अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
1 दिस॰ 2022
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गे माइ अरही बन सँ खरही कटाओल लिरिक्स - सामा चकेवा लोकगीत
गे माइ अरही बन सँ खरही कटाओल लिरिक्स - सामा चकेवा लोकगीत
Ge Mai Arahi Ban Sa Kharhi Kataoal
गे माइ अरही बन सँ खरही कटाओल
वृन्दावन बिट बाँस
गे माई ताहि बाँस के बंगला छड़ाओल
झिहिर झिहिर बहय बसात
गे माइ ताहि पैसि सुतला भइया से फलां भइया
आबि गेल आलसक नीन
गे माइ उठबय गेलथिन बहिनो से फलां बहिनो
उठू भइया भए गेल परात
गे माइ एहन दोचारिनि ननदि कतहु नहि देखल
आधे राति कहय परात
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