अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
16 जन॰ 2014
संचरि चतुर चतुर गण आगरि लिरिक्स - डहकन गीत
संचरि चतुर चतुर गण आगरि
संचरि चतुर सेयानि
सोलहो सिंगार कय चलली हे फल्लाँ समधिन
चलि भेली दड़िभंगा बजार हो लाल
टिकुली के ज्योति देखि साहेबा लोभयलकनि
लय गेलनि दरोगबा के दरबार
देहरी बैसल कानथि फल्लाँ बेटबा
मोर मइया उढ़रल जाय हो लाल
जुनि कानीय जुनि खीजीय फल्लाँ बेटबा
जुनि ढ़ारीय नयना सऽ नोर
देबउ रे बउआ तोरा लड्डू रे मिठइया
चुपहि चुप रहि जाउ हो लाल
जीवनाथ भल डहकन गाओल
बरियतियाक बहिन छकल छिनारि
शेयर करू
नव पोस्ट
⏳
पुरान पोस्ट
⏳
https://mithiladharohar.blogspot.com/2014/01/smart-phone-maithili-kavita.html
https://mithiladharohar.blogspot.com/2025/12/manuputra-digambar-nagarjun-kavita.html
❤ अहाँक इहो पसंद आयत:
⏳
Tags:
Dahakan Geet,
Maithili Lokgeet
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
अपन रचनात्मक सुझाव निक या बेजाय जरुर लिखू !