बुधवार, 31 मई 2017

गौरी के आंगन सोहाओन माइ हे लिरिक्स - समदाउन लोकगीत

गौरी के आंगन सोहाओन माइ हे, 
कानथि गौरी माइ
गौरी के कानबे पटोर नोरे भीजि गेल, 
परिजन तेजलो ने जाइ
अंगनामे डोलिया लगौलनि शिवशंकर, 
शुभ घड़ी बीतियो ने जाइ
आइ हे माइ हे पर हे परोसिन, 
शिवजी के कहू ने बुझाइ
बड़ रे जतन सौं गौरी बेटी पोसलहुँ, 
एक बेर दिअ ने घुमाय
भनहि विद्यापति सुनू हे मनाइनि, 
सभ धीया सासुर जाइ
सभ मनकामना हुनकहि संगमे, 
दृढ़ करू अपन गिआन

मंगलवार, 30 मई 2017

सबटा कहबनि अपना मैया के - मैथिली पुत्र प्रदीप (प्रभुनारायण झा)

बाबा जँ ठोकरेथिन सबटा कहबनि अपना मैया कँ।
मैया तो जँ ठोकरएमे तें ककरा कहबई सुनइत के ?

बेटा करए मुकदमा दायर अपना माइक कोट मे, 
बाबा तोरा हरा देब हम माइक नेहक बोट मे। 

माफ न गलती कैलहुँ बाबा छोट तनय अज्ञानी के, 
मैया माफ न करती बाबा अहाँक एहि मनमानी के। 

तों विश्वम्भर भने कहाब हम नहि देबउ मोजर हौ, 
जा धरि तों ने देखएबह बाबा रुप तोहर जे औढर हौ। 

विश्वम्भरी जननि हमरे छथि तोरो हुनके शक्ति हौ, 
तैयो चाहि रहल छह बाबा आइ 'प्रदीपक' भक्ति हौ।

धन्य अहीँ छी बाबा जग मे अहिंक थीक संसार यौ,
मैया रहती संग सदा, जँ करबई बेरा पार यौ।

सोमवार, 29 मई 2017

मिथिलाक मखान - उत्पादन आ औषधीय गुण

मिथिला धरोहर : Mithila Makhan,  Makhana Food -  मखानक खेती के उचित प्रश्रय भेटय तऽ कोसी के किसानक लेल इ वरदान साबित भऽ सकैत अछि। पोखैर, तालाब आ दलदली क्षेत्रक शांत पैइन में उगय वला मखान पोषक तत्व सँ भरपुर एकटा जलीय उत्पाद अछि। मखान मे 9.7% आसानी सँ पचयवला प्रोटीन, 76% कार्बोहाईड्रेट, 12.8% नमी, 0.1% वसा, 0.5% खनिज लवण, 0.9% फॉस्फोरस आ प्रति १०० ग्राम 1.4 मिलीग्राम लौह पदार्थ मौजूद होइत अछि।
मखानक उत्पादन
मिथिलांचलक दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, सहरसा, सुपौल, सीतामढी, पूर्णिया, कटिहार आदि जिला मे मखानक सार्वाधिक उत्पादन होइत अछि। मखान के कुल उत्पादन का 88% बिहार मे होइत अछि, या एना कही जे मिथिलांचल मे होइत अछि।

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मखाना के फाक्सनर या प्रिकली लिली कहल जाइत अछि। एकर पत्ता, डंडी आ फल पर छोट-छोट कांट होइत अछि। वनस्पति शास्त्र मे एकर नाम यूरेल फरोक्स अछि। मखाना मे जड़कंद होइत अछि। एकर बड़का-बड़का गोल पत्ता पैइनक सतह पर हेलैत रहैत अछि।
औषधीय गुण
मखान आर्गेनिक हर्बल सेहो कहल जाइत अछि। जीर्ण, अतिसार, ल्यूकोरिया, शुक्राणु के कमी आदि मे इ उपयोगी अछि। इ एन्टीऑक्सीडेंट गुण सँ भरपूर अछि। तहिलेल श्वसनतंत्र, मूत्राशय एवं जननतंत्र सँ संबंधित बीमारि मे इ लाभप्रद होइत छै। मखानक नियमित सेवन केला सँ ब्लड प्रेसर, कमर और ठेहुनक दर्द के नियंत्रित होइत छै। प्रसवपूर्व एवं जनेना मे आयल कमजोरी के दूर करबाक लेल दूध मे पका कऽ देल जाइत अछि।

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शुक्रवार, 26 मई 2017

केओ जे कानय रंग महल मे, केओ कनय दरबार लिरिक्स - समदाउन लोकगीत

केओ जे कानय रंग महल मे, 
केओ कानय दरबार
केओ जे कानय मिथिला नगरिया, 
केओ ने कहय रहि जाउ
अम्मां जे कानय रंग महल मे, 
बाबा कानय दरबार
सखी सब कानय मिथिला नगर मे, 
केओ ने कहय रहि जाउ
किनकर देल छनि अंगुरी मुनरिया, 
किनकर देल धेनु गाय
किनकरदेल छनि सब रंग सरिया, 
किनकर हृदय कठोर
आमाँ के देल छनि अंगुरी मुनरिया, 
बाबाक देल धेनु गाय
भइया के देल छनि सब रंग सरिया, 
भउजो के हिरदय कठोर

बाजय अवधमे बधैया हे, दशरथजी के द्वार लिरिक्स - राम जन्म सोहर

Baajay Avadhme Badhaiya He Lyrics

बाजय अवधमे बधैया हे, दशरथजी के द्वार,
आयल हमर रघुरइया है, दशरथ ।

अवध निवासी सभ आनन्द मगनमा 
सोहर गबइत नाचय देहरी अँगनमा 
आनन्दविभोर भेली मैया हे, दशरथ । 

राम के जनम सुनि उनटल नगरिया 
केकरो ने चीन्है केओ दशरथ दुअरिया 
खोलू-खोलू सोरी केवड़िया है, दशरथ ।

राजा लुटाबथि अनधन सोनमा 
रानी लुटाबथि दूनू हाथक कँगनमा 
भरि गेल निछावर अँगनमा हे, दशरथ ।

चलु चलु सखि आइ दशरथ दुअरिया 
बचबाके देखब जुड़ायब नजरिया 
लतिकासनेह पमरिया है, दशरथ ।

गुरुवार, 25 मई 2017

जगत जननि अहाँ मिथिलाक धिया सिया लिरिक्स - Jagat Janani Ahan Mithilak Dhiya Siya

सीता माता के मैथिली गीत लिरिक्स

जगत जननि अहाँ मिथिलाक धिया सिया, 
धन्य धन्य मिथिलाक धाम माता मैथिली।।

मिथिलेक भूमि मध्य हमरो जनम भेल, 
तन मन हमर महान माता मैथिली।।

मिथिलेक सुरुजक भेटए किरिण नित, 
देथि इजोत सेहो चान माता मैथिली॥

मिथिलेक गुज - गुज राति अन्हरिया, 
मिथिलेक भोर आर साँझ माता मैथिली॥

गगन पवन सब मिथिलेक सुन्दर, 
एकरे सुखद अभियान माता मैथिली॥

युग - युग केर ऋण माथ धरब नित, 
अहँक चरण सुख धाम माता मैथिली॥

अहिँक कृपादृग ज्योति प्रदीपित, 
रहब सदय सिया - राम , माता मैथिली॥

गीतकार: प्रभुनारायण झा (मैथिली पुत्र प्रदीप)

बुधवार, 24 मई 2017

बारह बरस के हमरो उमरिया तेरह बरस नेने जाय लिरिक्स - समदाउन लोकगीत

बारह बरस के हमरो उमरिया, 
तेरह बरस नेने जाय
खेलइ छलहुँ सुपती मउनियाँ, 
अझटे मे आबि गेल नेआर
सुपती मउनिरयाँ आंचर तर झांपल, 
सीता रूसली मुरछाइ
अपना महल सौं आमा बहार भेली, 
किए सीता रूसलि मुरछाइ
खेलइ छलहुँ सुपती मउनियाँ, 
अझटे मे आबि गेल नेआर
कोने निरमोहिया अम्मां दिनमा गुनलकइ, 
कौने निरमोहिया नेने जाय
कौने निरमोहिया अम्मां दिन मानि लेलकइ, 
कौने निरमोहिया नेने जाय
पंडित निरमोहिया रामा दिनमा गुनलकइ, 
ससुर निरमोहिया नेने आयल
बाबा निरमोहिया दिन मानि लेलकइ, 
भइसुर निरमोहिया डोलिया फनाय
से स्वामी निरमोहिया नेने जाय

मंगलवार, 23 मई 2017

मैथिली किस्सा : गोनू झा भोज केलखिन

मिथिला धरोहर : जखन गोनू झा बृद्ध पिताक देहांत भऽ गेलनि तऽ गौंआँ लोकनि के प्रसन्नता भेलनि जे एकटा दमगर भोज पैर लागत। साराझप्पीक बाद गौंआँ सभ गोनू झाक दलान पर जुमैत गेलाह आ हुनक पिताक महानताक बखान करैत वृषोरत्सर्ग श्राद्धक संग असिद्ध भोज करबाक सुझाब देबय लगलथिन। बेर बेर असिद्ध भोजक आग्रह करैत देखि गोनू झा कहलखिन जे ओना तऽ हमरा पैसा कौरी के अभाव अछि, मुदा हम प्रयास करब आ अहाँ लोकनिके इच्छाक पूर्ति करबाक चेष्टा करब।मुदा गौंआँ सभ एके ठाम कहि देलखिन जे पाइ बिना ककरो श्राद्ध कतहु पड़ल रहलैक यै।  सऽर समाज आखिर कोन दिन लेल रहैत छैक।अहाँ मात्र हँ कहि दियौ। सभ वस्तुक प्रबंध भऽ जैयतक। गोनू झा देखलनि जे इ सभ नहि मानत। मधुरक भोज गछबाइये कऽ छोड़त आ ताहि लेल टाका पैसाक प्रबंध सेहो कऽ देत, मुदा जखन मधुरक भोज करहिये पड़त तऽ कर्ज कियाक लेब।

गोनू झा बजलाह 'ठीक छैक। अपने सभक इच्छाक पूर्ति होयत। हम टाका पैसाक जोगार स्वयं कऽ लेब आ अहाँ सभक मूँह मिट्ठो करा देब।"

सभ तृप्त होइत अपन - अपन घर जाइत गेलाह।
क्रमशः श्राद्धक समय लगचियाल गेल आ गौंआँ सभ अपन - अपन पेट सोन्हाबऽ लगैत लगला।

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श्राद्धक दिन जखन नोंत देब आरम्भ भेल तऽ लोकक प्रसन्नताक मन अपना - अपना ढंगे खयबा आ लयबाक योजना बनबय लागल।संध्या काल जखन बिझहो भेल तऽ केओ छिपली - लोटा, तऽ केओ पितरिया बरगुन्ना, तऽ केओ कसकुटक बट्टा लऽ कऽ गोनू झाक घर दिस विदा होइत गेलाह किछु खन्हन किछु मोटरी बन्हनक मन्सूबा पोसने सभ हुनक दलान पर गज - गज करय लागल।

चटपट बीड़ी बैसाओल गेल। करमान लागल लोक अपन उचित स्थान ताकि - ताकि बैसैत गेलाह। पुरैनिक पात परसनाइ आरम्भ भेल | जिनका जेना इच्छा भेलनि, पात लऽ कऽ ओकरा सजोलनि आ जल - सिक्त करैत गेलाह। कने कालक लेल शांति पसरल रहल। फेर दू तीन बलिषट बारिक छिट्टा कन्हापर रखने आँगन सँ बहरायल। छिट्टा देखैत देरी, सभक जीह सँ पानी उधिआय लगलनि.....मुदा पात पर मधुरक बदलामे जखन कुसियारक छोट - छोट टोनी सभ खसय लागल तऽ निमन्त्रित ब्राह्मन हहा - हहाकऽ निचा खसय लगलाह - ई गोनूआँ सभ के बुरि बना कऽ चली गेलौं।
तखने गोनू झा अपन बटलोही सन पेट पर हाथ फेरैत आँगनां सँ बहरयालह "हँ, तऽ आब नैवेध देल जाय"। पुनः कऽल जोडैत आगू बजलाह '
आइ स्वर्ग मे हमर पिता कतेक प्रसन्न होइ़त हेताह, जे एतेक रास ब्रह्मण देवता हुनका नाम पर बैसल भोजन कऽ रहल छथि।'

गामक मुखिया के नहि रहल भेलनि, बजलाह "की हओ गोनू, एकोरत्ती तोरा लाज नहि होइ छऽ जे दलान पर बैसा हमरा सभ के बुरि बना रहल छऽ।

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गोनू गम्भीर मुद्रामे प्रत्युत्तर कयलथिन "हम के होइत छी अपने सभ के बुरि बनौ़निहार। अहाँ लोकनि तऽ जानै छी जे सब मिठाइयेक जैड़ होइत अछि कुसियार, तें तरह - तरह मिठाइक फेरी सँ हम बुझल जे किएकने तकर मुले अपन लोकनिक समक्ष राखल जाय। होइयौ, आब अधिक विलम्ब नहि करियौ।
ब्रह्मण देवता लोकनि कें जखन अपन गलतीक भाज भेलनि तऽ बकार नहि फुटलनि।
अन्ततोगत्वा टोनिकें चिबबैत मोनहि मोन गोनूक श्राद्धक संग संग अपन अपन पेटोक श्राद्ध करय लगलाह।
@प्रभाकर मिश्रा 'ढुन्नी'
Tags : # Gonu jha # Maithili Story

बुधवार, 17 मई 2017

श्रीलंका में रेमंत कुमार करताह मिथिला पेंटिंग

मधुबनी : आब जल्दीए श्रीलंका के राजधानी कोलंबो मे सेहो मधुबनी पेंटिंग के परचम लहरायत। भारत सरकार के शिल्प कला संस्थान द्वारा पूरा देश सँ विभिन्न विद्या कऽ कलाकार के कोलंबो भेजल जा रहल अछि। जाहिमे बिहार सँ मिथिला पेंटिंगक क्षेत्र में प्रतिनिधित्व सेहो कैल जायत। इ प्रतिनिधित्व जितवारपुरक युवा कलाकार रेमंत कुमार मिश्रा करताह। हुनका सुंदर मिथिला पेंटिंगक लेल केंद्र सरकार द्वारा चयन कैल गेल छनि।

रेंमत कुमार मिश्रा कहै छथि जे हम 10 वर्षक उम्र सँ अहि कला मे जुड़ गेल छलहुँ। 1995 में पहिल बेर सीसीआरटी छात्रवृत्ति के लेल चुनल गेल छल। ओकर बाद 2014 में राज्य पुरस्कारक लेल बिहार सरकार द्वारा चयन कैल गेल। ओतहि गोआ में बेहतर कला कृति के लऽ कऽ  सांस्कृतिक कला परिषद गोआ द्वारा ताम्रपत्र सँ सम्मानित कैल गेल।

श्री मिश्रा बतेलखिन जे हम जेखन छोट छलहुँ ताहि समय अपन दादी राज्य पुरस्कार प्राप्त स्व. मुनेश्वरी देवी केर पेंटिंग करैत देखैत छलहुँ। ओहिये समय मे पेंटिंग के कूची पकड़नाय शुरू कऽ देलहुँ। दादी के देहांतक उपरांत चाची पद्मश्री सीता देवी सँ कलाकारीक विशेष बात सीखलहुँ। तऽ धरि सँ एखन धैर बहुते शहर में पेंटिंगक प्रदर्शनी में भाग लऽ चुकल छि। श्री मिश्रा अहि सँ पूर्व दु बेरा चायना, एक बेरा हांगकांग सेहो जा चुकल छथि। ओतहि जेएनयू में मिथिला पेंटिंग पर कार्यशाला में भाग लेने छलथि। जेखनकि गुजरात के बरौदा विश्वविद्यालय में मधुबनी पेंटिंग पर सेमिनारक आयोजन भेल छल जाहिमे हिनका ओहिक नेतृत्व करबाक मौका भेटल छल।
सोर्स : प्रभात खबर

शुक्रवार, 12 मई 2017

प्रगटलहु मिथिला भू से धन्य धरती भेल ई - मैथिली स्तुति

प्रगटलहु मिथिला भू से धन्य धरती भेल ई,
भेल शीतल सकल धरती धन्य माता मैथिली।

बहुत तब धल जे घरा छल शस्य श्यामल भेल से, 
भूख सँ आकुल जते छल तुष्ट तखने भेल से।

देल मर्यादा अहाँ एहि माटि कैं हे मैथिली,
रहत जन युग युग ऋणी बनले अहाँ सँ मैथिली।

जन जनक जे जनक तनिका देल मर्यादा अहाँ,
छल लिलोह निठोर सबहक बनि गेल माता अहाँ।

स्वयं मर्यादाक पुरुषोतम कहावथि राम जे,
से स्वयं जेहिठाम ऐला धन्य धरती भेल से।

हमर वाणी छथि सुशोभित से अहीं सँ मैथिली,
धन्य ई मिथिलाक धरती धन्य माता मैथिली।

जे अपाटक नहि बुझथि महिमा अहाँक हे मैथिली,
क्षमा हुनको क' देवनि अज्ञान छथि हे मैथिली।

हम प्रदीपित भेल छी महिमा अहिक माँ मैथिली,
धृष्टता हमरो करब सब माफ माता मैथिली।

रचनाकार: मैथिली पुत्र प्रदीप (प्रभुनारायण झा)


बुधवार, 10 मई 2017

कानल शिशु नवजात, श्रवण सुनि, जुड़ भेल हे लीरिक्स - राम जन्म सोहर

कानल शिशु नवजात, श्रवण सुनि, जुड़ भेल हे। 
ललना, कौशल्या के पुरल मनोरथ, राम जनम लेल रे ।। 

दौड़ल नगरक नारि, नउनिया प्रथम गेल रे। 
ललना, रानी देल गेल मणिहार, नउनिया बिहसि लेल रे।। 

बचबा देखइते झुकि खसल, नउनिया बेहोश भेल रे ।
ललना, कोरबा उठाय मुँह देखि, कौशल्या से छीनि लेल रे।। 

युग-युग जीबय एहो बालक, जगत आनन्द भेल रे।
ललना, लतिकासनेह गाबय सोहर, आनन्द मगन भेल रे।।

सोमवार, 8 मई 2017

अंगनामे घुमि-घुमि सीता बेटी कानथि लिरिक्स - समदाउन लोकगीत

अंगनामे घुमि-घुमि सीता बेटी कानथि, 
आजुक दिनमा सुदिन
आरे बाप-पित्ती केर पयर धय हे कानथि, 
तइयो दिन लेल मानि
आरे माय पितिआइनि केर गर धय हे कानथि, 
तइयो देल डोलिया पइसाय
आरे संगी बहिनपा केर गर धय हे कानथि, 
तइयो देल पनिया पिआय


गुरुवार, 4 मई 2017

अहाँ केर चरण तेजि ककरा मनाबी - लिरिक्स Ahan Ker Charan Teji Kakra Manabi Lyrics

Ahan Ker Charan Teji Kakra Manabi Lyrics

अहाँ केर चरण तेजि ककरा मनाबी,
अहाँ जँ ने सुनबह तँ ककरा सुनाबी।

कहइये कतेक लोक ढोंगी फरेबी,
कहइये कियो अंध विश्वाश सेवी। 
कियो इहो कहि दैत अछि मैया वादी,
अहाँ जँ ने सुनबह तँ ककरा सुनाबी।

चराचर जते सब अहीँ सँ पलैये,
अहिँक शक्ति सँ अम्ब जगती चलैये, 
सुरभि माँ अहीँ सँ सदति काल पाबी,
अहाँ जँ ने सुनबह तँ ककरा सुनाबी।

कत' अछि भवन अम्ब केहिठाँ बसेरा,
कियो ने जनैये अहाँक सृष्टि फेरा, 
चलइ छी जतय सँ ओतहि फेर आबी। 
अहाँ जँ ने सुनबह तँ ककरा सुनाबी।

अनेरे अपन नाम राखल 'प्रदीपे' 
सदति खन रहड़ छी अन्हारक समीपे 
अहिंक आश-विश्वाश मन मे बसाबी। 
अहाँ केर चरण तेजि ककरा मनाबी।

रचनाकार: मैथिली पुत्र प्रदीप (प्रभुनारायण झा)

मंगलवार, 2 मई 2017

राजनगर पैलेस : हिन्दू-रोमन शैली मे बनल 140 साल पुरान महल

मिथिला धरोहर, प्रभाकर मिश्रा : मधुबनी सँ 12 किमी दूर राजनगर स्थित राजनगर पैलेस ( Rajnagar palace ) के दरभंगा महाराज रामेश्वर सिंह 1880 ई० मे हिंदू रोमन शैली मे बनवेने छलैथ। राजनगर पैलेस 1934 के भूकंप मे खराब जँका क्षतिग्रस्त भ गेल छल। भूकंप उपरांत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी सेहो अहिके देखय लेल आयल छलथी। पैलेस के दरबार महल चाइर हाथीक पीठ पर बनैल गेल अछि।

लोग अखन सेहो एतय के नौलखा महल मे बनल काली मंदिर, कामाख्या मंदिर, गिरिजा मंदिर, दुर्गा मंदिर, महादेव मंदिर मे पूजा करबाक लेल आबैय अछि। अहि पूरा परिसर मे कुल 11टा मंदिर अछि। अहि मंदिरक निर्माण लेल फ्रांस सँ कारीगर बजायल गेल छल।हालांकि मरम्मतक बावजूद किछ मंदिर आब दरकय लागल अछि। इ एकटा बेहतरीन पर्यटन स्थल बैन सकैत अछि।
एखन एकर बड़का हिस्सा मे सशस्त्र सीमा बल के प्रशिक्षण केंद्र चली रहल अछि।