कानल शिशु नवजात, श्रवण सुनि, जुड़ भेल हे।
ललना, कौशल्या के पुरल मनोरथ, राम जनम लेल रे ।।
दौड़ल नगरक नारि, नउनिया प्रथम गेल रे।
ललना, रानी देल गेल मणिहार, नउनिया बिहसि लेल रे।।
बचबा देखइते झुकि खसल, नउनिया बेहोश भेल रे ।
ललना, कोरबा उठाय मुँह देखि, कौशल्या से छीनि लेल रे।।
युग-युग जीबय एहो बालक, जगत आनन्द भेल रे।
ललना, लतिकासनेह गाबय सोहर, आनन्द मगन भेल रे।।
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