बुधवार, 31 मई 2023

आजु धनवा कुटाऊ चारु वरवा से लिरिक्स | Aaju Dhanwa Kutau Lyrics

Aaju Dhanwa Kutau Charu Varwa Se Song Lyrics by Sharda Sinha 

आजु धनवा कुटाऊ चारु वरवा से
आजु धनवा कुटाऊ चारु वरवा से
चारू वरवा से, चारू वरवा से
बनी-ठनी वर एला अवधवा से
आजु धनवा कुटाऊ चारु वरवा से

जे रघुकुल के वीर कहावथि,
जे रघुकुल के वीर कहावथि,
बांधु सखी कांचे डोरवा से
सखी हे, बांधु सखी कांचे डोरवा से
आजु धनवा कुटाऊ चारु वरवा से

ई बहिया के नृप कुल बालक,
ई बहिया के नृप कुल बालक,
बुझब ओखली मुसरवा से,
सखी हे, बुझब ओखली मुसरवा से,
आजु धनवा कुटाऊ चारु वरवा से

घूमी घूमी कुटथिन धान ललन सब
घूमी घूमी कुटथिन धान ललन सब
बिबस भेल व्यवहारवा से
सखी हे, बिबस भेल व्यवहारवा से
आजु धनवा कुटाऊ चारु वरवा से
आजु धनवा कुटाऊ चारु वरवा से

गुरुवार, 25 मई 2023

डिम डिम डमरु बजबै छै गौरि के जोगिया लिरिक्स - Dim Dim Damru Bajabai Gauri Ke Jogiya

गौरी के जोगिया हे, उमाके जोगिया
डिम डिम डमरु बजबै छै गौरि के जोगिया 

कोठा ओ सोफा शिवके मनहुँ नै भावे -2
टुटली मरैया ला बेहाल जोगिया
डिम डिम डमरु बजबै छै गौरि के जोगिया 

पुरी जिलेबी शिवके मनहुँ नै भावे -2
भाँग धतुर ला बेहाल जोगिया
डिम डिम डमरु बजबै छै गौरि के जोगिया 

पिरे पिताम्बर शिवके मनहुँ नै भावे -2
मृगके छाला ला बेहाल जोगिया
डिम डिम डमरु बजबै छै गौरि के जोगिया 

साला दोसाला शिवके मनहुँ नै भावे -2
बाघके छाला ला बेहाल जोगिया
डिम डिम डमरु बजबै छै गौरि के जोगिया 

घोड़ा आ गाड़ी शिवके मनहुँ नै भावे -2
बसहा बयल ला बेहाल जोगिया
डिम डिम डमरु बजबै छै गौरि के जोगिया 
गौरी के जोगिया हे, उमाके जोगिया 

मिथिला पंचांग 2023-24 PDF Download - Maithili Panchang PDF 2023-2024

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बुधवार, 24 मई 2023

मिथिला के प्रसिद्ध साहित्यकार, मैथिली कवि के नाम | Maithili Famous Writers List

मंगलवार, 23 मई 2023

कविवर सीताराम झा - Kavi Sitaram Jha

कवि सीताराम झा के जीवन परिचय - मिथिला के प्रसिद्ध कवि कविवर सीताराम झा जी के जन्म 16 जनवरी 1891 के दरभंगा जिलाक अंतर्गत बेनीपुर अनुमंडल के अपन पैतृक गाम चौगमा में भेल छल। पिताक नाम बछरन झा आ माँक नाम जानकी देवी अछि।  दू सालक उम्र मे पिताक मृत्यु भ गेलनि तैं एहि कारणे बेसी समय नानी गाम में बितौलनी।

कविवर नेनपनहि सँ प्रतिभाशाली छलाह। एहि कारणे ज्ञान प्राप्ति मे प्रतिकूल परिस्थितिक सामना करैत सेहो हुनक उत्साह देखबा योग्य छल। मझौरा प्राथमिक विद्यालय सँ पास केलाक उपरांत आर्थिक संकट के कारण हुनकर पढ़ाई स्थगित भ गेल छलनी।

गाम मे ही छोट-छोट बच्चा के पढ़बैत छलाह।  संस्कृत मे हुनक रुचि शुरूए सँ छलनि। एहि के प्राथमिक शिक्षाक उपरांत पंडित कपिलेश्वर झाक संगति मे रहैत संस्कृत स्कूल सँ ज्योतिष मे प्रथम परीक्षा मे प्रथम श्रेणी मे उत्तीर्ण भेलाह ।

ताहि उपरांत कन्हौली गामक पंडित नंदन झा सँ  लोहना विद्यालय मे पढ़लनि आ ज्योतिषक माध्यम सँ प्रथम श्रेणी सँ उत्तीर्ण भेलाह। फेर नेहरा-निवासी उदित नारायण चौधरी के आर्थिक सहयोगक बल पर उच्च शिक्षा प्राप्त करबाक उद्देश्य सँ काशी गेलाह। जतय मैथिलीक साहित्यकार, पत्रकार आ ज्योतिषक प्रकांड विद्वान महामहोपाध्याय पंडित मुरलीधर झाक शिष्य बनि ज्योतिषक कठिन अभ्यास करय लगलाह।

कवि सीताराम झा केँ मैथिली रत्न, साहित्याचार्य धर्मविवेचक आ ज्योतिश रत्नाकर आदि उपाधि सँ सम्मानित कयल गेलनी। 15 जून 1975 ई० के हिनक निधन भेलनि।

कवि सीताराम झा के किछु प्रमुख कृतियाँ
अम्बचरित (महाकाव्य), सूक्ति सुधा, उनटा बसात, पढुआ चरित, उपदेशाक्षमाला, लोक लक्षण, मैथिली काव्योपवन, मैथिलीकाव्य षटरस, गीता तत्त्वसुधा, अलंकार दर्पण, भूकम्प वर्णन, काव्य-षट-रस आदि ।
छवि साभार : बाबूजीक पुस्तकालय 

कविवर सीताराम झा के रचना

● भाषण-पद्य
निज वाणी कँ छोड़ि रटै अछि जे परभाषा । 
कीर जकाँ से मानु करय परवश अभिलाषा ।। 
से थिक पशुक समान करय जे परक आस टा 
दूध बदला पाबि खुसी दुइ मुठी घास टा ।। 
पाबि मनुष्य देह रहब जा घाड़ खसौने । 
बनि कायर पुनि अपन पूर्वजक नाम हँसौने ।। 
तावत दुस्मन दशो दिशा सौं रहत दबौने । 
सुख स्वतन्त्रता हेतु रहब एहिना मुँह बौने ।। 
पायब किछु अधिकार कतहु की बिना झगड़ने ? 
अछि सलाइ आणि बरत की बिना रगड़ने ? 
बिसरय जे निज रूप तकर जग मे की सेखी ? 
कड़क डरै पड़ाय सिंह सरकस मे देखी ॥ 
जननि जानकी जन्मभूमि जन्माभिमान अछि । 
याज्ञबल्क्य ओ जनक भूपतिक खानदान अछि ।। 
के गुन गौरव ज्ञान मध्य मिथिला समान अछि । 
विद्या विभव विवेक बुद्धि बल विद्यमान अछि ।


 बल-गुन-रूप
बल-गुन-रूप अधिक हो जकरा
कन्यासौँ, कन्या दी तकरा
वर थिक वर यदि वयस सवैया
द्विगुन वयस सम, अधम अढैया
तहिसँ अधिक वयस वर त्यागी
नहि तँ दाता नरकक भागी
प्रथम वरक गुन वयस परीक्षा
तखन करक गुन वयस परीक्षा
तखन करक थिक अपर समीक्षा


● सदिखनी
केश छत्ता जकाँ, माथ हत्ता जकाँ,
आँखि खत्ता जकाँ, दाँत फारे बुझू
बोल रोडा जकाँ, चालि घोडा जकाँ
पेट मोडा जकाँ, वा बखारे बुझू
छूति ने लाजसँ, संग कै पाजसँ
नित्य सत्काजसँ तँ उधारे बुझू
राक्षसी ढंग टा सँ करय तंग टा
शंखिनी संग टा तँ संहारे बुझू


● उत्कर्ष
सम्प्रति पण्डितवृन्दक हो गणना,
जहि रूप गणेशक सम्मुख,
अंडिक तेलक दीपक टेम
यथा लघु होइछ गेसक सम्मुख,
तुच्छ यथा चमरी-मृग पुच्छक
बाल सुकामिनि-केशक सम्मुख,
स्वर्ग तथा अपवर्ग दुहू सुख
होइछ तुच्छ स्वदेशक सम्मुख।


● मैथिली
पढ़ि-लिखि जे नइ बजैछ हा निज मातृभाषा मैथिली, 
मन होइछ झिटुकी सं तकर हम कान दुनू ऐंठली।
एहना कपूतक जीह छाउर लेपि सटदै खँचि ली। 
पर खेद जे अधिकार ई हमरा नै देलन्हि मैथिली ।।


● डपोरशङ्ख
"साँझ कहै जे देब परात, 
प्रात-काल पुनि साँझक बात।
किछु नहि जकरा बातक ठीक,
असल डपोरशङ्ख से थीक।"


● दुष्ट
"आनक उन्नति सुनि सन्ताप, 
पर दुख देखि हर्ष मन व्याप्त।
बिनु अपराधहुँ सबपर रुष्ट,
साधुक अपकारक थिक दुष्ट।"


● कुण्डलिया
देशक गौरव जाहि सँ बढ़ए करी से काज,
उपयुक्ते बाजी जकर आदर करए समाज,
आदर करए समाज जकर से रीति बनाबी,
तजी अनवसर क्रोध, लोभ नहि कतहु जनाबी,
पैर धरी तहि ठाम जतए नहि भय हो ठेसक,
पहिने अपने सुधरि, बनी पुनि पर-उपदेशक।


● उदाहरण
सोनक मन्दिरमे निशि-वासर
वास, स्वयं टहलू पुनि भूपति,
भोजन दाड़िम दाख, सुधा-
रस-पान, सखा नरराजक सन्तति,
पाठ सदा हरि-नाम सभा बिच,
पाबि एते सुख-साधन सम्पति,
नै बिसरै’ अछि कीर तथापि
अहा ! निज नीड़ सम्बन्धुक संगति।


● निष्कर्ष
मैथिल वृन्द ! उठू मिलि आबहूँ
काज करू जकरा अछि जे सक,
पैर विचारि धरू सब क्यौ
तहि ठाम जतै नहि हो भय ठेसक,
पालन जे न करैछ कुल-क्रम-
आगत भाषण-भूषण-भेषक
से लघु कूकूर-कीड़हुसौं
जकरा नहि निश्छल भक्ति स्वदेशक।


● भारती वन्दना
भारतीय भाल भाग्य लेखकें बनाय दृढ़ भासल,
कुपन्थ प्राप्त पुत्रकें सुधारती,
धारती प्रवीणा वर वीणापाणि-पंकजमे
रंक जनताकें दैन्य-दाव सौं उबारती।
वारी विवेक-दीप, करूणा-कटाक्ष हेरि
मोह-तमपुंज भार देश केर उतारती
तारती प्रमाद-पाँक लागल अभागलकें
घूमि गेह-गेहमे विदेह-भूमि भारती।


● धनके बाजे घाँटी
करु सुकर्म कुकर्म करु वा, देस बसू वा ढ़ाका।
निश्चिय आदर सब थल होएत, हाथ रहत जौं टाका।। 
बसनहिँ की होयत मङरौनी, पिलखबार वा राँटी। 
कुल गौरव की घोघो चाटब, धन बाजै घाँटी।। 
पैघक हो अनुचितो कथा त सब क्यो पास करै छी।
उचितो कथा दीन बाजथि तौँ, सब उपहास करै छी।। 
छी कहैत हुनकहि जे, 'चुप रहू बहुत कथा नहिँ छाँटी। 
ग्राहक गुणक रहल नहिँ जगमे, धनकै बाजै घाँटी।।
यदि गरीब पाहुन आबथि तौं, कयौ नहिँ खोज करै छी। 
ततहि धनीक अबै छथि ताँ, बस बड़का भोज करै छी।। 
दही दूध घृत मांस अबै अछि, रहु सौरा ओ काँटी।
उठल पुरातन रीति जगत सौं, धनकें बाजै घाँटी।।
पढ़ि पाथर लिखि लोढ़ा होयब, हाथ रहत जौं खाली। 
कतहुँ सभामे किछु बाजब तौं, विहसि देत सब ताली।। 
विद्या विनय विवेक बुद्धि बल, सब गुन गोबर माँटी। 
बिनु अर्थक होइत अछि केवल, धनकै बाजै घाँटी।। 
चलथि धनिक बाहर तौँ माँथक, पाग लगै छन्हि भारी। 
तदपि विचार करथि नहिँ मनमे, बनि अमीर अधिकारी।। 
बोझ गरीबक माँथ लदै छथि, एक तहु पर आँटी। 
क्यों नहिँ दीनजनक दुख जाने, धनकै बाजै घाँटी।। 
सम्प्रति बहुतो छुद्र धनी सब, निर्धन कैं सतवैये। 
सबहिक सतत दृष्टिगोचरमे, ई सबठाम अबैये।। 
शिक्षा तदपि धनीककें दी नहिँ, दीनहिँ जनक डाँटी। 
उचित विचार उठल सब थलसौं, धनकें बाजै घाँटी।। 
करहि हाथ टका दश केवल, तकरे मान करै छी। 
छोट थीक की पैघ तकर हम, किछु नहिँ ध्यान करैछी।। 
खाली हाथ सासुहुक हो ताँ, तनिकहु बाढ़नि झाँटी।
सबविधि दुख निर्धन कैं सखि हे ? धनकें बाजै घाँटी।।

गोनू झाक कहानी : गुलाबक सुगन्ध

मिथिला के हर घर के आँगन में बेला, चमेली, कचनार, जूही, कनक, कटेली चंपा, रातरानी सन फूल के पौधा भेटे जायत।

एक दिन मिथिलाक राजा अपन पुष्पवाटिका मे टहैल रहल छलाह। हुनकर मंत्री लोकनि सेहो हुनका संग छल। कोनो कारणवश जखन गोनू झा महाराज सँ भेंट करय आयल छलाह तऽ महाराज हुनका पुष्पवाटिका मे ओतहि बजौलनि।

महाराज अपन मंत्री सं गप्प करैत रहलाह, किछु निर्देश दैत रहलाह। गोनू झा दुनू गोटेक संग टहलैत रहलाह। मंत्री मोने-मोन खुश भऽ रहल छलाह जे महाराज गोनू झा के महत्व नहि दऽ रहल छथिन्ह।

मंत्री के निर्देश देला के बाद महाराज अचानक मंत्री के कहलखिन - "मंत्री जी, हम जखन कखनो एहि फुलवाड़ी में अबैत छी तऽ हम मंत्रमुग्ध भऽ जाइत छी।" जे पौधा लग जाउ, ओहि पौधा सँ कोनो विशेष सुगन्धक अनुभूति मोन मे भरि जाइत अछि। 

मुदा एहि सभ फूल मे हमरा गुलाब बेसी नीक लगैत अछि। देखबा मे सेहो सुन्दर आ सुगंध एहन जे म्लीन मोन के सेहो प्रसन्न कऽ दैत अछि। की एहन कोनो उपाय अछि जे हम कोनो पौधा लग जाऊ, ओतय सं गुलाबक सुगंध टा भेटय?"

महाराजक बात सुनि मंत्री अवाक भऽ गेला। हुनका बुझा नै रहल छलनी जे महाराज केँ कोन जवाब देबाक चाही। भला कचनारसँ गुलाबक सुगन्ध कोना आबि सकैत अछि। कोनो फूल अपने सुगंध देत। महाराज के ई कि सूझेलनी? 

अचानक मंत्री जी के एहि विपत्ति के टालबाक एकटा विचार आबि गेलनि। ओ तुरन्त महाराज सँ बजल-" महाराज! गोनू झा के रहिते एहि प्रश्नक उत्तर हम दी, इ उचित नहि बुझाइत अछि !"

महाराज बुझि गेलाह जे मंत्री जी हुनका कोनो उपाय बतेबाक स्थिति मे नहि अछि, ताहि लेल ओ बात टाईल रहल अछि। ओ मोने-मोन मे मुस्कुरेलनि आ फेर गोनू झा दिस तकलनि ।

गोनू झा बिना एक क्षण गमेने बजलाह- "महाराज! साँझ अस्त भऽ रहल अछि।" अहाँकेँ ठंढा लागि सकैत अछि। हम तुरन्ते अहाँक दुशाला लऽके आबय छी," आ महाराजकऽ सहमति बिना घुमि कऽ महल दिस विदा भेलाह। महाराज मंत्रीक संग फूलबारी मे टहलैत रहलाह, जेना पहिने टहलैत छलाह।

थोड़ेक काल मे गोनू झा मंद-मंद मुस्कुराइत ओतय आबि गेलाह। महाराज लग रुकि कऽ आदरपूर्वक दुशाला हुनका कान्ह पर पसाईर के राखि देलनि ।

महाराज दुशालाके एक छोर के स्वयम छाती सं लपेटिते दोसर छोर के अपन कान्ह पर राखि लेलनि। ओहि समय महाराज गुलाबक बीचे छलाह। गुलाबक सुगंध मे सराबोर! महाराज किछु काल ओतय चलैत रहलाह आ फेर आन फूल दिस बढ़ैत गोनू झा सँ पुछलखिन - "पंडित जी! की कोनो उपाय अछि जे हम जाहि फूल लग जांऊ ओहिसं गुलाबक सुगंध टा आबय ?"

गोनू झा मुस्कुराइत बजलाह - "अहाँ केँ जवाब भेटत महाराज!" थोड़ेबे काल मे ओ सभ फुलवारीक एहन छोर पर पहुँचि गेलाह, जतय बेला-जूही-चमेली सन उज्जर फूलक छटा बिखरल छल, मुदा महाराज केँ ओतहु गुलाबक सुगंध भेटि रहल छलनि। मधुर-मधुर सुगंध !  महाराज मंत्री सँ पुछलखिन - "एहि फूल सँ केहन सुगन्ध आबि रहल अछि?"

मंत्री बजलाह -" बेला-जुहीक मिश्रित सुगंध!"

महाराज गोनू झा केँ सेहो इएह प्रश्न दोहरौलनि।

गोनू झा महाराजक प्रश्नक अर्थ बुझी गेलैथ। 

ओ बजलाह - "महाराज, फूल मे तऽ वैह सुगंध होइत छैक जे स्वाभाविक रूप सँ ओहि मे रहैत छैक, मुदा अहाँ जतय कतौ भी जायब ओतय अहाँके गुलाब मधुर सुगंध भेटत।"

अहाँ आदेश देने रही जे हम किछु एहन उपाय बताबी जे अहाँ एहि फुलवाड़ी मे जतय कतौ भी जाउ, अहाँके गुलाबक सुगंध भेटैय।

हम ओ उपाय कऽ देने छी ।"

एखन धरि मंत्री जी के उम्मीद छल जे एहि उपाय के मामला मे गोनू झा के मुँह लटकबैत देखब, मुदा गोनू झा के बात सुनला के बाद हुनकर चेहराक रंग उतैर गेलैन।

महाराज पुछलखिन - " की सत्ते अहाँ एहन किछु केलौ हन ? हम एखनो गुलाबक सुगन्धक अनुभव कऽ रहल छी।

गोनू झा मुस्कुराइत बजलाह - "हम किछु नहि केलहुँ।" बस, थोड़बे रास गुलाबक इत्र अहाँक दुशाला पर लगा देने छी।"

सोमवार, 22 मई 2023

सीता के सकल देखी लिरिक्स - Sita Ke Sakal Dekhi Lyrics

सीता के सकल देखी 
झाँखथिन जनकजी रिषि
आब सीता रहली कुमारी गे माई
आऽबऽ हे वशिष्ट मुनि दिनमा विचारहु
सीता के लगन बड़ उताहूल गे माई
गाय के गोबर, अंगना निपायल
सोनमा के कलश गरायल के माई

आबहो बजनिया भईया बजबा बजाबहु
सीता के होइता बियाह गे माई
दान करय लऽ बैसलन, दान करय लऽ बैसलन
बाबा जनक ऋषि
मोती जंका झहरय नोर गे माई

बेटबा जे रैहिता बेटी खेलिते बियाहितौं
बेटी के बियाहल ने जाय गे माई
सोनमा जे रिहिता बेटी फेर सं गरहबीतौं
सिनुर फेरल नही जाई गे माई
सिनुर फेरल नही जाई गे माई

शुक्रवार, 19 मई 2023

मैथिली पंचांग 2023-2024 | Mithila Panchang 2023-24



मैथिली पंचांग जुलाई 2023 - Mithila Panchang July 2023
तिथि, मास पाबनिक नाम दिन
7 जुलाई        मौना पंचमी, 
मधुश्रावणी पूजा आरम्भ            
मनसा देवी देव्युत्थान पूजन
शुक्र
10 जुलाई श्री सोमवारी व्रत सोम
13 जुलाई कामदा व्रत, पूब यात्रा वृह०
14 जुलाई दुर्वादलेन पारणा शुक्र
15 जुलाई संक्रान्ति शनि
16 जुलाई मासान्त रवि
17 जुलाई श्रावणी अमावस्या,
सोमवती अमावस्या
सोम
30 जुलाई त्रयोदशीमान रवि


मैथिली पंचांग अगस्त 2023 - Mithila Panchang August 2023
तिथि, मास पाबनिक नाम दिन
19 अगस्त मधुश्रावणी व्रत शनि
20 अगस्त भाद्रमासिय रवि व्रत रवि
21 अगस्त नागपंचमी सोम
23 अगस्त शितलासप्तमी,
शितलपुजा
बुध
27 अगस्त पुत्रदा व्रत
एकादशी
रवि
28 अगस्त दूर्वादलेन पारण सोम
31 अगस्त रक्षाबन्धन,
श्रावणी पूर्णिमा
वृह०
 

मैथिली पंचांग सितम्बर 2023 - Mithila Panchang September 2023
तिथि, मास पाबनिक नाम दिन
4 सितम्बर बहुला पूजा सोम
7 सितम्बर श्री कृष्णजन्माष्टमी व्रत वृह०
8 सितम्बर कृष्णजन्माष्टमी व्रत पारण शुक्र
12 सितम्बर सिद्धियोग रात्रि 1:22 मंगल
13 सितम्बर श्री भैरवपूजन बुध
14 सितम्बर कुशोत्पाटन वृह०
16 सितम्बर श्री गणेश व्रत शनि
17 सितम्बर विश्वकर्मा पूजा, मासान्त रवि
18 सितम्बर चौठचन्द्र पूजा (चौरचन) सोम
18 सितम्बर हरितालिका (तीज) सोम
19 सितम्बर गणेश पूजा आरम्भ मंगल
20 सितम्बर ऋषि पंचमी, सप्तऋषि पूजन बुध
22 सितम्बर अनन्तडोर बंधन शुक्र
23 सितम्बर दुर्गाष्टमी, राधाष्टमी,
महालक्ष्मी व्रत आरम्भ
शनि
26 सितम्बर इन्द्र पुजा आरम्भ मंगल
28 सितम्बर श्री गणेश विसर्जन,
अनन्त व्रत
वृह०
29 सितम्बर भाद्री पूर्णिमा,
अगस्त्यार्घदान
शुक्र
30 सितम्बर पितृपक्ष पार्वणारंभ,
महालआरंभ
शनि


मैथिली पंचांग अक्टूबर 2023 - Mithila Panchang October 2023
तिथि, मास पाबनिक नाम दिन
1 अक्टूबर इंद्र विसर्जन रवि
5 अक्टूबर ओठगन वृह०
6 अक्टूबर जीमूतवाहन (जितिया).    शुक्र
7 अक्टूबर जितिया व्रतक पारण शनि
8 अक्टूबर मातृनवमी रवि
10 अक्टूबर इंदिरा व्रत मंगल
14 अक्टूबर पितृपक्ष समाप्ति शनि
15 अक्टूबर कलशस्थापन रवि
16 अक्टूबर रेमन्त पूजा,
कार्तिक स्नानरंभ
सोम
17 अक्टूबर मासान्त मंगल
18 अक्टूबर संक्रांति सोम
19 अक्टूबर सिद्धियोग रात्रि 10:51 वृह०
20 अक्टूबर बेलनौती, गज पूजा शुक्र
21 अक्टूबर निशा पूजा,
पत्रिका प्रवेश
शनि
22 अक्टूबर महाष्टमी व्रत,
त्रिशूलिनी पूजा
रवि
23 अक्टूबर महानवमी व्रत सोम
24 अक्टूबर देवी विसर्जन,
अपराजिता पूजा
मंगल
28 अक्टूबर कोजागरा शनि


मैथिली पंचांग नवम्बर 2023 - Mithila Panchang November 2023
तिथि, मास पाबनिक नाम दिन
3 नवम्बर अशोक चन्दन व्रत शुक्र
9 नवम्बर रम्भा व्रत वृह०
10 नवम्बर धनतेरस, गोवत्स द्वादशी,
तुलशीदलेन पारण
शुक्र
11 नवम्बर हनुमान जन्मोत्सव शनि
12 नवम्बर दीपावली, काली पूजा,
उल्का भृमण
रवि
13 नवम्बर कार्तिक आ०,
सोमवती आ०
सोम
14 नवम्बर गोपूजा, गोवर्धन पूजा,
अन्नकूट
मंगल
15 नवम्बर भ्रातृद्वितीया, यमद्वितीया,
चित्रगुप्त पूजन
बुध
16 नवम्बर माछ मरुआ वर्जित,
मासान्त
वृह
17 नवम्बर छठि व्रतक नहाय खाय,
संक्रांति
शुक्र
18 नवम्बर छठि व्रतक खरना,
सामा चकेवा पूजारम्भ
शनि
19 नवम्बर छठि व्रतक सांझक अर्घ रवि
20 नवम्बर छठि व्रतक भोरक अर्घ सोम
21 नवम्बर अक्षय नवमी मंगल
23 नवम्बर देवोत्थान एकादशी व्रत वृह
25 नवम्बर विद्यापति स्मृति दिवस शनि
26 नवम्बर सामा-चकेवा विसर्जन,
षाणमासिक रवि व्रतारम्भ
रवि
27 नवम्बर कार्तिक पूर्णिमा,
गुरुनानक जयंती
सोम
28 नवम्बर नवान्न पार्वण मंगल
30 नवम्बर सौभग्यसुंदरी व्रत,
गजानन व्रत
वृह०


मैथिली पंचांग दिसम्बर 2023 - Mithila Panchang December 2023
तिथि, महीना पाबनिक नाम दिन
2 दिसम्बर वीड़ पंचमी, विषहरा पूजन शनि
4 दिसम्बर कालभैरवा ष्टमी सोम
5 दिसम्बर महाराजा कामेश्वर सिंह जयंती मंगल
12 दिसम्बर भौमवती अमावस्या मंगल
15 नवम्बर संक्रान्ति रवि
17 दिसम्बर सीताराम विवाहोत्सव रवि
18 दिसम्बर स्कन्दषष्ठी व्रत सोम
23 दिसम्बर मोक्षदा व्रत, गीता जयंती शनि
24 दिसम्बर गोमूत्रेण पारणा रवि
27 दिसम्बर पैषमे कौशिकी स्नान बुध
30 दिसम्बर श्री लम्बोदर व्रत शनि

मैथिली पंचांग जनवरी 2024 - Mithila Panchang January 2024
तिथि, मास पाबनिक नाम दिन
2 जनवरी सप्तमी मेघदर्शन मंगल
4 जनवरी अपूपाष्टकाष्टमी वृह०
5 जनवरी अन्वष्टका नवमी शुक्र
7 जनवरी सफला व्रत रवि
9 जनवरी दशातारकारंभ रात्रि 7:57 उ. मंगल
11 जनवरी पौषि अमावस्या वृह०
14 जनवरी मासान्त रवि
15 जनवरी तिला (मकर) संक्रांति,
माघस्नान आरंभ
सोम
19 जनवरी दशातारकान्त प्रा० 7:01 शुक्र
20 जनवरी कर्म दशमी शनि
21 जनवरी पुत्रदा व्रत रवि
22 जनवरी नारायण द्वादशी सोम
25 जनवरी कैशिकी स्नान, पौषी पूर्णिमा वृह०

मैथिली पंचांग फरवरी 2024 - Mithila Panchang February 2024
तिथि, मास पाबनिक नाम दिन
2 फरवरी सप्तमी मेघदर्शन शुक्र
4 फरवरी अपूपाष्टकाष्टमी सोम
8 फरवरी नरक निवारण व्रत वृह०
9 फरवरी माघी मौनी अमावस्या शुक्र
10 फरवरी कलश स्थापना,
नवरात्रा आरम्भ
शनि
11 फरवरी श्री रेमन्त पूजा रवि
12 फरवरी मासान्त सोम
13 फरवरी संक्रान्ति मंगल
14 फरवरी वसन्त पंचमी,
सरस्वती पूजा
बुध
16 फरवरी अचला सप्तमी,
निशा पूजा
शुक्र
17 फरवरी भीष्मष्टमी,
भीष्म तर्पण
शनि
19 फरवरी देवी विसर्जन सोम
24 फरवरी माघी पूर्णिमा शनि

मैथिली पंचांग मार्च 2024 - Mithila Panchang March 2024
तिथि, मास पाबनिक नाम दिन
8 मार्च महाशिवरात्रि व्रत शुक्र
11 मार्च जनकपुर परिक्रमा आरम्भ सोम
14 मार्च संक्रांति वृह०
19 मार्च जनकपुर परिक्रमा समाप्ति मंगल
24 मार्च होलिका दहन (समन) रवि
25 मार्च सिंदुरार्पण (पातरिदान) सोम
16 मार्च फगुआ (होली),
सप्ताडोराक बंधन
मंगल

मैथिली पंचांग अप्रैल 2024 - Mithila Panchang April 2024
तिथि, मास पाबनिक नाम दिन
2 अप्रैल शीतलाष्टमी मंगल
5 अप्रैल पापमोचनी एकादशी शुक्र
8 अप्रैल चैत्री अमावस्या,
सोमवती अमावस्या
सोम
9 अप्रैल वसन्त नवरात्रा आरम्भ,
कलशस्थपना
मंगल
10 अप्रैल श्री रेमन्त पूजा, सतुआइन बुध
12 अप्रैल छठि व्रतक नहाय खाय शुक्र
13 अप्रैल छठि व्रतक खरना शनि
14 मार्च छठि व्रतक संझुका अर्घदान,
जूडशीतल
रवि
15 अप्रैल निशा पूजा सोम
16 अप्रैल महाष्टमी मंगल
18 अप्रैल देवी विसर्जन गुरु
19 अप्रैल कामदा व्रत शुक्र
21 अप्रैल महावीर जयंती रवि
23 अप्रैल हनुमान जयंती मंगल

मैथिली पंचांग मई 2024 - Mithila Panchang May 2024
तिथि, मास पाबनिक नाम दिन
10 मई अक्षय तृतीया शुक्र
12 मई षाणमासिक रवि व्रत समाप्ति रवि
13 मई मासांत सोम
14 मई संक्रांति मंगल
17 मई जानकी नवमी, मैथिली दिवस शुक्र


मैथिली पंचांग जून 2024 - Mithila Panchang June 2024
तिथि, मास पाबनिक नाम दिन
6 जून वटसावित्री व्रत वृह०
9 जून रम्भा तृतीया रवि
12 जून त्रिविक्रम द्वादशी बुध
14 जून मासान्त शुक्र
15 जून संक्रान्ति शनि
16 जून गंगा दशहरा रवि

गुरुवार, 18 मई 2023

कुंज बिहारी मैथिली लोकगीत लिरिक्स - Kunj Bihari Mishra Maithili Song Lyrics

सोमवार, 15 मई 2023

मोहि लेलखिन सजनी मोरा मनवा लिरिक्स - Mohi Lelkhin Sajni Mora Manwa Lyrics

Mohi Lelkhin Sajni Mora Manwa Lyrics in Hindi song by Sharda Sinha

मोहि लेलखिन सजनी मोरा मनवा पहुनमा राघो - 2
हे हो पहुनमा राघो, सिया के सजनमा राघो
राजा दशरथ के दुलरुआ पहुनमा राघो
मोहि लेलखिन सजनी मोरा मनवा पहुनमा राघो 

अँखियन में कारी काजर होठवा में पानक लाली - 2
लाले लाल सिर पर हई पगड़िया पहुनमा राघो
मोहि लेलखिन सजनी मोरा मनवा पहुनमा राघो

चलू चलू परिछन सखी हे दूल्हा चुमावन सखि हे - 2
चम-चम चमके के है मऊरिया हे पहुनमा राघो
मोहि लेलखिन सजनी मोरा मनवा पहुनमा राघो


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रविवार, 14 मई 2023

मिथिला पंचांग के अनुसार भादवा 2023 | Maithili Panchang Bhadwa 2023

भदवा, पंचक Date 2023 in Mithila

भदवा जुलाई 2023 - Bhadwa in July 2023
भदवा आरम्भ 6/7/2023 दिन 7:०3 उपरि ।
भदवा समाप्ति 10/7/2023 रात्रि 11:57 उपरि ।

भदवा अगस्त 2023 - Bhadwa in August 2023
भदवा आरम्भ 2/8/2023 दिन 3:20 उपरि ।
भदवा समाप्ति 7/8/2023 दिन 8:03 उपरि ।

भदवा अगस्त-सितम्बर 2023 - Bhadwa in September 2023
भदवा आरम्भ 29/8/2023 रात्रि 11:34 उपरि ।
भदवा समाप्ति 3/9/2023 दिन 3:41 उपरि ।

भदवा सितम्बर-अक्टूबर 2023 - Bhadwa in October 2023
भदवा आरम्भ 27/9/2023 दिन 7:43 उपरि ।
भदवा समाप्ति 3/10/2023 रात्रि 12:02 उपरि ।

भदवा अक्टूबर 2023
भदवा आरम्भ 17/10/2023 दिन 8:15 या.
भदवा समाप्ति 23/10/2023 रात्रि 6:58 उ.


भदवा नवम्बर 2023 - Bhadwa in November  2023
भदवा आरम्भ 19/11/2023 रात्रि 12:06 उपरि ।
भदवा समाप्ति 21/11/2023 दिन 4:15 या.

भदवा दिसम्बर 2023 - Bhadwa in December  2023
भदवा आरम्भ 18/12/2023 रात्रि 12:06 उपरि ।
भदवा समाप्ति 21/11/2023 दिन 4:15 या.

शुक्रवार, 12 मई 2023

Happy Mother's Day Wishes, Quotes in Maithili Download - मदर्स डे मैथिली शुभकामना संदेश


Happy Mother's Day Maithili Quotes Status Images | मातृ दिवस मैथिली शुभकामना फोटो

ठेहुन पर चलिते-चलिते
कहिया पएर पर ठाढ़ भेलहुँ,
तोहर ममता के छाहरि मे
नहि बुझल कखन पैघ भेलहुँ,

काजरक टिक्का, दूध भात 
आइयो सब किछु ओहने अछि,
तोरा लेल हमहि हम सब ठाम
प्रेम इ तोहर केहन अछि,

दुलरगर प्रियगर, भोला भाला 
हमही सबसँ अच्छा छी
कतबो पैघ किएक नहि हो
माँ, हम एखनो तोरे बच्चा छी!


देखल दुनिया के सब सौन्दर्य 
मुदा माँ जे शांति अहाँक आँचर मे अछि से कतहु नहि अछि।
मातृ दिवस के हार्दिक शुभकामना


हम अपन छोट मुँह सँ
कोना करब तहर गुणगान,
मां तहर ममता आगू
फीका लगैत छथि भगवान।


जतय प्रेम बिना मांगने भेटैत अछि
हंसी खुशी आ दुलार भेटैय अछि
स्वर्ग अछि, जकर चरण मे ओ माता छथि
जकर गोदी मे ई सुखी संसार भेटैत अछि।