प्रथमहि गेल धनि प्रीतम पास सजनी गे
हिरदय अधिक भेल लाज सजनी गे
ठाढ़ि भेलि अंगो ने डोलय सजनी गे
मुरती सन मुखहु ने बोल सजनी गे
कर दुहु धाय पहु बैसाय सजनी गे
रूसि रहल धनि मदन जगाय सजनी गे
भनहि विद्यापति सब जन जानय
पुरुषक नहि किछु आस सजनी गे
© Copyright 2014 - 2027 Mithila Dharohar | मिथिला धरोहर All Right Reserved (सबटा अधिकार सुरक्षित अछि।)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
अपन रचनात्मक सुझाव निक या बेजाय जरुर लिखू !