शनिवार, 24 नवंबर 2018

नैना जोगिन काल के गीत - मैथिली नैना जोगिन लोकगीत - Naina Jogin Geet Lyrics

नैना जोगिन गीत मैथिली Lyrics

1. श्यामल सुरतिया पहुनमा

श्यामल सुरतिया पहुनमा
हे नैना जोगिनियाँ
कहमा सँ एलथि बर कुमार
हे नैना जोगिनियाँ
बांस केर बीयनि मंगथिन
हे नैना जोगिनियाँ
दुलहा चलथि पछुआय
हे नैना जोगिनियाँ
सासु सभ जोग करथिन
हे नैना जोगिनियाँ
दुलहा चलथु मुसुकाई
हे नैना जोगिनियाँ
अबधसँ एला इहो बर-सुन्दर
हे नैना जोगिनियाँ
बाबा दशरथ कौशल्या माय


2. हे नैना जोगिनियाँ - लिरिक्स

हे नैना जोगिनियाँ
कांच बांस काटि कऽ बंगाल घर छारि कऽ
ई लट झाड़ि कऽ ओ पट झाड़ि कऽ
एती-एतीराति पिा कतऽ सऽ आयल छी?
राहरिक खेत पोखरौना सऽ आयल छी
हाथमे टुनटुन, पयरमे काड़ा
कर दतमनियां नैना जोगिनियां
एके पटोर तर दुइ रे कुमारि
बाम छौ कनियां दहिन छौ सारि
हृदय विचारि कऽ उठा ले नारि
आलरि-झालरि कांधे कामरु माथे बीयनि
तेसर योगिनियां तोहें छोटकी सासु हे
आबे बाबू पड़ल योगिनियां के वश हे


3. रोही ले पनबट्टा बेटी, पानी भरऽ जाइ ले

रोही ले पनबट्टा बेटी, पानी भरऽ जाइ ले
बाट पर ठाढ़ बेटी, बंसिया बजाइ ले
तोरा के कहलौं बेटी, लाज ने भइ ले
भइले जुआन तऽ सम्हारि नै सकले
आलरि-झालरि कांधे कामरु माथे बीयनि
तेसर योगिनियां तोहें मझिली सासु हे
आबे बाबू पड़ल योगिनियां के वश हे


4. थिकहुँ बंगालिन, बसी बंगाला

थिकहुँ बंगालिन, बसी बंगाला
सुरपुरसँ अयलहुँ अछि
सुरपुर नदिया नाव बहाओल
अपनहि तरहथ दही जमाओल
कोठी कन्हा बरद घुमाओल
चुल्हाक पुत्ता सारी उपजाओल
आलरि-झालरि कांधे कामरु माथे बीयनि
पहिल योगिनियाँ तोहें अपन सासु हे
आबे बाबू पड़ल जोगिनियाँ के वश हे


5. यमुना तीर, कुंज वन, ततऽ कृष्ण बसै छथि

यमुना तीर, कुंज वन, ततऽ कृष्ण बसै छथि
गोप कन्या दधि मांगथि, चलि ने सकै छथि
ओहि ठाम बालक भाइ, चेहों-चेहों करै छथि
आलरि-झालरि कांधे कामरु माथे बीयनी
दोसर योगिनियां तोहें पितिया सासु हे
आबे बाबू पड़ल योगिनियां के वश हे

गुरुवार, 22 नवंबर 2018

राम भजन में मन रँगि गेलै लिरिक्स - am Bhajan Mein Man Rangi Gelai Lyrics

राम भजन में मन रँगि गेलै॥धु्रव॥

जनम-जनम के हियरा के काई।
एके लहरिया में बहि गेलै यार॥राम.॥

अब न सोहाबै ई जग के बजरिया।
मोरा लेखें सगरो उजरि गेलै यार॥राम.॥

पचरंग चोला सफल भेलै, अब मन।
राम मिलन लागि उमगि गेलै यार॥राम.॥

मोह-निसा में सूतल रहलौं।
अब मन हमरो जगि गेलै यार॥राम.॥

तीत विषय रस त्यागि ‘करीलवा’।
प्रभु-पद पंकज पगि गेलै यार॥राम.॥

बुधवार, 21 नवंबर 2018

लाले लाल सुन्दर वदनवाँ हो जय गौरी के ललनवाँ लिरिक्स - Lale Lal Sundar Badanwa Ho Lyrics

लाले लाल सुन्दर वदनवाँ हो, 
जय गौरी के ललनवाँ।

तीन नयन गजवदन मनोहर,
सोभे संग मूषिक वाहनबाँ हो॥जय.॥1॥

रिधि-सिधि निसिदिन चरनन चेरी,
नाम लेत काटे विघनवाँ हो॥जय.॥2॥

नाम के महिमा सबहिं जनाये,
होत जग प्रथम पूजनवाँ हो॥जय.॥3॥

माँगे ‘करील’ जोरि कर निसदिन,
बसैं हिय नन्द नन्दनवाँ हो॥जय.॥4॥

मंगलवार, 20 नवंबर 2018

राम नाम के नदी बहल जाय लिरिक्स - Ram Naam Ke Nadi Bahal Jaaye Lyrics

राम नाम के नदी बहल जाय, 
चाहे जो ले नहाय॥धु्रव॥

कलिजुग में भैया न कोनो उपाय।
राम नाम गाइ जीव भव तरि जाय॥चाहे जो.॥1॥

नदिया में नदी बहल गौर-निताय।
पापिहु तरि गेल जगाय मधाय॥चाहे जो.॥2॥

गिरि रे कैलाश एक जोगी सोहाय।
सेहो नित रामनाम जपि रहे भाय॥चाहे जो.॥3॥

जो एहि नदी में नहाय मन लाय।
सो जीव देखि जम दूरहिं पराय।चाहे जो.॥4॥

उमगि ‘करील’ प्रभु के गुन गाय।
जनम-जनम के जरनि जुड़ाय।चाहे जो.॥5॥


शुक्रवार, 16 नवंबर 2018

जाग मुसाफिर जाग-जाग तों जाग - मैथिली पुत्र प्रदीप

जागह-जागह जाग मुसाफिर जाग-जाग तों जाग। 
जागह भेलौ भोर मुसाफिर सुतले जौं रहि जेब। 
सोन सनक अवसर छुटि जैतो जीवन भरि पछितेब'।। 
सूर्योदय सँ पहिने जाग' चमकै लगतौ भाग।। 
जागह-जागह जाग मुसाफिर जाग-जाग तों जाग।

एहि दुनिया के जानि लैह तो पैघ मुसाफिर खाना,
जहिठाँ सँ ऐलह एहि जग मे तहिठाँ छैके जाना।
जतबा दिन लए ऐलह एहिठाँ शुभ कर्मों मे लाग।।
जागह-जागह जाग मुसाफिर जाग-जाग तों जाग।

चलबे थिक जीवन केर लक्षण, मरण थिक विश्राम।
कान खोलि क' सुनु सुकोमल पक्षी सब के गान।।
भोगक पाछाँ रोग रहै है, योगक सिद्धिताक ।। 
जागह-जागह जाग मुसाफिर जाग-जाग तों जाग।

कर्मक्षेत्र मे कर्मक पाछाँ रहिते है समृद्धि, 
शुभ कर्मों सँ होइत रहै है सबठाँ सब दिन वृद्धि 
तँ सकाल उठि नित्य कर्म मे जल्दी जल्दी लाग। 
जागह-जागह जाग मुसाफिर जाग-जाग तों जाग।

समय सलोना ससरि जेतै तँ जीवन भरि पछतेब' 
रोग शोक कँ छोड़ि तखन तों आर ने किछुओ पेब' ।। 
सबिता तोहर द्वारि पहुँचला देखह कते समीप, 
सूर्यदेव मे सविता मैया जहिना प्रखर 'प्रदीप' 
एहि अवसर सँ लाभ उठाब' कर' सेज के त्याग।। 
जागह-जागह जाग मुसाफिर जाग-जाग तों जाग।

रचनाकार: मैथिली पुत्र प्रदीप (प्रभुनारायण झा)

बाबा बैद्यनाथ कहाबी से सुनि शरण मे एलउ ना - मैथिली पुत्र प्रदीप (प्रभुनारायण झा)

बाबा बैद्यनाथ कहाबी से सुनि शरण मे एलउ ना।

बहुत भरोस लए के एलउ चरण मे, कनडेरियो हेरब ना। 
नहि तऽ माँ जगदम्बा के संगहि हम बसहा घेरब ना।

त्रिशुल बाघम्बर झारी, तेजि कए महल अंटारी बन मे एलउ ना।
बाबा, छोड़ल छप्पन भोग अहाँ नित भाँग चिलबेलउ ना। 

दुतियाक शोभए चन्ना सिर पर सुरसरि गंगा भक्तक कारण ना।
बाबा कयलहुँ ताण्डव नृत्य डमरु सँ वेद उच्चारण ना।

अहाँक चरण तेजि ककरा निहारी सहलहुँ बहुत प्रतारण ना।
बाबा दीन 'प्रदीपक' वेदन सुनियो हमर निवेदन ना।

रचनाकार: मैथिली पुत्र प्रदीप (प्रभुनारायण झा)

शनिवार, 10 नवंबर 2018

मिथिलाक किछ एहन दृश्य जे सायद किछ साल बाद नै देखायत !


विलुप्त होइत भार-दौरक परम्परा

विलुप्त होइत भार-दौरक परम्परा-




विलुप्त होइत कनियाँ पुतराक खेल

बांसक सुप्ति सँ बनल हुक्का लोली
(फोटो - अनिल झा)

विलुप्त होइत सिक्की-मौनी के कला



शुक्रवार, 9 नवंबर 2018

शीतक भीजल चान ई - sheetal Bhijal Chaan E

प्राची के अम्बर मे देखल,
शोभा सिन्धु समान ई। 
शीतक भीजल चान ई ॥
शीतक भीजल...

मोहक चद्दरि ओढ़ि इजोरिया,
सजा रहलि जनु स्नेह सेजरिया। 
नमित नयन हेमन्त बहुरिया,
हरए मृणालक प्राण ई ॥
शीतक भीजल...

गगनक फूल तरेगन चकमक,
गाँथल हार यथा करू झक-झक।
वस्त्र पहिरने उज्जर दप-दप,
ठिठुरल पूसक चान ई ॥
शीतक भीजल...

पश्चिम क्षितिजक ठोरक लाली, 
लागए नयन तरेरलि काली। 
आली कुमुदिनि लागि रहलि जनु, 
मुहक थुकरल पान ई॥
शीतक भीजल...

पछबा सिहकि पसारए माया,
काँपए वयस बिताओल काया। 
छाया ककर , ककर के जाया, 
लुब्धल लोभ ललाम ई॥
शीतक भीजल....

गीतकार: मैथिली पुत्र प्रदीप (प्रभुनारायण झा)

मंगलवार, 6 नवंबर 2018

सांझ पड़ीय गेल, चान उगिये गेल लिरिक्स

सांझ पड़ीय गेल, चान उगिये गेल
भय गेल दिन सन राति सखी हे
पाटक गेरूआ सिरमा दय सूतल
भय गेल गहुमन साँप सखि हे
एकहि नगर बसु माधव
मोर लेखे जोजन पचास सखि हे
सांझ पड़ीय गेल चान उगिये गेल
भय गेल दिन सन राति सखि हे

रविवार, 4 नवंबर 2018

Maithili Film Premak Basat : Review - मैथिली फिल्म "प्रेमक बसात" पर दर्शकीय प्रतिक्रियाक संग समीक्षा

Maithili Cinema Premak Basat film Review

प्रेम आदि काल सँ शाश्वत आ अनश्वर रहल अछि। प्रेमक बिनु आदर्श समाजक कल्पना नहिं कएल जा सकैत अछि। प्रेम एकटा सुखद अनुभूति थीक। सैद्धांतिक रूप सँ त' हमरा लोकनि ई सभटा मानि लै छी। प्रेमक आन सब स्वरूप हमरा लोकनि स्वीकारि लै छी। जखने प्रेमी प्रेमिकाक प्रेम सोझाँ आयल त' हम सभ नहिंं जानि किएक खलनायक बनि जाइ छी? प्रेम विवाहक चर्चा होइते मूँह टेढ़ होमय लगैत अछि। ई प्रेम विवाह यदि अन्तर्जातीय वा अन्तर्सामुदायिक भेल तखन त' समाज मे अगराही लागब निश्चिते मानू। एहन मे औनर किलिंग तक भ' जाइत अछि।एहन संकटक स्थिति मे रूपक शरर जीक "प्रेमक बसात" सिहकेबाक प्रयास सर्वथा प्रशंसनीय छनि। हम हुनक समस्त टीम केँ सैल्यूट करै छी।
दमगर कथा वस्तु, सरल संवाद, वास्तविक आ मजगूत अभिनय, सधल कलाकार, अत्याधुनिक तकनीकि,हृदयस्पर्शी गीत,कर्णप्रिय संगीत, नव आ सफल प्रयोगक अतिरिक्त श्रम आ साधनायुक्त निर्देशन सँ बनल ई फिल्म मैथिली फिल्मक लेल टर्निंग प्वाइंट साबित भ' सकैत अछि। अपन धमकक आभास करेबाक संगहि दर्शकक मोन पर छाप छोड़ैत अछि। एहि सभ सँ अतिरिक्त फिल्मक अन्तर्गत अन्तर्सामुदायिक प्रेम कथा आ ओहि प्रेमक परिणति, हिन्दू लड़काक विवाह मुस्लिम लड़की सँ होइत देखाओ गेल अछि। नायक आ नायिका केँ अपन प्रेमक आदर्श स्थापित करबाक क्रम मे जे संकटक सामना करय पड़लै, सैह सब एहि मे दर्शाओल गेल अछि।

इहो जरूर पढ़ब :- 

ई फिल्म प्रेम आ भाइचाराक संदेश दैत अछि। एकरा संगहि कतेको कुरीति पर चोट सेहो करैत अछि। विदेशक धरती पर रिलीज पहिल मैथिली फिल्म बनबाक सौभाग्य एकरा भेटल छै। ई सिनेमा समाज मे प्रेमपूर्ण वातावरण बनेबाक संग आदर्श समाज बनेबा मे सफल बुझि पड़ैत अछि।
एकटा नीक आ सफल फिल्मक जतेक मशाला होइत छैक करीब करीब सभटा मशाला एहि मे समाविष्ट करबाक सफल प्रयास भेल अछि। गैर मैथिल सँ मैथिली मे काज करयबा सन  चुनौतीपूर्ण काजक लेल एक बेर फेर पूरा टीमक प्रशंसा करहि पड़त। मैथिली मे पहिल सूफी गीत सुनबा मे सेहो आनंद आबि गेल। सिनेमाक सर्वाधिक सबल पक्ष अछि एकर गीत संगीत, जे फुल इन्टरटेनमेंट करैत अछि।

इहो पढ़ब:-

ओना एखन दुर्बल पक्ष पर गप करबाक बेर नहिंं छै किन्तु ईहो करब आवश्यक एहि लेल जे आगू और बेसी गुणवत्तापूर्ण सिनेमा बनबाक मार्ग प्रशस्त भ' सकय।
पहिल बात जे अपन भाषाक फिल्म मे आन भाषाक प्रयोग किछु बेसी बुझि पड़ल। दृश्यक मांगक अनुरूप ओकरा कम सँ कम कएल जा सकै छल। दोसर बात जे किछु पुरान आ नीक मैथिली भाषी कलाकार ईमोशनल दृश्य केँ और मार्मिक बना सकै छलथिन।

एखन एतबे, शेष स्वयं देखि क' बुझि जेबै। कुल मिला क' नजदीकी सिनेमाघर मे जा' प्रेमक बसात लगेबा मे कोनो हर्ज नहिंं छै। माँ मैथिलीक लाज रखबाक लेल ई सिनेमा जरूर देखियौ से आग्रह।
विद्यापति पर्व समीप अछि। मैथिलीक लेल बड काज होयत, ओही क्रम मे प्रेमक बसातकेँ सभ क्यो बबंडर मे बदलि दियौ ताकि निर्माता लोकनि मैथिली फिल्मक धर्रोहि लगेबाक नियार करथि आ सभ सिनेमाघरक आगू हाउस फुल वला बोर्ड लागि जाइ।

जल्दी देखू आ सपरिवार, दोस महीम सभक संग देखू। एक बेर देखब त' बेर बेर देखबाक मोन हेबे करत। बेसी सोचू नहिंं एखने बिदा भ' जाउ। एसगर नहिंं जाउ , सिनेमा देखबाक मजा संगसोर मे छै...

साभार - अखिलेश कुमार झा

सांझ भेल नहि अयला मुरारी लिरिक्स

सांझ भेल नहि अयला मुरारी
कहाँ अँटकल गिरधारी सखि हे
घर-घर फिरथि मातु जशोदा
सभसँ करथि पुछारी सखि हे
कारण कोन नाथ नहि अयला
इएह सोच उन भारी सखि हे
झुंड झुंड सखियन सभ अयली
कहथि जसोदा लग जाइ सखि हे
फोड़ि देलनि सिर मटुकी प्रभूजी
फोलि देलनि पट साड़ी सखि हे
कानैत-खीझैत मोहन अयला
कहथि मातु समुझाइ सखि हे
मुरली हम्मर छीनि लेलनि अछि
सभ सखियन मिलि सारी सखि हे