी भेल ।
बिसहरि गहवर सोहावन भेल ।
केओ नीपे गहवर केओ चौपारि ।
हमही अभागिन निपी दुआरि ।
केओ लोढ़े अदूल केओ वेलपत्र ।
हमहु अभागिन हरियर दूभि ।
केओ माँगे अनधन केओ माँगे पूत ।
हमहू अभागिन सिरक सिन्दुर ।
• Kathi ke chaukhandi mata kathi ke chaupaari
कथी के चौखण्डी माता कथी के चौपारि ।
कथी के ओठङनी बिसहरि खेले जुआ सारि ।
सोना के चौखण्डी मैया रूप चौपारि ।
तुलसी ओठङनी बिसहरि खेले जुआ सारि ।
27 नव॰ 2023
Batgawani Geet
रचनाकार - विद्यापति / बटगबनी गीत
लट छल खुजल बयस सजनी गे
बैसल मांझ दुआरे
ताहि अवसर पहु आयल सजनी गे
देखल नयन पसारे
एक हाथ केस सम्हारल सजनी गे
अचरा दोसर हाथे
पहु के पलंग चढि बैसल सजनी गे
तखन करथि बलजोरे
नहिं-नहिं जओं हम भाखीय सजनी गे
तओं राखथि मन रोशे
भनहि विद्यापति गाओल सजनी गे पुरुषक यैह बढ़ दोषे।
4 अप्रैल 2023
Batgawani Geet
● बटगबनी मिथिलाक मधुर आ पारम्परिक मैथिली लोकगीत अछि। ई गीत सब में पति-पत्नी के बीच के प्रेम, विरह, आ प्रकृति के सुन्दर वर्णन के चित्रण रहैत अछि। ई गीत प्रायः नवविवाहिता दुल्हिन अपन पति के याद करैत जे दूर छथि, वा बसंत आ मानसून के मौसम खास के मधुश्रावणी पाबैन में गाबैत छथि।
पारम्परिक मैथिली बटगवनी गीत लिरिक्स
इहो पढ़ब :-
30 अग॰ 2021
Batgawani Geet
नव जौबन नव नागरि सजनी गे
नव तन नव अनुराग
पहु देखि मोरा मन बढ़ल सजनी गे
जेहेन गोपी चन्द्राल
बाधल वृद्ध पयोनित सजनी गे
कहि गेलाह जीवक आदि
कतेक दिन हेरब हुनक पथ सजनी गे
आब बैसलऊँ जी हारि
हम परलऊँ दुख-सागर सजनी गे
नागर हमर कठोर
जानि नहिं पड़ल एहेन सन सजनी गे
दग्ध करत जीब मोर
धरम जयनाथ गाओल सजनी गे
कियो जुनि करय प्रीति
धैरज धय रहु कलावति सजनी गे
आज करत पहु रीती
रचनाकार : विद्यापति / बटगवनी गीत
13 मार्च 2021
Batgawani Geet
कमल-कली कोना तेजल सजनी गे
पहुन छथि देशक दूर सजनी गे
राखल पान सुबासल सजनी गे
अपनहि लेल पहु कोर सजनी गे
ठाढ़ि छलहुँ हम कदम तर सजनी गे
तरु दूसल मोर मूह सजनी गे
नयनक काजर स्याही भेल सजनी गे
अपनहि हाथ सऽ लिखब सजनी गे
चारू कात लीखब कुशल सजनी गे
बीचमे अपन वियोग सजनी गे