अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
1 अप्रैल 2022
मधुश्रावणी व्रत एगारहम दिनक कथा
संध्याक विवाह आ लीलीक जन्म
हिमालयक पाँचम बेटी संध्या भेलथिन । ओ गौरी सँ छोटि रहथिन । तथापि गौरीक विवाहमे ओ महादेव सँ हिलि-मिलि गेल रहथि । महादेव हुनका बड़ मानैत रहथिन्ह । जखन संध्या विवाह योग्य भेलीह तऽ महादेव हुनका सँ विवाह करबा लेल गौरी सँ चोरा कय गेलाह । गौरी महादेवकें नहि देखि चिन्तित भेलीह । ओ हुनका तकने फिरथि मुदा महादेव कतहु नहि भेटलथिन । गौरीकें पता लगलनि जे महादेव संध्या सँ विवाह करबा लए गेल छथि । गौरी शोकातुर भए गेलीह । ओ कानए लगलीह । कनैत-कनैत शरीर सँ घाम चलय लगलनि । घाम चलला सँ देह सँ मैल छुटय लगलनि । सब मैलकें गौरी जमा कयलनि आ' एकटा साँपक आकार बनाए ओकरा बीच बाट पर राखि देलनि । जखन महादेव विवाह क' क' घुरलाह, त' देखैत छथि जे गौरी हबो ढकार भए कानि रहल छथि आ' बाट पर मैलक साँप राखल छैक । ओ ओहि मैलक साँपमे प्राण दए देल । ओ साँप लहलहाए लागल। महादेव गौरी सँ कहलनि-"अहाँ किएक कनैत छी ? ई साँप अहाँक बेटी थीक। एकरहि खेलएबा लेल हम एकटा कनियाँ आनल अछि ।" गौरी ई कथा सुनि भभाकय हँसय लगलीह । ओहि साँपक नाम लीली राखल गेल।
लीलीक विवाह
नाहर नामक एक राजा ओ ताँती नामक रानी रहथि । हुनका एक सय बेटा रहनि बैरसी जेठ ओ चनाइ हुनका सँ छोट बेटा रहथिन । बैरसी नौकरी लेल महादेवक ओतय गेलाह । महादेवकें एकटा बेटी लीली रहथिन । हुनका एकटा नोकरक खगता रहनि । महादेव बैरसीकें नोकर राखि लेलनि । एक दिन महादेव बैरसीसँ कहलनि-"लीलीकें धर्मकुण्डमे स्नान करा देबनि आ सोहाग कुण्डमे अंगूठा डूबा देबनि ।" बैसरीकें सुनबामे धोखा भेलनि । ओ उलटे कए देलथिन। धर्मकुण्डमे अंगूठा बोरा देलथिन आ सोहाग कुण्डमे नहा देलथिन । तें हेतु लीलीकें सोहाग तऽ बड़ पैघ भेलनि मुदा धर्मक लेशमात्र नहि रहलनि । लीली विवाह करबा योग्य भेलीह । बर तकाए लागल लीली जखन सुनलनि तऽ ओ कहलनि, हमरा लेल वर तकबाक काज नहि, हम बैरसी सँ विवाह करब । बैरसीक विवाह लीलीसँ भेलनि ।
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