कविचूड़ामणि काशीकान्त मिश्र ‘मधुप’क जन्म हिनक मातृक दरभंगा जिलाक कोर्थू गाममे आश्विन शुक्ल पूर्णिमा (कोजगरा), मंगल दिन, 2 अक्टूबर 1987 कें भेल छलनि। हिनक पैतृक मधुबनी जिलाक कोइलख गाम छल। पिता कीर्तिनाथ मिश्र, उच्चकुलीन ब्राह्मण छलाह। मधुपजीक जन्म कीर्तिनाथ मिश्रक छठम पत्नी ‘भामादाइ’क कोखि सँ भेल रहनि।
हिनक बाल्यावस्था मातृकमे नाना लाल ठाकुरक देख-रेखमे बितलनि, जतय ई हिन्दी, गणित ओ मिथिलाक्षर सिखलनि। 1927 ई.मे हिरणीक नन्दकिशोर चौधरीक भगिनी चन्द्रमुखी देवीसँ हिनक विवाह भेलनि।
● शिक्षा ओ संघर्षमय जीवन
बारह बरखक उमेरमे ई पहिल बेर अपन पैतृक गाम कोइलख गेलाह। ओतए भद्रकाली पाठशालासँ 1923 मे व्याकरणक प्रथमा परीक्षा उत्तीर्ण भेलाह, जतय हिनका सुरेन्द्र झा 'सुमन' जीसँ भेंट भेलनि।
मध्यमाक अध्ययन हेतु ई लोहना संस्कृत विद्यापीठमे नामांकन करौलनि, मुदा पारिवारिक समस्या ओ अर्थाभावक कारण पढ़ाइ बाधित भऽ गेल। बादमे 1926 मे बैद्यनाथधामक बालानन्द ब्रह्मचारी आश्रमसँ मध्यमा परीक्षा उत्तीर्ण भेलाह।
1929 मे काशी प्रवासक काल हिनका कविवर सीताराम झा, यात्री जी, किरण जी आदि अग्रज लोकनिक सानिध्य भेटलनि, जे हिनक काव्य प्रतिभाक विकासमे सहायक भेल। 1936 ई.मे साहित्य ओ 1937 ई.मे व्याकरणसँ आचार्य केलनि। 1939 ई.मे वेदान्त शास्त्रीक पढ़ाई समाप्त कऽ ई सिमरा (मुजफ्फरपुर)क संस्कृत विद्यालयमे प्रधानाध्यापक बनलाह।
● साहित्यिक यात्रा ओ अध्यापन कार्य
1940 ई.मे ई अपन गामक समीप जयानन्द उच्च विद्यालय बहेड़ामे संस्कृतक अध्यापकक रूपमे नियुक्त भेलाह, जतय सैंतिस बरखक सेवाक बाद 1977 मे सेवा निवृत भेलाह। बहेड़ा स्कूलक वातावरणमे हिनक काव्य-प्रतिभाक अद्भुत विकास भेल।
प्रथम रचना: कांचीनाथ झा 'किरण' द्वारा संचालित हस्तलिखित पत्रिका 'मैथिली सुधाकर'मे सर्वप्रथम 'मधुप' उपनामसँ रचना प्रकाशित भेल।
छद्मनाम 'अलि': मैथिली भाषाक लोकप्रियता बढ़ेबाक हेतु ई 'अलि' छद्मनामसँ फिल्मी तर्ज पर गीत लिखलनि, जे 'पचमेर' संग्रहमे प्रकाशित भेल।
● प्रमुख पोथी ओ कृतित्व
कविचूड़ामणि मधुप जीक करीब तीस गोट प्रकाशित-अप्रकाशित पोथी छनि। हिनकर किछु अत्यंत लोकप्रिय रचना सभक सूची नीचाँ देल जा रहल अछि, जाहि पर क्लिक कऽ कऽ अहाँ ओहि रचनाक विस्तृत विवरण ओ काव्य-अंश पढ़ि सकैत छी:
राधाविरह (महाकाव्य): हिनकर ई कालजयी रचना थिकनि, जाहि पर हिनका 1970 मे साहित्य अकादमी पुरस्कार भेटल रहनि।
• मुक्त-मधुप (महाकाव्य): मधुप जीक काव्य-शक्तिक एकटा बेजोड़ उदाहरण।
• द्वादशी (कथा-काव्य): मैथिली जनजीवनक सुंदर चित्रण करैत बारह कथा-कविताक संग्रह।
• अपूर्व रसगुल्ला ओ टटका जिलेबी: मैथिली साहित्यमे हास्य-व्यंग्यक अद्भुत आ अत्यंत लोकप्रिय पोथी।
• विदागीत ओ अन्य गीत-संग्रह: मिथिलाक लोक-संस्कृति ओ विदाइक मर्मस्पर्शी गीत।
• पचमेर (फिल्मी तर्ज पर गीत): मैथिली भाषाक प्रचार-प्रसार लेल 'अलि' छद्मनाम सँ लिखल गेल लोकप्रिय गीतक संग्रह।
पुरस्कार ओ उपाधि
साहित्य अकादमी सम्मान: 1970 ई.मे हिनकर कालजयी रचना 'राधा-विरह' पर भेटलनि।
● मैथिली रचना (क्लिक कऽ पढ़ू)
कविचूड़ामणि: 1948-49 ई.क मैथिली महासभाक सहरसा अधिवेशनमे तत्कालीन राजपण्डित स्व. बलदेव मिश्र हिनका 'कविचूड़ामणि'क उपाधिसँ विभूषित कएने छलाह। हिनक काव्यक लोकप्रियता देखि हिनका लोक 'अभिनव विद्यापति' सेहो कहलनि।
● काव्यक विशेषता ओ निधन
मधुप जी विशुद्ध रूपेँ कवि छलाह। हिनका पद्य लिखब सर्वाधिक रूचैत छल आ ई पत्राचारो कवितेक माध्यमसँ करैत छलाह। हिनकर कविता सभमे संस्कृतनिष्ठ ओ ठेठ मैथिली शब्दाबलीक विलक्षण प्रयोग भेटैत अछि। मणिपद्म, अमर, किसुन आदि परवर्ती साहित्यकार हिनके प्रेरणासँ मैथिली रचना दिस प्रवृत्त भेलाह।
मिथिला ओ मैथिलीक एहि महान साधकक जीवन यात्रा २० दिसंबर 1987 ई. कें समाप्त भेल, जखन ओ अपन नश्वर शरीर त्याग स्वर्गलोक प्रस्थान केलनि।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
अपन रचनात्मक सुझाव निक या बेजाय जरुर लिखू !