अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
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25 अक्टू॰ 2026
Durwa Akshat Mantra - दूर्वा अक्षत मंत्र
"ॐ आब्रह्मन ब्राह्मणों ब्रह्मवर्चसी जायतामाराष्ट्रे राजन्यः शूर इषव्यौऽतिव्याधि महारथी जायताम दोघ्री धेनुर्वोढाऽनड्वानाशुः सप्ति पुरन्ध्रिर्योषा जिष्णू रथेष्ठाः सभेयो युवाऽस्ययजमानस्य वीरोजायाताम निकामे निकामे नः पर्जन्यो वर्षतु फलवत्यो न औषधयः पच्यन्ताम योगक्षेमोनः कल्पताम् मंत्रार्था: सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः। शत्रुणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदस्तव।"
उम्र में जेष्ठ आ बियाहल पांच गोटे (या बेसी) पुरुख अपन माथा झाँपि के अपन हाथ में दूभि, धान, अक्षत (चाउर) लऽ कऽ दूर्वाक्षत मन्त्र पढ़लाक उपरांत तीन बेरा दीर्घायु भवः, दीर्घायु भवः, दीर्घायु भवः पढ़ैत हाथ सँ दूभि, धान अक्षत बर या बरुआ के ऊपर फेकि कऽ एक बेर बैस कऽ उठी के आशीर्वाद देल जाएत अछि।
नोट - बर - कनियाँ संग रहला पर तीन बेरा दीर्घायु भवः आ तीन बेरा सौभाग्यवती भवः कही के आशीर्वाद देल जाइत छैक।
दूर्वाक्षत मन्त्र के अर्थ
हे भगवान अपना देश में सुयोग्य और सर्वज्ञ विद्यार्थी उतपन होथि, और शत्रु के नाश केनिहार सैनिक उतपन होथि। अपन देशक गाय खूब दूध दिअ, बैइल बड़द भार वहन करय में सक्षक होथि आ घोड़ा त्वरित रुपे दौड़य बला होय। स्त्रीगण नगरक नतृत्व करवा में सक्षक होथि, और युवक सभा में ओजपूर्ण भाषण देबैय बला और नेतृत्व देबय में सक्षक होथि। अपन देश में जखन आवश्यकता होय तखन बर्षा होय, आ औषधिक जड़ी-बूटी सर्वदा परिपक्व होइत रहय। एवं क्रमें सब तरहे हमरा सभक कल्याण होय। शत्रुक बुद्धि के नाश होय। मित्रक उदय होय।
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1 सित॰ 2021
Mahamrityunjaya
महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव केर मंत्र अछि। अहि मंत्र के भगवान शिव केर सबसं बड़का मंत्र मानल जाइत अछि। हिन्दु धर्म मे अहि मंत्र के प्राण रक्षक मंत्र मानल जाइत अछि। एहन मानल जाइत अछि जे अहि मंत्र के जाप केला सं भगवान शिव प्रसन्न होइत छथिन आ मंत्र के जाप केनिहार सं मृत्यु सेहो डरय अछि। अहि मंत्र के जाप सबसं पहिले महाऋषि मार्कंडेय द्वारा कैल गेल छलनी।
महामृत्युंजय मंत्र ( Mahamrityunjaya Mantra ) -
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् |
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ||
महामृत्युंजय मंत्र अर्थ मैथिली -
तीनू लोक के पालनकर्ता, व्याधिहर्ता, पोषणहार परमात्मा, पाकल फल जाहि तरह ओहि डंठल सं अलग भ जाइत अछि ओहि प्रकार रोग आ मृत्यु सं हमरा बचायब आ अमृतमय जीवन प्रदान करब।
इहो पढ़ब, उपयोगी अछि -
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4 जून 2021
एकादशीक शुभ मुहूर्त 2025, निर्जला एकादशी पूजा 2025 - Nirjala Ekadashi 2025 के तारीख व कैलेंडर:
- साल 2025 मे निर्जला एकादशी व्रत 31 मई, 2025, बुधदिन के अछि।
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 30 मई 2025, 1:07 बजे दुपहर
- एकादशी तिथि समाप्ति : 31 मई 2023 पूर्वाह्न 1:45 बजे दुपहर
- निर्जला एकादशी पारणा मुहूर्त : 05:23:39 सं 08:09:45 धरि 1, जून
- अवधि : 2 घंटे 46 मिनट
ज्येष्ठ मासक शुक्ल पक्ष के एकादशी के निर्जला एकादशी कहल जाइत अछि। निर्जला एकादशी के व्रत मे पाइन पीनाय वर्जित होइत अछि अर्थता पूरा व्रत मे एको बूंद पाइन तक नै पीयल जाइत अछि। ताहिलेल अहि एकादशी के निर्जला एकादशी कहल जाइत अछि। अहि एकादशी के भीमसेन एकादशी सेहो कहल जाइत अछि जाहिके कथा अहि लेख मे बताओल गेल अछि।
साल भरिक चैबीस एकादशि मे सं ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी सर्वोत्तम मानल गेल अछि। इ व्रत केला सं सबटा एकादशिक व्रत के फल भेट जाइत अछि।
विधान
एकादशीक व्रत दशमी के समाप्ति के एकादशी के तिथि सं आरंभ होइत अछि। अहि व्रत के समापन द्वादशी के तिथि के कैल जाइत अछि। इ व्रत स्त्री आ पुरुख दुनू के करबाक चाहि। अहि दिन निर्जल व्रत करैत शेषशायी रूप मे भगवान विष्णु केर आराधना के विशेष महत्त अछि। अहि दिन ‘ऊँ नमो भगवते वासुदेवायः’ के जाप क के गोदान, वस्त्र दान, छत्र, फल आदि के दान करबाक चाहि।
निर्जला एकादशी कथा मैथिल में
एक बेरा महर्षि व्यास पांडव के एतय पधारलनी। भीम महर्षि व्यास सं कहलथि, भगवान! युधिष्ठर, अर्जुन, नकुल, सहदेव, माता कुन्ती आ द्रौपदी सभ एकादशी के व्रत करय छथि आ हमरो सं व्रत रखबाक लेल कहय छथि मुदा हम बिना खेने रैह नै सकय छी ताहिलेल चैबीसो एकादशि पर निरहार रहबाक कष्ट साधना सं बचा क हमरा कुनो एहन व्रत बताबीयौ जेकरा केनाय मे हमरा विशेष असुविधा नै होय और सबटा फल सेहो हमरा भेट जाय। महर्षि व्यास जानैत छलखिन जे भीम के उदर मे बृक नामक अग्नि अछि ताहिलेल बेसी मात्रा मे भोजन केला पर तैइयो भूख शान्त नै होइत अछि।
इहो पढ़ब :-
महर्षि भीम सं कहलखिन अहाँ ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी के व्रत राखल करू। अहि दिन अन्न आ जल दुनु के त्याग करय परैत अछि जे भी मनुष्य एकादशी तिथि के सूर्योदय सं द्वादशी तिथि के सूर्योदय धरि बिना पाइन पीने रहैत अछि आ श्रद्धा पूर्वक सं निर्जला व्रत के पालन करय अछि, हुनका साल मे जतेक एकादशी आबैत अछि ओहि सब एकादशीक फल अहि एकटा एकादशी के व्रत केला सं भेट जाइत अछि। तहन भीम व्यास जी केर आज्ञा के पालन क निर्जला एकादशी के व्रत केने छलथि। जाहिके परिणाम स्वरूप प्रातः होइत होइत भीम सज्ञाहीन भ गेलथि तहन पांडव गंगाजल, तुलसी चरणामृत प्रसाद, द के हुनकर मुर्छा दुर केलनि। ताहिलेल अहि के भीमसेन एकादशी सेहो कहल जाइत अछि।
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28 मई 2021
Chandog
Yagyopavit Mantra Janeu Mantra
वाजसनेयि यज्ञोपवीत मंत्र :-
ॐ यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात्।
आयुष्यमग्रयं प्रतिमुञ्च शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः।।
छन्दोग जनेऊ मंत्र : Chandog Janeu Mantra
ॐ यज्ञोपवीतमसि यज्ञस्य त्वोपवीतेनोपनह्यामि।
जीर्ण यज्ञोपवीत त्याग मंत्र :-
ॐ एतावद्दिनपर्यन्तं ब्रह्म त्वं धारितं मया। जीर्णत्वात्तवत्परित्यागो गच्छ सूत्र यथासुखम ।।
जानकारी : संसार मे दु प्रकारके मैथिल (ब्राह्मण) होइत अछि। एकटा छन्दोग आ दोसर, वाजसनेयी। अतः अहि नाम सं दु टा जनेऊ मंत्र सेहो अछि। हमर जानकारी मे छांदोग्य मंत्र बला जनेउ मे 3 परवल आ वाजस्नेयी मे 5 परवल होइत अछि। केतौ केतौ परवल भिन्न भ सकैत अछि।
ई विशिष्ट एक सूत्रके तीनबेर लपेटीकए तीन तानी बना "वाजसनेयी ब्राह्मण" पाँचटा गाँठ तथा "छन्दोग ब्राह्मण" के द्वारा तीन गाँठ देल जाइत अछि जकरा प्रवर (परवल) कहल जाईछ।
मिथिला में वाजसनेयी ब्राह्मण आ छन्दोग ब्राह्मणक अपन अपन विशेष गौरव गाथा छन्हि। शास्त्रानुसार वेदक जे ॠचाक निर्माण पाँच व्यक्ति मिला कए कएलन्हि, ओ सब वाजसनेयी ब्राह्मण भेलाह आ जे ॠचाक निर्माण तीन व्यक्ति मिल कए कएलन्हि, ओ लोकनि छन्दोग ब्राह्मण छथि।
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7 अप्रैल 2021
Gayatri
ॐ भूर् भुवः स्वः।
तत्सवितुर्वरेण्यं।
भर्गो देवस्य धीमहि।
धियो योनः प्रचोदयात्।
मैथिली मे भावार्थ : ओहि प्राणस्वरूप , दुःखनाशक , सुखस्वरूप , श्रेष्ठ , तेजस्वी , पापनाशक देवस्वरुप परमात्माके हम अन्तःकरणमे धारण करी ।
सावित्री मंत्र ( Savitri Mantra ) :-
ॐ भू : ॐ भुव : ॐ स्व : ॐ महः ॐ जन : ॐ तपः ॐ सत्यम् ॐ
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4 अग॰ 2019
Mantra
अनन्त भगवान् पूजन मन्त्र
देवोत्थान (देवउठाउन एकादशी पूजन मन्त्र)
● अगस्त्यार्घदान:-
कुम्भयोनिसमुत्पन्न मुनीना मुनिसत्तम्।
उदयन्ते लंकाद्वारे अर्घोऽयंप्रतिगृह्यताम्॥
शंख पुष्पं फलं, तोयं रत्नानि विविधानि च।
उदयन्ते लंकाद्वारे अर्घोऽयंप्रतिगृह्यताम्॥
● अगस्त्य-प्रार्थना:-
आतापि भक्षितो येन वातापि च महाबलः।
समुद्र शोषितो ये न स मेऽगस्त्य प्रसीदत्॥
उल्का भ्रमण:-
शास्त्राशस्त्रहतानांच भूतानांभूत दर्शयोः।
उज्ज्वल ज्योतिषा देहं निदहेव्योमवह्निना॥
अग्निदग्धाश्च ये जीवा येऽप्यदग्धाः कुले मम।
उज्ज्वलज्योतिषा दग्धास्ते यान्तु परमाङ्गतिम्॥
यमलोकं परित्यज्य आगता महालये।
उज्ज्वलज्योतिषा वत्मं पश्यन्तो व्रजन्तुते॥






