बुधवार, 30 दिसंबर 2020

प्राती गीत लिरिक्स : पारंपरिक मैथिली गीत - Maithili Parati Geet Lyrics

उठि भोरे कहू गंगा गंगा, उठि भोरे कहू गंगा गंगा
उठि भोरे कहू गंगा गंगा, उठि भोरे कहू गंगा गंगा

छल एल पापी महाबली, जाय मगह मरि गेल।
ओकरा तन के कौआ कुकुर ने खाय, गीद्घ, गीदर देखि डराय।।
उठि भोरे कहू गंगा गंगा, उठि भोरे कहू गंगा गंगा

गलि गेल मांस हाड़ भेल बाहर, रोम रोम भेल विकलाई।
कणिका एक उडि़ पद पंकज, सुर विमान लाय धाई।।
देखू गंगा जी क महिमा जे, ओ कोना तरि जाई।।

उठि भोरे कहू गंगा गंगा, उठि भोरे कहू गंगा गंगा
उठि भोरे कहू गंगा गंगा, उठि भोरे कहू गंगा गंगा

पंक्षी एक उड़ला गंगा में, ऊपर पांखि फहराई।
उठि भोरे कहू गंगा गंगा, उठि भोरे कहू गंगा गंगा
गेल बैकुण्ठ मुदित मन देखू, आरती सुर उतराई। 
भोलाजी गंगाक महिमा, कहइत अधिक लजाई।।

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मंगलवार, 22 दिसंबर 2020

प्रेमलता मिश्र 'प्रेम' - मैथिली रंगमंच के एकटा वयोवृद्ध कलाकार आ माईक आकृति

मैथिली रंगमंचक पहिल महिल रंगकर्मी प्रेमलता मिश्र 'प्रेम' (Premlata Mishra 'Prem') के बियाह मात्र 12 सालक उमैर भ गेल छलनी। हिनकर नैहर रहिका छनि आ सीतामढी जिलाके अन्तर्गत धाधी-सिरसी हिनक सासुर। अपन पढाई लिखाई गामें केर स्कूल में क के मैट्रिक फ़स्ट डिवीजन सं पास केलनि। प्रेमलता मिश्र के पति रहिका के एकटा स्कूल में शिक्षक के पद पर कार्य करैत छलैथ। 

कक्का अर्थात यात्री जी (नागार्जुन) के कहय पर पटना आबि गेलथि । प्रेमलता जी आकाशवाणी लेल सेहो काज केलथि। 1964-65 में रंगकर्मीके सम्पर्क में अबितेहि चेतना समिति आदि बहुत रासे नाट्य संस्था सं जुड़ि गेलथि। तकर उपरांत हिनक रंगयात्रा चलिते रहलनि। हिनक प्रारंभिक  रंगमंचीय जीनगी में 'टुटैत लोक', 'लेटायत आंचर' आदि में हिनक अभिनय के बड्ड प्रशंसा भेटलनी।

1981 में मैथिलीक पहिल फ़िल्म “ ममता गाबय गीत” में विधवा भाऊजक भूमिका केलथि। प्रेमलता जी 'दामूल', 'कन्यादान' फिल्म में काज केलाक उपरांत भोजपुरी में पहिल फिल्म 'दूल्हा गंगा पार के' आ फेर भोजपुरी फिल्म 'बबुआ हमार' मे काज केलथि। फ़ेर चर्चित मैथिली फ़िल्म ' ससता जिनगी महग सेनूर ' में काज केलथी। डीडी पटनाके लेल प्रमोद चौधरी द्वारा निर्मित धारावाहिक 'पर्व भरा मिथिला’, शिव पूजन सहाय केर 'देहाती दुनिया’, सुनील कुमार (रायपुर, सीतामढी) के भोजपुरी फ़िल्म 'माटी' में अभिनय केने छथि। राजकमल चौधरी के उपन्यास पर आधारित श्रीकान्त मंडल जी द्वारा निर्देशित मैथिली फ़िल्म 'ललका पाग' के लेल पहिल बेर कॉन्ट्रैक्ट साइन केने छलथि। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित मैथिली फिल्म ' मिथिला मखान' में क्रांति प्रकाश झा हिरोक माईक भूमिका केने छथि।

अभिनयक संग प्रेमलता जी सुपरिचित साहित्यकार सेहो छथि। हिनकर रचना विभिन्न पत्र पत्रिका सभमें प्रकाशित भेल छनि। हिनक कथा संग्रह - 'एगो छली सिनेह',  हिनक संस्मरण 'वो दिन वो पल' आ कथा - संग्रह 'शेखर प्रसंग'

महिला रंगकर्मीक रुपें प्रेमलता जी बहुत रास संस्था सबसं जुड़ली जेना - भंगिमा, अरिपन, चेतना समिति, मैथिली महिला संघ आदि। प्रेमलता मिश्र के साहित्य, कला, संस्कृति, अभिनय लेल बहुत रास सम्मान भेटल छनि। पटनाक चेतना समित,  दिल्लीक अखिल भारतीय संस्थान, कोलकाताक मिथिला सांस्कृतिक परिषद, दरभंगा विद्यापति सेवा संस्थान, दिल्लीक नाट्य संस्था  मैलोरंग द्वारा (ज्योतिरीश्वर सम्मान) आ भामती स्त्री सम्मान (2018) सं सम्मानित कयल गेल छनि। मैथिली संस्थाक तुलनामें हिनका हिन्दी संस्था सं बेसी सम्मान भेटल छनि जेना - नूर फ़ातिमा सम्मान, पाटलिपुत्र अवार्ड, मिथिला विभूति दू दू बेर कोलकाता द्वारा , रहिका द्वारा सम्मान आदि।

सोमवार, 14 दिसंबर 2020

पत्रहीन नग्न गाछ कविता संग्रह - श्री वैद्यनाथ मिश्र 'यात्री' - Patarheen Nagna Gachh


रचनाकार : वैद्यनाथ मिश्र 'यात्री' »
पुस्तक : पत्रहीन नग्न गाछ (1992)
विधा : कविताएं और गीत



भोर भोर       











































★ गीत ★








रविवार, 13 दिसंबर 2020

Dukhhar Baghwati Sthan | सब दु:ख हरै छथि डोकहर के राज राजेश्वरी भगवती

 

मधुबनी जिला मुख्यालय सं 12 किलोमीटर उत्तर खजौली प्रखंड के बेलही गाँव में अवस्थित अछि राजराजेश्वरी स्थान ( Raj Rajeshwari Mandir Dokhar )। अहि निर्जन स्थल मे राजेश्वरी पार्वती भोलेनाथ केर प्रतिमा युगल रूप मे अवस्थित अछि। दु:ख हरनिहार के रुप मे प्रसिद्धि के कारण लोग अहि स्थान के डोकहर सेहो कहै अछि। मंदिर के पश्चिमोत्तर भाग मे प्राकृतिक बिंदुसर नामक सरोवर अछि। जाहिमे लालका कमल फूल खिलल रहैत अछि। आदिशक्ति मातृ देवी पार्वती सदाशिव भोले नाथ केर संग भक्त पर आशीष के वर्षा करैत छथि। एहन विश्वास अछि जे एतय सं खाली हाथ कियो नै लौटैत अछि।
मंदिर तिरहुत नागर शैली के अछि जे दरभंगा के महाराज महेश्वर सिंह (1850-60) द्वारा निर्मित कहल जाइत अछि। जेकरा पूर्व मे राजा राघव सिंह के बबुआन भाई नंद नंदन सिंह 1725 के आसपास बनौने छलैथ। मंदिर परिसर मे गौरी कुंड अछि। राज राजेश्वरी एतय परब्रह्म के महाशक्ति के रुप मे प्रागैतिहासिक काल सं पूजित छथि। आदि काल सं मिथिला भूमि मे पार्वती पूजन के परंपरा रहल अछि। अहि शक्तिपीठ के प्राचीनता के संगे संग वर्तमान गौरीशंकर के युगलमूर्ति सेहो प्राचीन अछि।
कहल जाइत अछि जे बुद्ध काल मे ब्राह्मण धर्म'क विरोध भेला पर देव विग्रह के बचेबाक लेल निकट के चंद्रभागा नदी मे द देल गेल हैत। जाहि के बाद मे संक्रमण काल के समाप्त भेला पर पुन: मंदिर बना क स्थापित क देल गेल। अहि शक्तिपीठ के मैथिली सीता आ विदेह जनक द्वारा पूजित हेबाक बात कहल जाइत अछि। 

शनिवार, 12 दिसंबर 2020

अपन दू बात कहै छी पता के साथ लिखै छी लिरिक्स

अपन दू बात कहै छी पता के साथ लिखै छी
चिट्ठी पढ़िकऽ देब जवाब अहाँके पैर पड़ै छी।
हे ! जगमग भेल रहै मन-आंगन
छल जे प्रेेमदीप जरि गेल
बिछाहक बड़का अछि परिताप
सियाही मात्र संग रहि गेल
अहाँ बिनु दुनिया अछि अनहार कोनाने मोन पड़ै छी।
हे! सबतरि छै उछाह आनन्दक
हमर भवन भंख पड़ि गेल
देखी अहींक सब दिन सपना
नैनक चैन पिया हिर लेल
फूकू आबि पिरीतक शंख से मानेक बात कहै छी।
हे ! भमरा गुन-गुन करिते गान
नचैये कली कुमारी संग
रहब जीवन भरि संगहि संग
यादि करियौ कोहबरक प्रसंग
कोना आखरमे लीखि पठाउ कोना दिन-राति कटै छी।
अपन दू बात.....

गुरुवार, 10 दिसंबर 2020

वैद्यनाथ मिश्र यात्री ( नागार्जुन ) - Vaidyanath Mishra Nagarjun

स्व. श्री वैद्यनाथ मिश्र “यात्री” केर जन्म १९११ ई. मे अपन मामागाम सतलखामे भेलन्हि, जे हुनकर गाम तरौनीक समीपहिमे अछि। यात्री जी अपन गामक संस्कृत पाठशालामे पढ़ए लगलाह, फेर ओऽ पढ़बाक लेल वाराणसी आऽ कलकत्ता सेहो गेलाह आऽ संस्कृतमे “साहित्य आचार्य” केर उपाधि प्राप्त कएलन्हि। तकर बाद ओऽ कोलम्बो लग कलनिआ स्थान गेलाह पाली आऽ बुद्ध धर्मक अध्ययनक लेल। ओतए ओऽ बुद्धधर्ममे दीक्षित भए गेलाह आऽ हुनकर नाम पड़लन्हि नागार्जुन। 

यात्रीजी मार्क्सवादसँ प्रभावित छलाह। १९२९ ई. क अन्तिम मासमे मैथिली भाषामे पद्य लिखब शुरू कएलन्हि यात्री जी। १९३५ ई.सँ हिन्दीमे सेहो लिखए लगलाह। स्वामी सहजानन्द सरस्वती आऽ राहुल सांकृत्यायनक संग ओऽ किसान आन्दोलनमे संलग्न रहलाह आऽ १९३९ सँ १९४१ धरि एहि क्रममे विभिन्न जेलक यात्रा कएलन्हि। हुनकर बहुत रास रचना जे महात्मा गाँधीक मृत्युक बाद लिखल गेल छल, प्रतिबन्धित कए देल गेल।


भारत-चीन युद्धमे कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा चीनकेँ देल समर्थनक बाद यात्रीजीक मतभेद कम्युनिस्ट पार्टीसँ भए गेलन्हि। जे.पी. अन्न्दोलनमे भाग लेबाक कारण आपात्कालमे हिनका जेलमे ठूसि देल गेल। यात्रीजी हिन्दीमे बाल साहित्य सेहो लिखलन्हि। हिन्दी आऽ मैथिलीक अतिरिक्त बांग्ला आऽ संस्कृतमे सेहो हिनकर लेखन आएल। 

प्रगतिशील चेतना के मूर्धन्य कवि, नागार्जुन अपन धारदार राजनीतिक चेतना के लेल सेहो जानल जाइत छलैथ। मैथिल काव्य-संग्रह ‘पत्रहीन नग्न गाद्य’ के लेल दोसर साहित्य अकादमी पुरस्कार १९६९ ई.  भेटलन्हि। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान सेहो हिनका पुरस्कृत केलैथ। ‘रतिनाथ की चाची’, ‘बाबा बटेसरनाथ’, ‘दुखमोचन’, ‘बलचनामा’, ‘वरुण के बेटे’ और ‘नयी पौध’ हिनकर प्रमुख उपन्यास छनि त ‘युगधारा’, ‘सतरंगे पंखों वाली’, ‘प्यारी पथराई आंखें’, ‘तालाब की मछलियां’, ‘चन्दना’, ‘खिचड़ी विप्लव देखा हमने’, ‘तुमने कहा था’, ‘पुरानी जूतियों का कोरस’ आ ‘हजार-हजार बांहों वाली’ आपके काल के भाल पर दर्ज काव्य-संग्रह अछि त ‘भस्मांकुर’ नाम सं हिनकर एकटा खंडकाव्य सेहो उपलब्ध अछि। १९९४ ई.मे हिनका साहित्य अकादमीक फेलो नियुक्त कएल गेलनी। 

यात्रीजी जखन २० वर्षक छलाह तखन १२ वर्षक कान्यासँ हिनकर विवाह भेलनी। हिनकर पिता गोकुल मिश्र अपन समाजमे अशिक्षितक गिनतीमे छलाह, मुदा चरित्रहीन छलाह। यात्रीजीक बच्चाक स्मृति छन्हि, जे हुनकर पिता कोना हुनकर अस्वस्थ आऽ ओछाओन धेने मायपर कुरहड़ि लए मारबाक लेल उठल छलाह, जखन ओऽ बेचारी हुनकासँ अपन चरित्रहीनता छोड़बाक गुहारि कए रहल छलीह। यात्रीजी मात्र छ वर्षक छलाह जखन हुनकर माए हुनका छोड़ि प्रयाण कए गेलीह। यात्रीजीकेँ अपन पिताक ओऽ चित्र सेहो रहि-रहि सतबैत रहलन्हि जाहिमे हुनकासँ मातृवत प्रेम करएबाली हुनकर विधवा काकीक, हुनकर पिताक अवैध सन्तानक गर्भपातमे, लगभग मृत्यु भए गेल छलन्हि। के एहन पाठक होएत जे यात्रीजीक हिन्दीमे लिखल “रतिनाथ की चाची” पढ़बाक काल बेर-बेर नहि कानल होएताह। पिता-पुत्रक ई घमासान एहन बढ़ल जे पुत्र अपन बाल-पत्नीकेँ पिता लग छोड़ि वाराणसी प्रयाण कए गेलाह।

डॉ. नामवर सिंह ने ‘नागार्जुन प्रतिनिधि कविताएं’ शीर्षक सं एकटा चयन संपादित केने छथि जाहिमे 79 हिन्दी के आ 12 मैथिली के कविता संकलित अछि।

‘मन्त्र कविता’ एकटा अद‍्भुत कलात्मक प्रयोग अछि जे सन‍् 1969 के मन:स्थिति के दस्तावेज बनी सामने आयल अछि। ‘भुस का पुतला’, ‘प्रेत का बयान’, ‘बाकी बच गया अण्डा’, ‘अकाल आ ओकरा  बाद’, ‘कर दो वमन’ और ‘डियर तोताराम’ नागार्जुन के किछ एहन विशिष्ट कविता अछि जे जहिके प्रासंगिकता आयो जस के तस अछि।

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