Jakhan Janam Har Dhyalni Varad Tokaaral
जखन जनक हर धयलनि वरद टोकारल रे
ललना, महिसुर सुनि महिछेदन मंत्र उचारल रे
गगन मगन सुरवृन्द सुमन बरसाओल रे
विधि-हरि-हर सभ वेद सुमंगल गाओल रे
उठल सघन घनघोर गगन घहरायल रे
बिजुरी कड़क सुनि कान नयन चोन्हरायल रे
हरतर देखि नव ज्योति जनक झुकि ताकल रे
लतिकासिनेह के स्नेह नयन मन थाकल रे
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