बुधवार, 30 नवंबर 2022

बगिया मिथिलाक पारंपरिक पकवान - Bagiya Traditional Dish of Mithila

मिथिला अपन विभिन्न तरहक खान-पान लेल जानल जाइत अछि। ओहि मे एकटा खास पकवान अछि बगिया जे मुख्य रूप सं पूस मास मे बनायल जाइत अछि। विशेष रूप सं नबका तैयार भेल चाउरक आटा और गुड़ सं बनय बला इ पकवान सुपाच्य होयबाक संगे स्वास्थ्य के लेल सेहो बहुते फायदेमंद होइत अछि। इ एकटा एहन पकवान छै, जाहिमे नै त कुनो तरहक तेल लागैत छैक। आ नै नून। एकरा गरम पाइन मे उबाइल क बनाओल जाइत अछि।

ओना त बगिया मुख्य रूप सं चाऊरक आटा और गुड़ सं तैयार होइत अछि। मुदा आब एकरा औरो दोसरो तरीका सं बनायल जाइत अछि। जाहिमे दूध सं तैयार होय बला बगिया सेहो अछि जेकरा दूध बगियाक नाम सं जानल जाइत अछि। एकर अलावा आब गुड़ आ तीसी, दाइल द के सेहो बगिया तैयार होमय लागल ऐछ। हालांकि सब तरहक बगिया के गर्म पइने मे उसैन क तैयार कैल जाइत अछि।
दूध बगिया बनेनाय बहुते आसान छै। चाउरक आटा के गूंथनाय अछि। फेर ओकरा बगियाक आकर देनाय अछि। फेर खौलैत दूध मे पकेनाय अछि। एक तरहे और बगिया बनैत अछि, चाउरक आटा के गूंइथ लिअ। चना दाइल के उसैन क ओहि मे मसाला आदि मिला क स्टफिंग क लेल तैयार क लेनाय अछि। चाउरक आटा के लोइ बना क ओहि मे स्टफिंग केनाय अछि फेर खौलैत पइन मे उबाइल लेनाय अछि।

इहो पढ़ब :-

मिथिला मे नव जनमल बच्चा के लेल पूसक महीना मे बगिया सं एकटा विशेष बिद्ध कैल जाइत अछि, जकरा पुसठ कहल जाइत अछि। इ ओहि बच्चाक लेल होइत अछि, जेकर जिनगी मे पहिल बेरा पूसक महीना आबैत अछि। घरक स्त्रीगण कुनो एक दिन बगिया बना क ओहिसं बच्चाक गाल, हाथ आ तरबा के सेकय छथि। एहन मान्यता छै जे इ केला सं बच्चा के चर्म रोग नै होइत छै। मुंह मे चमक आबय अछि। बिद्ध बला दिन गांव-समाज मे बगिया सेहो बांटल जाइत अछि। 

शुक्रवार, 25 नवंबर 2022

राम हमरे थिका, थिकी हमरे सिया - मैथिली पुत्र प्रदीप

Ram Hamare Thik Thiki Hamare Siya 

राम हमरे थिका, थिकी हमरे सिया, 
तखन चिंता कथु के कियै हम करी ? 
सबसँ पावन धरा मे हमर मिथिला, 
आन तीर्थक भरोसा कियै हम करी ? 

जेहिठा गंगा बहथि कोशिको नित हँसथि, 
संग कमला बलानो मगन मे रहथि ? 
हम लखनदेड़ गंडक के बिसराय कऽ, 
आन सरिताक भनिता कियै हम करी ? 

योग जप मे सदा अग्रणी नाम अछि, 
माटि हमरे छबो दर्शनक धाम अछि। 
छथि भगिनमान हनुमान लव-कुश जत, 
आन शौर्यक भरोसा कियै हम करी ? 

स्वच्छ स्वर्गहुँ सँ बेसी सुकोमल सुगम,
पुण्य बासक बेगरते एही ठाँ रहू। 
राम सीता 'प्रदीपित' रहइ छथि मगन, 
छोड़ि मदमोह हिनके अपन दुःख कहू।

रचनाकार: मैथिली पुत्र प्रदीप (प्रभुनारायण झा)

गे माइ कौने भइया जयता अटना पटना लिरिक्स - सामा चकेवा लोकगीत

Ge Mai Kaune Bhaiya Jayata Atana Patna 

गे माइ कौने भइया जयता अटना पटना
कौने भइया जयता मुंगेर
गे माइ कौने भइया शहर दरभंगा
कौने भइया जयता मनेर

गे माइ फलां भइया जयता अटना पटना
फलां भइया जयता मुंगेर
गे माइ फलां भइया जयता शहर दरभंगा
फलां भइया जयता मनेर

गे माइ फलां भइया लौता आलरि-झालरि
फलां भइया लौता पटोर
गे माइ फलां भइया लौता झिलमिल केचुआ
फलां भइया कामी सिन्दूर

गे माइ फलां बहिनो पहिरथु आलरि झालरि
फलां बहिनो पहिरथु पटोर
गे माइ फलां बहिनो पहिरथु झिलमिल केचुआ
फलां बहिनो कामी सिन्दूर

सामा खेलाय बहिनो आशीष देलनि
जगे-जगे जीबथु भइया मोर


बुधवार, 23 नवंबर 2022

मिथिला पंचांग विवाह मुहूर्त - 2023 Mithila Panchang Vivah Muhurat 2023 - Vivah Muhurat 2023 Mithila Panchang

Mithila Panchang 2023 Marriage Dates, Mithila Lagan 2023,  Marriage Dates in 2023 Mithila Panchang

विवाह मुहूर्त जनवरी 2023 : 18, 19, 22, 23, 25 ,26, 27, 30 |

विवाह मुहूर्त फरवरी 2023 : 1, 6, 8, 10, 15, 16, 17, 22, 24, 27 |

विवाह मुहूर्त मार्च 2023 : 1, 6, 8, 9, 13 |

विवाह मुहूर्त मई 2023 : 1, 3, 7, 11, 12, 17, 21, 22, 26, 29, 31 |

विवाह मुहूर्त जून 2023 : 5, 7, 8, 9, 12, 14, 18, 22, 23, 25, 28 |

विवाह मुहूर्त नवम्बर 2023 : 24, 27, 29 | 

विवाह मुहूर्त दिसम्बर 2023 : 3, 4, 7, 8, 10, 13, 14, 15 |

नोट : मिथिला पंचांग में जुलाई, अगस्त, सितम्बर, अक्टूबर 2023 में विवाहक कोनो मुहर्त नै देल अछि।



मिथिला पंचांग द्विरागमन मुहर्त 2023

फरवरी 2023 : 23, 24, 27 |

मार्च 2023 : 1, 2, 3, 8, 9, 10 |

अप्रैल 2023 : 24, 26, 27, 28 |

मई 2023 : 1, 4, 5, 7 |

नवम्बर 2023 : 24, 27, 29 |

दिसम्बर : 1, 13, 14, 15 |


शनिवार, 19 नवंबर 2022

Writer Raj Mohan Jha - राजमोहन झा मैथिलीक प्रख्यात कथाकार

मैथिली प्रख्यात कथाकार आ संपादक राजमोहन झा ( Litterateur Rajmohan Jha) के जन्म 1934 भेलनि। राजमोहन झा मूल रूप सं वैशाली जिलाक कुमार बजीतपुर के निवासी छलैथ। हुनका मैथिली भाषाक सर्वश्रेष्ठ लेखक मे सं एक मानल जाइत छनि। राजमोहन जी पचासक दशक मे मैथिली मे लेखन शुरू केने छलथि। राजमोहन जी श्रम विभाग मे एकटा रोजगार अधिकारीक रूप मे काज केलथि आ साहित्य मे सेहो योगदान देलथि। हिनकर पिताजी स्व.हरिमोहन झा मैथिली साहित्य के मूर्धन्य साहित्यकार रहल छलथि। 
मैथिली मे हिनक कुल नौटा रचना अछि। हिन्दी मे सेहो समीक्षा लिखैत छलथि। हुनका मैथिली कथा ‘आई काल्हि परसू’ Aai Kaalhi Parsoo (कथा-संग्रह) के लेल वर्ष 1996 मे साहित्य अकादमी दिल्ली सं पुरस्कृत कैल गेल छलनी।

इहो पढ़ब :-

एक आदि एकांत, झूठ साँच, एकटा तेसर, भनहि विद्यापति, अनुलग्नक, आइ काल्हि परसू (कथा संग्रह), गलतीनामा, टीप्पणीत्यादि (आलोचना) हिनकर लोकप्रिय रचना अछि। राज मोहन झा प्रबोध सम्मान 2009 सँ सेहो सम्मानित कैल गेल छलनी।

शुक्रवार, 18 नवंबर 2022

दुर-दुर नारद एहन बर अनलौं कोना लिरिक्स

Dur Dur Narad Ehan Bar Anlau Kona Lyrics

दुर-दुर नारद एहन बर अनलौं कोना
पढ़ि पोथी ओ पतरा बिसरलौं कोना

बसहा पीठ छथि असवार, कर त्रिशूल-मुन्डमाल
पैर फाटल बेमाय, पेट उगल, सटकल गाल
तीन अँखिया बकर-बकर तकै छथि कोना
दुर-दुर नारद एहन बर लयलौं कोना

श्वेत केश, दाँत टुटल, कम्पवात गातमे
भूत ओ पिशाच साजि लयला बरियातमे
सखि हे नाकहीन, कानहीन दाँतटुटल छनि कोना
दुर-दुर नारद एहन बर लयलौं कोना

घर-द्वार नहि छनि केयो नहि संगमे
आँक-धथूर-गाँजा, रूचि सदा भंगमे
सखि हे तनिका संग गौरी धीया रहती कोना
दुर-दुर नारद एहन बर लयलौं कोना

सुन्दर सुकुमारि गौरी छथि उमंगमे
सखि सहेली संग खेलैत छथि सुसंगमे
सखि हे तिनका एहन बर करबनि कोना
दुर-दुर नारद एहन बर लयलौं कोना

हम नहिं आजु रहब एहि आँगन लिरिक्स | Hum Nahi Aaju Rahab Yahi Aangan Lyrics

Ham Nahi Aaju Rahab Song Lyrics by Vidyapati

हम नहिं आजु रहब एहि आँगन
जौँ बुढ़ होएत जमाय
गे माई हम नहिं आजु रहब एहि आँगन
जौँ बुढ़ होएत जमाय

एक त बैरी भेल बिध विधाता, 
दोसर धिया केर बाप
एक त बैरी भेल बिध विधाता, 
दोसर धिया केर बाप
गे माई तेसर बैरी भेल नारद बाभन, 
जे बुढ़ आनला जमाय 
गे माई हम नहिं आजु रहब एहि आँगन
जौँ बुढ़ होएत जमाय

पहिलुक बाजन डमरू तोरब
दोसर तोरब रुंड माल
पहिलुक बाजन डमरू तोरब
दोसर तोरब रुंड माल
गे माई बरद हांकी बरियाती भगायब
धिया ल जायब पराय
गे माई हम नहिं आजु रहब एहि आँगन
जौँ बुढ़ होएत जमाय

धोती लोटा पोथी पतरा,
सेहो सब लेबैन छिनाय 
धोती लोटा पोथी पतरा,
सेहो सब लेबैन छिनाय 
जौँ किछु बजता नारद बाभन, 
दाढ़ी धय घिसीयाब 
गे माई हम नहिं आजु रहब एहि आँगन
जौँ बुढ़ होएत जमाय

भनहिं विद्यापति सुनू हे मनाइनि, 
दृढ़ करू अपन ज्ञयान
भनहिं विद्यापति सुनू हे मनाइनि, 
दृढ़ करू अपन ज्ञयान
गे माई शुभ शुभ कय गौरीके बियाहू
गौरी हर एक समान
गे माई हम नहिं आजु रहब एहि आँगन
जौँ बुढ़ होएत जमाय



हम नहिं आजु रहब एहि आँगन - संस्करण 2

हम नहिं आजु रहब एहि आँगन
जौँ बुढ़ होएत जमाय

एक त बैरी भेल बिध विधाता, 
दोसर धिया केर बाप
तेसर बैरी भेल नारद ब्रह्मण, 
जे बुढ़ आनला जमाय 

धोती लोटा पोथी पतरा,
सेहो सब देवनी छिनाय 
जौँ किछु बजता नारद ब्रह्मण, 
दाढ़ी धय घिसीयाब 

अरिपन निपलन्ही पुरहर फोरलन्ही, 
फेकलन्ही बहुमुख दीप 
धिया लय मनाइनि मंदिर पैसली, 
केयो जुनि गायब गीत 

भनहिं विद्यापति - सुनू हे मनाइनि, 
इहो थिका त्रिभुवन नाथ 
शुभ शुभ कय गौरी विवाह, 
इहो वर लिखल ललाट 


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गुरुवार, 17 नवंबर 2022

बड़ सुखसार पाओल तुअ तीरे लिरिक्स | Bar Sukh Saar Paol Tua Teere Lyrics

Bad Sukh Saar Paawal Toye Tire Song Lyrics by Vidyapati

बड़ सुखसार पाओल तुअ तीरे - 2
छाड़इते निकट नयन बह नीरे 
बड़ सुखसार पाओल तुअ तीरे

कर जोड़ि बिनमञो विमलतरङ्गे,
पुन दरसन होअ पुनिमति गङ्गे
कर जोड़ि बिनमञो विमलतरङ्गे,
पुन दरसन होअ पुनिमति गङ्गे, पुनिमति गङ्गे 
बड़ सुखसार पाओल तुअ तीरे

एक अपराध छेँमब मोर जानी,
परसल माए पाए तुअ पानी
एक अपराध छेँमब मोर जानी,
परसल माए पाए तुअ पानी, पाए तुअ पानी 
बड़ सुखसार पाओल तुअ तीरे

कि करब जप तप जोग धेआने,
जनम सुफल भेल एकहि सनाने 
कि करब जप तप जोग धेआने,
जनम कृतार्थ एकहि सनाने, एकहि सनाने
बड़ सुखसार पाओल तुअ तीरे

भनइ विद्यापति समन्दञो तोही,
अंत काल जनु बिसरह मोही
भनइ विद्यापति समन्दञो तोही,
अंत काल जनु बिसरह मोही, बिसरह मोही
बड़ सुखसार पाओल तुअ तीरे...।


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नदिया के तीरे-तीरे फलां भइया खेलथि शिकार - सामा चकेवा लोकगीत

Nadiya Ke Tire Tire Phala Bhaiya 

नदिया के तीरे-तीरे फलां भइया खेलथि शिकार
गे माइ जा कए कहियनु फलां बहिनो हे
आजु भइया औता मेहमान
गे माइ नहि मोरा कोठी अरबा चाउर
पनबसना नहि गूआ-पान
गे माइ कौने विधि राखब भइयाक मान
गे माइ अछि मोरा कोठी अरबा चाउर
तमोलिन मंगाएब गुआ-पान
आगे माइ ताहि विधि राखब भइयाक मान
गाइक गोबर आंगन निपाएब
मधुर राखब मंगाइ
गे माइ ताहि विधि राखब भइयाक मान

शनिवार, 12 नवंबर 2022

बिना सुइद के कर्जा, तोहर गे माय लिरिक्स - Bina Suid Ke Karja Tohar Ge Mai Lyrics

बिना सुइद के कर्जा,
बिना सुइद के कर्जा, तोहर गे माय,
ने सधेलक कियौ ने सधा सकै यै,
ने सधेलक कियौ ने सधा सकै यै,
बिना सुइद के कर्जा, तोहर गे मै,
ने सधेलक कियौ ने सधा सकै यै,
ने सधेलक कियौ ने सधा सकै यै…

जखने हम जन्म लेलौं ममता तोहर भारी,
गूंह मूत स हरदम भीजल तोहर साड़ी,
जखने हम जन्म लेलौं ममता तोहर भारी,
गूंह मूत स हरदम भीजल तोहर साड़ी,
नै छौ असरधा तोरा कनिको गे,
नै छौ असरधा तोरा कनिको,
के तोरा बिना ममता लुटा सकै यै,
ने सधेलक कियौ ने सधा सकै यै,
ने सधेलक कियौ ने सधा सकै यै…

हम कानी त तू कोरा में घुमाबे,
तइयो ने चुप होई त पलथा पर झुलाबे,
हम कानी त तू कोरा में घुमाबे,
तइयो ने चुप होई त पलथा पर झुलाबे,
चंदा मामा के खिस्सा सुना क गे,
चंदा मामा के फकरा सुना क,
के तोरा बिन हमरा सुता सकै यै,
चंदा मामा के खिस्सा सुना क,
के तोरा बिन हमरा सुता सकै यै,
ने सधेलक कियौ ने सधा सकै यै,
ने सधेलक कियौ ने सधा सकै यै…

हम रही भूखल बढ़ाक बाती जोगोलें,
खिस्सा पिहानी स हमरा भूलौलें,
हम रही भूखल बढ़ाक बाती जोगोलें,
खिस्सा पिहानी स हमरा भूलौलें,
कौआ मैना के फकरा सुना क गे,
कौआ मैना के बखरा लगा क,
के तोरा बिना हमरा खुआ सकै यै,
ने सधेलक कियौ ने सधा सकै यै,
ने सधेलक कियौ ने सधा सकै यै,
बिना सुइद के कर्जा, तोहर गे मै,
बिना सुइद के कर्जा, तोहर गे माय,
ने सधेलक कियौ ने सधा सकै यै,
ने सधेलक कियौ ने सधा सकै यै,
ने सधेलक कियौ ने सधा सकै यै...

गीतकार: पवन नारायण झा
स्वर: अरविंद सिंह

कथी केर घोड़बा कथी केर लगमुआ लिरिक्स - सामा चकेवा लोकगीत Kathi Ker Ghoraba Kathi Ker Lagamuaa

Kathi Ker Ghoraba Kathi Ker Lagamuaa

कथी केर घोड़बा कथी केर लगमुआ
कथीए चढ़ि हमरो भइया जयता ससुररिया

सोना केर घोड़बा, रूपे केर लगमुआं
ताहि चढ़ि हे हमरो भइया जयता ससुररिया

माटी केर हे घोड़बा, जउड़े लगमुआं
ताहि चढ़ि हे चुगिया भरूआ जेता घासचरिया

नन्दनक नन्दन कदम्बक लिरिक्स - Nandak Nandan Kadambak Lyrics

नन्दनक नन्दन कदम्बक तरु तर, 
धिरे-धिरे मुरलि बजाब।
समय संकेत निकेतन बइसल, 
बेरि-बेरि बोलि पठाव।।
साभरि, तोहरा लागि अनुखन विकल मुरारि।
जमुनाक तिर उपवन उदवेगल, 
फिरि फिरि ततहि निहारि।।
गोरस बेचरा अबइत जाइत, 
जनि-जनि पुछ बनमारि।
तोंहे मतिमान, सुमति मधुसूदन, 
वचन सुनह किछु मोरा।
भनइ विद्यापति सुन बरजौवति, 
बन्दह नन्द किसोरा।।

शुक्रवार, 11 नवंबर 2022

डाला लऽ बहार भेली बहिनो से मुन्नी बहिनो - सामा चकेवा लोकगीत

डाला लऽ बहार भेली बहिनो से मुन्नी बहिनो
अप्पु भैया लेल डाला छीन
सुनू राम सजनी
दुरबा बैसल अहाँ बाबा हे बरइता
अहाँक बेटा लेल डाला छीन
सुनू राम सजनी
कथीये के आहे बेटी डाला तोहर छल
कथिये सजाओल चारू कोर
सुनु राम सजनी
कांचहि बाँस केर डाला हे बाबा हमर
फुलबा सजाओल चारू कोर
सुनु राम सजनी
दय दही आरे बेटा बहिनिक डाला
सामा खेलऽ जायत बड़ी दूर
सुनू राम सजनी
जँ तोहेँ आहे दिदिया डाला दय देब
हमरा के की देब दान
सुनू राम सजनी
घोड़बा चढ़न देब, पोथी पढ़न देब
छोटकी ननदि करब दान
सुनू राम सजनी

जय जय भोलेनाथ दिगम्बर लिरिक्स - Jay Jay Bholenath Digambar Lyrics

जय जय भोलेनाथ दिगम्बर, शंकर-शंभु हरे। 
हर हर महादेव भोले, बम बम जय शिव-शंभु हरे॥

शूलपाणि डमरूधर शंकर, बाघम्बर पहिरे। 
जय गौरीवर, शंभु जटाधर, भक्तक विपत्ति हरे॥

अर्धचन्द्र माथक ऊपर हर! जगतक कष्ट हरे। 
सत-रज-तमक त्रिनेत्र त्रिशूली, बसहा बैल चढ़े॥

विश्वनाथ विश्वेस, विश्वम्भर विभव विवेक धरे।
वैद्यनाथ विश्वास प्रदायक भवभयनाश करे॥

सोमनाथ सोमेश्वर, शंकर त्रिपुरेश्वर भोले।
जय केदार कार्त्तिक-गणेशजीक पिता उमावर हे॥

पशुपतिनाथ पिता संसारक, पावन लोक करे। 
जय रामेश्वर जगतक ईश्वर, अतुलित ज्ञान धरे॥

गंगाधर, गणनाथ, वासुकी शशिधर हर भोले।
जय हे विद्यापतिक ईष्ट श्रीउग्रनाथ भोले ॥

आशुतोष गुरुदेव त्रिलोकी, कपिलेश्वर भोले। 
हैंठी-बालिक, गौरी-शंकर अनुपम रूप धरे॥

विदित विदेश्वर, श्रीसिंघेश्वर, कुसिक कुशेश्वर जे। 
भेला त्रिकोणसिद्ध पीठेश्वर, शाक्त्येश्वर भोले॥

रहुआ साधक लक्ष्मीनाथक पारसमणि भोले। 
कथवारक मंगलेश 'प्रदीपित' त्रिशूलेश्वर भोले॥

सभकेँ हो कल्याण सतत, सभ भक्तक विपत्ति हरे।
हर हर महादेव भोले, बम बम जय शिव-शंभु हरे ॥
                                        
गीतकार: मैथिली पुत्र प्रदीप (प्रभुनारायण झा)

बुधवार, 9 नवंबर 2022

गिरिजा पूजैत सिया फड़कय बामा नयना लिरिक्स - गौरी पूजा गीत

Girija Pujait Siya Pharakay Bama Nayan 

गिरिजा पूजैत सिया फड़कय बामा नयना
हे शुभ अंगक फरकब
सखि हे राति देखल हम सपना
हे शुभ अंगक फरकब
गोर छबीले श्यामल सलोने
प्रीतम जनकजी के अंगना
हे शुभ अंगक फरकब
गोरे कुबंर मोर देओर हयता
प्रीततम श्यामल सलोना
हे शुभ अंगक फरकब
ई सुनि हँसि जनक जी सँ कहलनि
जिनकर नाम सुनयना
हे शुभ अंगक फरकब
तुलसीदास कहे सीता बड़ भागिनि
पाओल वर श्याम सलोना
हे शुभ अंगक फरकब
गिरिजा पूजैत सिया के
फरकय बामा नयना
हे शुभ अंगक फरकब

सोमवार, 7 नवंबर 2022

चुगला बर अकान छै लिरिक्स - Chugla Lyrics, Sharda Sinha Sama Chakeva Geet

Chugla Bar Akan Chhai Lyrics

चुगला बर अकान छै
भैया बर विद्वान छै
चुगला मुंह मे चून तमाकुल
भैया मुंह मे पान छै

चुगला घर मे जरल जराठी
सौँसे घर मरुआ के काठी
चुगला घर मे जरल जराठी
सौँसे घर मरुआ के काठी
भैया घर मे भरल घरारी
भौजी चले उतना छै
चुगला बर अकान छै
चुगला बर अकान छै

वृंदावन में आगि जे लागय
हमर भैया दौर दौर मिझाबे
वृंदावन में आगि जे लागय
हमर भैया दौर दौर मिझाबे
भैया हाथे सोनक लाठी
बहिनक खोंईछा धान छै
चुगला बर अकान छै
चुगला बर अकान छै



रविवार, 6 नवंबर 2022

Sama Chakeva Lokgeet Lyrics - मैथिली सामा चकेवा गीत लिरिक्स

Sama Chakeba Lokgeet Lyrics Maithili Me, सामा चकेबा गीत लिखा हुआ














      शारदा सिन्हा 

      शारदा सिन्हा

       शारदा सिन्हा





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बुधवार, 2 नवंबर 2022

आजु नाथ एक व्रत महा सुख लागल हे लिरिक्स | Aajoo Naath Ek Brat Lyrics

Aajoo Naath Ek Brat Song Lyrics by Vidyapati

सा नि सा रे सा नि सा रे सा ध नि प म प  ध नि रे सा
मपध धनि प मपसारे निसारे धनि प मप मगमरे सा गा
सा नि सा रे सा नि सा रे सा ध नि प म प  ध नि रे सा

आजु नाथ एक व्रत महा सुख - 3
लागत हे 
तोहें सिव धरु नट वेष कि 
डमरू बजाबहे
आजु नाथ एक व्रत महा सुख - 2
लागत हे 
तोहें सिव धरु नट वेष कि 
डमरू बजाबहे
आजु नाथ एक व्रत महा सुख - 2
लागत हे 

तोहें गोरी कहे छनाछब हम कोना नाचब हे...
चारि सोच मोहि होय कौन विधि बांचव हे...
अमि अचुमिय भूमि खसत बघम्बर जानत हे...
होत बघम्बर बाघ बसहा धरि खायत हे...
आजु नाथ एक व्रत महा सुख - 2
लागत हे 
तोहें सिव धरु नट वेष कि 
डमरू बजाबहे
आजु नाथ एक व्रत महा सुख लागत हे 

सिरसँ ससरत साँप भूमि लोटायत हे...
कार्तिक पोसल मजूर सेहो धरि खायत हे...
जटा सं छिलकत गंग भूमि पर पाटत हे...
होय तो सहस्त्र मुखी धार समेटलो ने जायत हे...
आजु नाथ एक व्रत महा सुख - 2
लागत हे 
तोहें सिव धरु नट वेष कि 
डमरू बजाबहे
आजु नाथ एक व्रत महा सुख लागत हे 

मुंडमाल टूटी खसत मसानी जानत हे...
तोहें गौरी जैबा पराय नाचके देखत हे...
भनहि विद्यापति गाओल गावि सुनाओल हे...
राखल गौरी के मान चारू उपजाओल हे...
आजु नाथ एक व्रत महा सुख - 2,
लागत हे 
तोहें सिव धरु नट वेष कि 
डमरू बजाबहे
आजु नाथ एक व्रत महा सुख - 2
लागत हे 


मंगलवार, 1 नवंबर 2022

Dev Uthani Ekadashi 2025 - देव उठाओन एकादशी 2025 मुहूर्त, पूजा विधि आ कथा

2025 Mein Dev Uthani Ekadashi

मिथिला धरोहर, प्रभाकर मिश्रा : कातिक शुक्ल पक्ष के एकादशी जे दीयाबाति के बाद आबय अछि ओहिके देवोत्थान एकादशी Dev Uthani Ekadashi (देब उठाओन Dev Uthaun ) या देव प्रबोधिनी एकादशी कहल जाइत अछि। भाद्रपद के एकादशी के भगवान विष्णु क्षीर सागर मे शयन करवाक लेल चैल जाइत छथि और चाईर मास उपरांत कातिक मासक शुक्ल पक्ष'क एकादशी के दिन निद्रा सं जागय छथि। ताहि लेल एहि दिन के देवोत्थान या देव उठाओन एकादशी के नाम सं जानल जाइत अछि। 

पूजाक विधि
एहि दिन प्रात: काल स्नान आदि सं निवृत्त भ के भगवान् नारायण के ध्यान राखैत व्रत के संकल्प लिअ। ताहि उपरांत विष्णु सहस्रनाम के पाठ करु और घंटावादन आदि करैत एहि मंत्र सं भगवान् नारायण के जगाबु :-

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भगवान् के जगेबाक बाद हुनक पूजन अर्चना और आरती करु। मान्यता अछि जे एहि दिन व्रत रखला सं बड़का सं बड़का पाप सेहो नष्ट भ जाइत अछि। एहि दिन दान के विशेष महत्व अछि ताहि लेल अपन सामर्थ्य'क अनुसार दान अवश्य करवाक चाहि।

  • देवउठनी एकादशी व्रत 2025 :
साल 2025 मे देव उठनी एकादशी शुक्रवार, 1 नवंबर, 2025 के अछि।
  • देवउठनी एकादशी पारणा मुहूर्त : 


देवोत्थान एकादशी के कथा
एक समय भगवान नारायण सं लक्ष्मी जी  कहलखिन - 'हे नाथ! आब अहाँ दिन-राईत जागल करय छिं और फेर लाखों-करोड़ों बरख धरि लेल सुईत जाय छिं आ ओहि समय समस्त चराचर के नाश सेहो क दय छिं। अत: अहाँ नियम सं प्रतिवर्ष निद्रा लेल करु। एहि सं हमरा सेहो किछ समय विश्राम करवाक समय भेट जायत।' लक्ष्मी जी के गप्प सुनि के नारायण मुस्कुरेला और बजला- 'देवी'! अहाँ उचित कहलु। हमरा जागला सं सब देवता के खास क अहाँ के कष्ट होइत अछि। अहाँके हमरा सेवा सं कनिको अवकाश नय भेटय अछि। ताहिलेल, अहाँ के कथनानुसार आय सं हम प्रति वर्ष चाईर मास शुतल करव। ओहि समय अहाँके और देवगण के अवकाश रहत। हमर इ निद्रा अल्पनिद्रा कहल जायत। इ हमर अल्पनिद्रा हमर भक्त के परम मंगलकारी उत्सवप्रद तथा पुण्यवर्धक होयत। एहि काल मे हमर जे भक्त हमर शयन के भावना क हमर सेवा करत आ शयन और उत्पादन'क उत्सव आनन्दपूर्वक आयोजित करत हुँनक घर मे अहाँ संगे सहित निवास करब।

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मिथिलांचल मे साँझ के भगवती के घर करबाक पारम्परिक विध सेहो होइत अछि। अरबा चाउर'क पिठार सं तुलसी चौड़ा लग सं गोसाउनक चिनुआर धरि भगवान के पैरक छाप'क अरिपन देल जाइत अछि आ ओहि ऊपर सिनुर लागयल जाइत अछि आ अछिञ्जल भरल लोटा सं भगवती के घर करबाक विध पूरा कयल जाइत अछि।