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मिथिला धरोहर | मैथिली पंचांग 2026-27, मैथिली लोकगीत लिरिक्स...

मिथिला धरोहर — मैथिली लोकगीत लिरिक्स, विवाह गीत, मैथिली भगवती गीत लिरिक्स, मैथिली शिव भजन लिरिक्स, भजन, छठ, होली, मधुश्रावणी गीत लिरिक्स। मैथिली पंचांग, विवाह, उपनयन मुहूर्त, मिथिला के मंदिर, लोकदेवता, साहित्यकार परिचय, कथा-कहानी, गोनू झा के कहानी एवं मिथिला संस्कृति से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी।

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15 अक्टू॰ 2015

प्रेयसी - वैद्यनाथ मिश्र यात्री

ठाढ़ी भेली आबि तों तैखन कहाँसँ
हे हमर हीरा, हमर मोती, हमर हे सोन !
चिन्तनाक अथाह जलमे लगौलक डुबकी
- जखन ई मोन !
उठाओल चिरकाल सँ निहुँड़ल अपन ई माथ
कान्हपर जैखन देलह तों हाथ !
हे हृदय ! हे प्राण !

तों ने रहितह संगमे
तँ क' ने सकितहुँ हिमगिरिक अभियान !
रोहिणिया आमक सुपक्क गोपी जकाँ तों
करै छह सदिकाल गमगम सजनि हमरा हेतु
सकै छथि क की हमर ओ राहु आ, की केतु
जाबत तोंहि केंद्रमे छह राति-दिन साकांक्ष ?
चिर वियोगक आगिमे
तोरा जखन हम ठेलि बनलहुँ
परिब्राजक एसगरे ओहि बेर सखी चुपचाप
कते सहने रह तों परिताप ?
बहुत दिन पर ज्ञान एतबा भेल जे हम
केहेन निष्ठुर केहेन निर्मम, केहेन पाषाण !
हे हृदय ! हे प्राण !
अपन इच्छापर तोहर आशाक कैलियहु होम
तों बनलि रहली सदै सखि मोम !
जखन तोरा लग एलहुँ फेर,
क्षमा कैलह हमर सब अपराध
कनियो ने लगौैलह देर !
बाजि उठली सुमुखि तों बिहँसैंत -
की करबैक लै एहिना एलैऐ ह्वैत !
एक आँखि कनैत अछि जग एक आँखि हँसैत !
‌कोनो कारणसँ कदाचित रहै अछि जँ स्त्री-पुरुष दुइ ठाम
बढ़ल जाइत छइ सिनेह, ने ह्वैत छैक विराम !
ह्वैत एलैऐ सदै संयोग आ, कि वियोग
हमहूँ लेलहूँ भोगि, ता' भोगबाक छल जे भोग !
एकसँ दू भेलहुँ प्रियतम,
आब मिली-जुलि क' सकब
हमरा लोकनि घरबाहरक कल्याण
आउ, स्वागत
हे हृदय ! हे प्राण !

जै दियौ गअ
अहाँ की करबैक लै
एहिना एलैऐ ह्वैत ...
बाजि उठली सुमुखि तौं बिहुँसैत !

आइयो तँ छी समुद्रक कातमे हम ठाढ़
(हम एम्हर छी तों ओम्हर छ बीचमे व्यवधान -
एक डेढ़ हजार कोसक !
की करौ स्थलयान वा जलयान ?
कते व्यक्ति बजैत छथि जे
एही युद्धक बाद खूब हेतैक सस्ता विमान !)
हे हृदय, हे प्राण !

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