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मिथिला धरोहर | मैथिली पंचांग 2026-27, मैथिली लोकगीत लिरिक्स...

मिथिला धरोहर — मैथिली लोकगीत लिरिक्स, विवाह गीत, मैथिली भगवती गीत लिरिक्स, मैथिली शिव भजन लिरिक्स, भजन, छठ, होली, मधुश्रावणी गीत लिरिक्स। मैथिली पंचांग, विवाह, उपनयन मुहूर्त, मिथिला के मंदिर, लोकदेवता, साहित्यकार परिचय, कथा-कहानी, गोनू झा के कहानी एवं मिथिला संस्कृति से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी।

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21 फ़र॰ 2019

लाबा छीटऽ काल के गीत - मैथिली लोकगीत

बाबू लाबा छिड़िआउ - Maithili Lokgeet

बाबू लाबा छिड़िआउ, धीया बीछि-बीछि खाउ
बरक बाबी कनियांक बाबा संगहि सुताउ
बाबू लाबा छिड़िआउ, धीया बीछि-बीछि खाउ
बरक माय कनियांक बाबू संगहि सुताउ
बाबू लाबा छिड़िआउ, धीया बीछि-बीछि खाउ
बरक बहिनि कनियांक भइया संगहि सुताउ
दुनू घर गुजर चलाउ
बाबू लाबा छिड़िआउ, धीया बीछि-बीछि खाउ

बेदिया घुमि-घुमि लाबा छिड़िआबे हे - Maithili Lokgeet

बेदिया घुमि-घुमि लाबा छिड़िआबे हे महारानी सिया
रघुवर घुमि-घुमि देल हे महारानी सिया
आगू आगू दुलहिन लाबा छिड़िआबे हे महारानी सिया
रघुवर पाछू लागल जाइ हे महारानी सिया
सखि के वचन सुनि प्रेम संग ने लगबियौ हे महारानी सिया
पहिरा दिअनु प्रेमक मालहे महारानी सिया
वेदिया जे घुमि घुमि लाबा छिड़िआबे हे महारानी सिया
उठू उठू आहे सखि लाबा छिड़िआउ हे
दुलहा दुलहिनियां के मड़बा घुमाउ हे
आंचर- चदरिया मे गेठिया बन्हाउ हे
घूमि घूमि सखि सब मंगल गाउ हे
आगू आगू दुलहिन पाछू दुलहा कुमार हे
देखू आब सखि सब फूल बरिसाउ हे
सीता जी के हाथ शोभनि सिन्दुर के पुड़िया हे
छोड़ि देलनि सीया अपन - परार हे
कहथिन गाबि सखि गारि बरिआति हे
दुलहा के माय बहिन बहुत छिनारि हे

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