अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
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26 सित॰ 2025
Durga Bhajan
अंगना में आईब गेली दुर्गा भवानी
मगन भेल इ आय मिथिला के धरती
बहुत जतन सं हम कलश बैसेलियै,
नारियल संग आम्र पल्लव लेलियै,
रंग बिरंगक फूल लोड़ल'लियै,
सजाय लेलियै हम अड़हुल फूलक डाली,
मगन भेल इ आय मिथिला के धरती...
मईट सनलियै हम शिव जी बनेलियै,
मैय्या के संग हम शिव के पूजलियै,
अक्षत चंदन गंगा जल चढ़ा के,
मनाए लेलियै मैय्या भोला के भोरे,
मगन भेल इ आय मिथिला के धरती...
लाले लाल धागा में माला बनेलियै,
मैय्या के गर्दैन में माला पहिरेलियै,
भोग लगाय मा के धूप देखेलियै,
सजाए लेलियै आय लाले रंग चुनरी,
मगन भेल इ आय मिथिला के धरती
तेसर नयन में 'प्रदीप' देखलियै,
त्रिशूली ऊपर में जयंती चढेलियै,
मह-मह भेल सुगन्धित मंदिर,
नमन गेलियै आय मैय्या के बेरी,
मगन भेल इ आय मिथिला के धरती..
गीतकार : मैथिली पुत्र 'प्रदीप'
गायक : राम बाबू झा, पायल मुखर्जी
22 सित॰ 2024
Maithili Lokgeet
हे पाहुन मिथिले मे रहियौ, दोसर बात तँ कहब नै,
जेहन सुख ससुरारी में भेटत, तेहन सुख तऽ कत्तौ नै
जेहन सुख ससुरारी में भेटत, तेहन सुख तऽ कत्तौ नै
सब दिन भोरे उबटन मलि कऽ, कमला जल सं नहायब
एके मास में श्याम देह के, हम सब गोर बनायब
झूठ बात नै कही अहाँ के, मौका तऽ अहाँ दियौ ने
जेहन सुख ससुरारी में भेटत, तेहन सुख तऽ कत्तौ नै
सब दिन रुचिगर तरुआ भुजिया, स्वर्ण थार में परसब
भूक स्वाद बढ़ि जायत सुनि-सुनि, गाइर साइर के रबरब
बेर बेर हम करब खुशामद, थोरबो आर तऽ लियौ ने
जेहन सुख ससुरारी में भेटत, तेहन सुख तऽ कत्तौ नै
कमल कोशी बागमती, गण्डक में मन सं उमकब
पावस में बारहमासा सुनायब, अपने झूला झुलायब
पवन देव सं करब नेहोरा, नहुँए-नहुँए बहु ने
जेहन सुख ससुरारी में भेटत, तेहन सुख तऽ कत्तौ नै
बहिन हमर जनक किशोरी, करती अवश्य पुछारी जे
जखने अपने अवध नगरिया, केर करबै तैयारी जे
चरण धरब नहि छोड़ब कथमपि, हे राघव अहाँ बिसरब नै
जेहन सुख ससुरारी में भेटत, तेहन सुख तऽ कत्तौ नै
अपने सं मिथिलावासी के युग-युग सं अछि नाता
ई सौभाग्य हमर सब के लिखने छथि सदय विधाता
अपने प्रखर 'प्रदीप' प्रभु हमरा अन्हारो तऽ करियौ ने
रचनाकार: मैथिली पुत्र प्रदीप (प्रभुनारायण झा)
Maithili Lokgeet
Pahiri lal sadi uparai khesari lyrics
पहिरि लाल साड़ी उपारइ खेसारी,
बदन गोर छै भूख सं भेल कारी।
साँझ बहुरिया सासुर एली
कोबर बनल आकाशे
दिन मे प्रियतम बोइन ने केलकै
तैं भेल राति उपासे
बसल छै पिया सेहो अनके घरारी ।
बदन गोर छै भूख सं भेल कारी...
काजर बिना नयन अनुरंजित
तेल बिना छौ मांगे
ठोर मे फुफरी रंग न लागइ
दुलहिन दुबरी आंगे
जगत सं बेचारी बनल छै अनारी।
बदन गोर छै भूख सं भेल कारी...
रूप गरीबी सं थकुचेलइ
तदपि पैर छै भारी
बयस किशोर कोना चली एलय
बहुत लजायलि नारी
पवन जोर सकतइ ने आँचर सम्हारि ।
बदन गोर छै भूख सं भेल कारी...
भोरे उठी क खेत एलइ
नै जानि कखन घर जेतइ
प्रियतम सेहो मैंट कटइ छै
के घर चूल्हि जरेतइ
प्रतिपो ने जानय के करतइ पिछारी ।
बदन गोर छै भूख सं भेल कारी...
रचनाकार: मैथिली पुत्र प्रदीप (प्रभुनारायण झा)
Maithili Lokgeet
चलु चलु बहिना हकार पूरै ले,
टुन्नी दाइक बर एलय टेमी दागैले।
लटका चड़ा छै नौ कुरा
पाकल केरा सात चंगेरा
छाल्ही बला दही तँ करेजा कटैए।
टुन्नी दाइक बर एलय टेमी दागैले।
माटिक सांप बनल छै करिया
मैनाक पात पिठारक थरिया
बीच मे सिंदूरक ठोप सोभैए।
टुन्नी दाइक बर एलय टेमी दागैले।
कानियाँ माइ के घुघना लटकल
पातिलक चाउर एलइ बिनु फटकल
सासुक कोढ़ बड़ कठोर छलैए।
टुन्नी दाइक बर एलय टेमी दागैले।
भरी पनपथिया जाहि - जूही
कथा कहथि से होइ छथि कुही
बिध मे मटकुरी बड़ छोट एलैइए।
टुन्नी दाइक बर एलय टेमी दागैले।
उथल पुथल मे छथि बिधकरी
दीपक टेमी सटेलन्हि धरि
टुन्नी दाइ के आँखि सं नोर झड़ैए।
टुन्नी दाइक बर एलय टेमी दागैले।
रचनाकार: मैथिली पुत्र प्रदीप (प्रभुनारायण झा)
Maithili Lokgeet
तों नहि बिसरीहें गे माँ,
तों जे बिसरमे तऽ दुनिया मे पड़तै बौआए।
तोरा बेटा के तोरे टा आशा
तोरा बिना छैने ककरो भरोसा।
कोरा सं ने दिहें बइला,
तों जे बिसरमे तऽ दुनिया मे पड़तै बौआए।
केतबो अनठेमे पछोड़ नहि छोड़बउ,
तोरे चरण मे सिनेह अपन जोड़बउ।
बे बुझ मे दिहे बुझा,
तों जे बिसरमे तऽ दुनिया मे पड़तै बौआए।
स्वारथ भरल संसारे इ सगरो,
कियो ने कानब सुनइ छै ककरो।
जाइक ने प्रदीपो मिझा,
तों जे बिसरमे तऽ दुनिया मे पड़तै बौआए।
रचनाकार: मैथिली पुत्र प्रदीप (प्रभुनारायण झा)