शुक्रवार, 25 फ़रवरी 2022

पूजा के हेतु शंकर आयल छी हम पुजारी लिरिक्स - Puja Ke Hetu Shankar lyrics

Pooja Ke Hetu Shankar Lyrics by Kunj Bihari Mishra

पूजा के हेतु शंकर, आयल छी हम पुजारी, 
गाबइ छी हम नचारी
पूजा के हेतु शंकर, आयल छी हम पुजारी, 
गाबइ छी हम नचारी।

जानी ने मंत्र-जप-तप,  पूजा के विधि नै जानी - 2
तइयो हमर मनोरथ, पूरा करू हे दानी,
चुप भए किए बइसल छी, खोलू ने कने केबारी
आयल छी हम पुजारी।

बाबा अहाँके महिमा, बच्चे सँ हम जनइ छी - 2
दुख की कहब अहाँ के, सबटा अहाँ जनै छी,
दर्शन दिअऽ दिगम्बर, दर्शन केर हम भिखारी
आयल छी हम पुजारी

हे नाथ हम अनाथे, वर दय करू सनाथे - 2
मिनती करी नमेश्वर, कर जोड़ि दुनू हाथे,
डामरु कने बजाउ, गाबइ छी हम नचारी
आयल छी हम पुजारी।


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गुरुवार, 24 फ़रवरी 2022

दुल्लहि तोर कतय छथि माय - विद्यापति

दुल्लहि तोर कतय छथि माय,
कहुँन ओ आबथु एखन नहाय।।

वृथा बुझथु संसार-विलास,
पल-पल नाना भौतिक त्रास।

माए-बाप जजों सद्गति पाब,
सन्नति काँ अनुपम सुख आब।

विद्यापतिक आयु अवसान,
कार्तिक धबल त्रयोदसि जान।

रचनाकार - विद्यापति

रविवार, 20 फ़रवरी 2022

मिथिला चित्रकला के गोदना शैली के स्वर्णिम हस्ताक्षर शिवन पासवान

शिवम पासवान मिथिला पेंटिग के संगे-संग गोदना पेंटिग के माहिर कलाकार के रूप मे जान जाइत छथि। शिवन पासवान के जन्म 4 मार्च 1956 के मधुबनी जिलाक गांव लहेरियागंज के वार्ड नंबर एक मे भेलनि। 10वीं पास शिवन पासवान बच्चे सं पेंटिग बनाबय लगलाह। 

जितवारपुर के गोदना पेटिग के प्रसिद्ध कलाकार चानो देवी आ रौदी पासवान के छत्रछाया मे शिवन पासवान अहि कला मे आगू बढैत चली गेलाह। शिवन पासवान परंपरागत पूजा-पद्धति सं जुडल कथानक धरि सिमटल मिथिला पेंटिग के संगे-संग गोदना सं कला प्रेमि के आकर्षित करबा मे बहुते सफल रहलैथ।


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● मिथिलाक ऐतिहासिक स्थल : बाबा सुन्दर नाथ धाम, सुंदरी मठ 


राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपन विशिष्ट पहचान बनेनिहार शिवन पासवान के पेंटिग के क्षेत्र मे श्रेष्ठ शिल्पी के लेल वर्ष 1984 मे राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान कैल गेलनि। शिवम पासवान के वर्ष 1983 मे राज्य पुरस्कार प्रदान कैल गेलनि। कैनवास, स्पेसक संतुलन, सुंदर रेखांकन आ प्राकृतिक रंग के संयोजन हुनकर पेटिग के विशेषता रहल अछि।

शिवम पासवान द्वारा तैयार भेल पेंटिग दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई सहित देशक विभिन्न हिस्सा आ इटली, हांगकांग सहित विश्वक आन देश मे प्रदर्शित भ चुकल अछि। वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकारक प्रशिक्षण परियोजना के तहत शिवम पासवान मिथिला पेंटिग के प्रशिक्षक सेहो रही चुकल छथि। मिथिला चित्रकला आ गोदना पेंटिग के क्षेत्र मे उल्लेखनीय योगदान के लेल भारत सरकार, बिहार सरकार, चेतना समिति सहित दोसर संस्थान द्वारा हुनका सम्मानित कैल जा चुकल छनि। हस्तशिल्प के क्षेत्र मे शिवम पासवान कर्नाटक सरकार द्वारा सेहो सम्मानित कैल गेल छैथ।


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गुरुवार, 10 फ़रवरी 2022

मिथिला में राम खेलथि होली लिरिक्स - Mithila Mein Ram Khele Hori Lyrics

Mithila Me Ram Khelaith Holi Song Lyrics by Kunj Bihari Mishra

मिथिला में राम खेलथि होरी, मिथिला में,
मिथिला में राम खेलथि होरी, मिथिला में,
मिथिला में हो, मिथिला में हो,
मिथिला में हो, मिथिला में हो, मिथिला में,
मिथिला में राम खेलथि होरी, मिथिला में,

अबिर गुलाल कुमकुमा केशर,
अबिर गुलाल कुमकुमा केशर,
सखियन के शोभै नकवेशर,
सखियन के शोभै नकवेशर,
अबिर गुलाल कुमकुमा केशर,
सखियन के शोभै नकवेशर,
हाथ लेने अबिरक झोड़ी, रे लाला
हाथ लेने अबिरक झोड़ी, मिथिला में,
मिथिला में राम खेलथि होरी, मिथिला में,
मिथिला में राम खेलथि होरी, मिथिला में...

आजु जनकपुर रंग में सानल,
आजु जनकपुर रंग में सानल,
मैथिल हिय आनंद समायल,
मैथिल हिय आनंद समायल,
आजु जनकपुर रंग में सानल,
मैथिल हिय आनंद समायल,
सब धेने प्रेमक डोरी रे लाला,
सब धेने प्रेमक डोरी, मिथिला में,
मिथिला में राम खेलथि होरी, मिथिला में,
मिथिला में राम खेलथि होरी, मिथिला में...

सीता-रामक छवि अति प्यारी,
सीता-रामक छवि अति प्यारी,
नवल बसंतक महिमा न्यारी,
नवल बसंतक महिमा न्यारी,
सीता-रामक छवि अति प्यारी,
नवल बसंतक महिमा न्यारी,
युगल सरस मन के भोरी, रे लाला,
युगल सरस मन के भोरी, मिथिला में,
मिथिला में राम खेलथि होरी, मिथिला में,
मिथिला में राम खेलथि होरी, मिथिला में...

मिथिला में राम खेलथि होरी, मिथिला में,
मिथिला में राम खेलथि होरी, मिथिला में,
मिथिला में हो, मिथिला में हो,
मिथिला में हो, मिथिला में हो, मिथिला में,
मिथिला में राम खेलथि होरी, मिथिला में

बुधवार, 9 फ़रवरी 2022

मिथिलाक अजब-गजब तिलकोर गुण

तिलकोर मिथिलाक संस्कृति के पहचान अछि। तिलकोर एक प्रकारक बेल अछि जे अपन औषधीय गुण सं सेहो परिपूर्ण अछि आ एकर वनस्पति नाम मोमोरेडिका मोनाडेल्फा अछि।


अहि तिलकोरक पत्ता के ल मिथिला मे विशेष प्रकारक व्यंजन बनायल जाइत अछि जेकरा तिलकोरक तरुआ कहल जाइत अछि।


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● तिलकोरक तरुआ बनेबाक विधि


एकर फूल उज्जर होइत अछि आ एकर फल कुंदरु एहन होइत अछि जे पक्षिय के मनपसिंद भोजन अछि, खास क सुग्गा क।

तिलकोर पर लगातार शोध भ रहल अछि आ अहिमे औषधीय गुण के मौजूदगक पुष्टि सेहो विशेषज्ञ द्वारा कैल गेल अछि। विशेषज्ञ के माननाय अछि जे तिलकोरक पत्ता के सेवन सं रक्त शुद्ध होइत अछि।


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● दिगंबर जैन मंदिर - श्री वासुपूज्य दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र, भागलपुर


डायबिटिज'क मरीज के लेल इ सच मे औषधी के काज करैत अछि। 

कुनो भी पावैन होय या अथिति के आगमन मिथिला मे भोजनक थारि तिलकोरक तरुआक बिन अदहे मानल जायत। मिथिला मे तिलकोर के महत्वक अंदाजा अहि बात सं लगायल जा सकैत अछि जे मिथिला मे गायल जाय बला गीतक बोल अहि प्रकार अछि।


सखी हे आज तरब तिलकोर

जे पाहुन ( मेहमान) कहियो नही आयल 

से आयल घर मोर।

शुक्रवार, 4 फ़रवरी 2022

लिली रे : मैथिलीक प्रख्यात साहित्यकार - Writer Lily Ray

मैथिलीक प्रख्यात साहित्यकार (Maithili Litterateur Lily Ray ) लिली रे के जन्म 26 जनवरी, 1933 के मधुबनी जिलाक लालगंज मे भेल छलनी। हुनक पिता पं. भीमनाथ मिश्र ओहि समय के आईपीएस छलैथ। लिली रे के नयहर पूर्णिया जिलाक रामनगर मे छलनी। लिली रे अपन पढ़ाई घर मे रही के केलथी। लिली रे रंगमंच के कलाकार सेहो छलथी। 28 जनवरी, 1945 के हुनक बियाह कटिहार जिलाक कदवा प्रखंड के दुर्गागंज निवासी डॉ. हरेन्द्र नारायण राय सं भेलनि। ओ स्थायी रूप मे सिलीगुड़ी मे रहय छलखिन।

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लिली रे पहिले 20 वर्ष धरि कल्पना शरण नाम सं किताब लिखने छलथि जाहिमे ‘रंगीन पर्दा नामक  एकटा किताब सेहो अछि, जे ओहि समय बहुते चर्चित भेल छल। अहिके उपरांत ओ अपन असली नाम लिली रे नामे लिखनाय शुरू केलथि। 

लिली रे 'मरीचिका' नामक मैथिली उपन्यास के लेखन केलथि। जाहिलेल हुनका 1982 मे साहित्य अकादमी पुरस्कार सं पुरस्कृत कैल गेलनि। एकर अलावा 2004 मे लिली रे के प्रबोध साहित्य सम्मान सेहो देल गेलनि। लिली रे 250 कहानि आ पांचटा उपन्यास लिख चुकल छथिन। जाहिमे मरीचिका उपन्यास के संग पटाक्षेप धारावाहिक, उपसंहार, जिजीविषा, रंगीन परदा, अंतराल, रोगिणी और लाली गुरौंस के नाम प्रमुख अछि। नक्सल जीवन पर आधारित हुनक रचना ‘पटाक्षेप बहुते चर्चित भेल छल। लिली रे मैथिलीक एकटा प्रसिद्ध किताब के अंग्रेजी मे अनुवाद सेहो केने छलथि। 

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● सांझ गीत - मैथिली लोकगीत


मैथिलीक साहित्यकार लिली रे ( Lily Ray Writer ) के निधन 3 फरवरी 2022 के निधन भ गेलनि। हुनकर निधन के मैथिली साहित्य के लेल अपूरणीय क्षति अछि।

गुरुवार, 3 फ़रवरी 2022

रगड़ि-रगड़ि उबटन धिया सेवल लिरिक्स - Ragadi Ragadi Ubatan Dhiya Sewal Lyrics

समदाओन / चन्द्रमणि

रगड़ि-रगड़ि उबटन धिया सेवल
सेहो करेज लगाय
बाँहिक पलनहिं झुलना झुलाओल
सेहो धिया चलि जाय।

फूल फुलायल देखितो मलिनियाँ
दहो-बहो नोरे दहाय
कतेक मनोरथ मनहि जोआओल
सबटा संगहि संग जाय।

हिचुकि-हिचुकि धिया चुप नहि भए रह
आंगन कानथि माय
डोलिया उठाय आगू बढ़ल कहरिया
अहिना युगक युग जाय।

बुधवार, 2 फ़रवरी 2022

बाबाजी के बगियामे कुसुम फूल लिरिक्स - Babaji Ke Bagiya Me Kusum Phul Lyrics

बाबाजी के बगियामे कुसुम फूल, 
फूल फुलय कचनार
लाल रंग होरी ओ ब्रजहोरी हो
फूल लोढ़य गेली सुन्नरि, रंग होरी जो ब्रजहोरी
बेसरि लटकल डारि
कानय लगली खीजय लगली सुन्नरि, रंग होरी ओ ब्रजहोरी
के देत बेसरि उतारि
घोड़बा चढ़ल ननदोसी आबय, रंग होरी ओ ब्रजहोरी
हम देब बेसरि उतारि
जौं तोरा बेसरि उतारि देब, रंग होरी ओ ब्रजहोरी
हमरो के कीये देब दान हो
तोहरो के देब हाथ मुनरी, रंग होरी ओ ब्रजहोरी
आओर देब गृमहार
डाहब जाड़ब हाथ मुनरी, रंग होरी ओ ब्रजहोरी
समुद्र भसायब गृमहार
लेबहुमे लेबहु ओहो दुनू यौवना
जाहि सँ खेलब सारी राति, रंग होरी ओ ब्रजहोरी

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मंगलवार, 1 फ़रवरी 2022

दिगंबर जैन मंदिर - श्री वासुपूज्य दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र, भागलपुर

छवि साभार - जैन 24
Champapur Digambar Jain Mandir Bhagalpur - भागलपुर जिलाक पश्चिमी क्षेत्र नाथनगर ( Nathnagar ) आ चंपानगर जैनि के अति पवित्र तीर्थ स्थल अछि। यैह एकटा एहन क्षेत्र अछि, जतए कुनो तीर्थंकर के पांचों कल्याणक एके स्थान पर भेल। जैन धर्म के 12मा तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य के गर्भ जन्म, तप, दीक्षा आ मोक्ष मे पांचों कल्याणक भेल अछि। अहि दृष्टि सं अहि नगरी के विशेष महत्व अछि। एकरा पंचकल्याण मंदिर के नाम सं सेहो जानल जाइत अछि। 24मा तीर्थंकर भगवान महावीर ढाई हजार वर्ष पूर्व तीन चातुर्मास चंपापुर मे व्यतीत केने छलथि। अहि मंदिर के निर्माण जयपुर के राजा सरदार श्रीदत्त संघवी करेने छलखिन।
छवि साभार - अशोक कुमार
मंदिरक विशेषता :-
करीब पांच एकड़ मे पसरल चंपापुर दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र श्रद्धालु आ पर्यटक के आकर्षित करैत अछि। मंदिरक प्रवेश द्वार जयपुर के हवामहल के तर्ज पर अछि। अहिमे 11 गुंबज अछि आ 12 गुंबज भगवान वासुपूज्य के मंदिर के अछि। मंदिर मे पाषाण आ धातु के प्रतिमा स्थापित कैल गेल अछि। परिसर मे 19 टा बड़का मंदिरक संग 49 वेदि अछि। अहिमे 24 तीर्थंकर के प्रतिमा स्थापित अछि।

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छवि साभार - अशोक कुमार
मूल मंदिर मे भगवान वासुपूज्य के तीन हजार वर्ष पुराना वासुपूज्य चरण चिह्न आ मूंगा वर्ण के प्रतिमा विराजमान अछि। मंदिर के पश्चिमी दिशा मे देशक सबसं ऊंचगर भगवान वासुपूज्य के वेदी सहित 40 फीट ऊंच प्रतिमा अछि। रामायण, महाभारत आ जैन महापुरुष के जीवन चरित्र के सचित्र वर्णन कांच पर अछि। मुख्य मंदिरक सोझा दुगो कीर्ति स्तंभ अछि। एकटा सुरंग मंदार पर्वत आ दोसर गिरीडीह के सम्मेत शिखर तक जाइत छल। इ  स्तंभ ईरानी शैली मे अछि। 

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आवागमन के साधन
भागलपुर रेलवे स्टेशन के पश्चिम सड़क मार्ग सं 3.5 कि०मी० दूरी पर मंदिर अछि। नाथनगर रेलवे स्टेशन सं डेढ़ कि०मी० दूरी पर अछि।