अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
9 सित॰ 2021
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चैत बैसाखकेँ पुरइनी, पुरइनी थइर लहर मारू रे लिरिक्स - सोहर गीत
चैत बैसाखकेँ पुरइनी, पुरइनी थइर लहर मारू रे लिरिक्स - सोहर गीत
चैत बैसाखकेँ पुरइनी, पुरइनी थइर लहर मारू रे
ललना रे, ताहि तर बेटी जनम लेल, पुरुष बेपक्ष भेल रे
कथीए ओढ़न कथीए पहिरन, कथिए पथ भोजन रे
ललना रे, कथीए जरायब सोइरी घर, पुरुष बेपक्ष भेल रे
गुदड़ी ओढ़न गुदड़ी पहिरन, कोदो पथ भोजन रे
ललना रे, कड़री जरायब सोइरो घर, पुरुष वेपक्ष भेल रे
चैत बैसाखकेँ पुरइनी, पुरइनी थइर लहर मारू रे
ललना रे, ताहि तर होरिला जनम लेल, पुरुष अपन भेल रे
लाले ओढ़न लाले पहिरन, सारिल पथ-भोजन रे
ललना रे, चानन जरायब सोइरी घर, पुरुष अपन भेल रे
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