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मिथिला धरोहर | मैथिली पंचांग 2026-27, मैथिली लोकगीत लिरिक्स...

मिथिला धरोहर — मैथिली लोकगीत लिरिक्स, विवाह गीत, मैथिली भगवती गीत लिरिक्स, मैथिली शिव भजन लिरिक्स, भजन, छठ, होली, मधुश्रावणी गीत लिरिक्स। मैथिली पंचांग, विवाह, उपनयन मुहूर्त, मिथिला के मंदिर, लोकदेवता, साहित्यकार परिचय, कथा-कहानी, गोनू झा के कहानी एवं मिथिला संस्कृति से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी।

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30 जुल॰ 2026

Kohbar Geet

सुंदर कनिया राम रतनिया लिरिक्स - Sunder Kaniya Ram Rataniya Lyrics

मिथिला धरोहर
पारम्परिक कोहबर गीत

सुंदर कनिया राम रतनिया
सुंदर कनिया राम रतनिया
सोने लागल केबार हे
कोठे घर कोबर...

ताहि कोबर सुतय गेला दूल्हा से सुंदर दूल्हा
ताहि कोबर सुतय गेला दूल्हा से सुंदर दूल्हा
पीठ लागी सिया सुकुमारी हे
कोठे घर कोबर
पीठ लागी सिया सुकुमारी हे
कोठे घर कोबर...।

घुरि सुतु फिरि सुतु सासु जी के बेटबा
घुरि सुतु फिरि सुतु सासु जी के बेटबा
तोरे घांम चादर मलिन हे
कोठे घर कोबर
तोरे घांम चादर मलिन हे
कोठे घर कोबर...।

एतबा वचन जब सुनलनि दूल्हा
एतबा वचन जब सुनलनि दूल्हा
घोड़ा पीठ भेला सबार हे
कोठे घर कोबर
घोड़ा पीठ भेला सबार हे
कोठे घर कोबर...।

घोड़ा के लगाम धेने ठार भेली कनियाँ
घोड़ा के लगाम धेने ठार भेली कनियाँ
हमरा के कहाँ छोरि जाय हे
कोठे घर कोबर 
हमरा के कहाँ छोरि जाय हे
कोठे घर कोबर...।

नहिरा में छौगे घनी माई बाप भैया 
नहिरा में छौगे घनी माई बाप भैया 
ससुरा में लक्ष्मण दीअर हे
कोठे घर कोबर
ससुरा में लक्ष्मण दीअर हे
कोठे घर कोबर...।

अहिं प्रभु ओढन अहिं प्रभु पहिरन
अहिं प्रभु ओढन अहिं प्रभु पहिरन
अहिं प्रभु सोलहो सिंगार हे
कोठे घर कोबर
अहिं प्रभु सोलहो सिंगार हे
कोठे घर कोबर..।



29 जुल॰ 2026

Maithili Lokgeet

आजु तिलक चढ़े रघुनन्दन के लिरिक्स - Aaju Tilak Chadhe Raghunandan Ke Lyrics

मिथिला धरोहर
आजु तिलक चढ़े रघुनन्दन के
आजु तिलक चढ़े रघुनन्दन के

चारु कुमार बैठे छवि छहरत
होइत सुमंगन तेहि छन के

एक जनेऊ पीताम्बर धोती
पहिरावन सब लालन के

नारियर पान हरदी दधि दूर्वा
ध्रुव भरल कर कंजन में

पढ़ी पढ़ीं वेदक मंत्र पुरोहित
बेल निरहूकुल रघुकुल चन्दन के

स्नेहलता शुभ तिलक चढ़ाबथि
रची रची दशरथ नन्दन के

26 जुल॰ 2026

Maithili Lokgeet

रतन पलकिया चढ़ि आये दूल्हा चार हे लिरिक्स - Ratan Palakiya Chadhi Aa Dulha Chaar Re Lyrics

मिथिला धरोहर
रतन पलकिया चढ़ि आये दूल्हा चार हे
जनक जमाई अपन अवध कुमार हे

माथे मनी मोरिया सोभे चानन लिलार हे
धोतिया पियरिया पर जिया बलिहार हे

पालकी उठाए एति निपुर कहार हे
उमकैत आबै राजा जन्म दुआर हे

नारायण नर रूप बर के निहार हे
सुमनी बरसी फूल बोले जय जय कार हे


25 जुल॰ 2026

Maithili Lokgeet

अवध नगरिया से चललै बरियतिया लिरिक्स - Awadh Nagariya Se Aile Bariyatiya Lyrics

मिथिला धरोहर
मैथिली राम विवाह लोकगीत (बाराती गीत)

कौने नगरिया से चललै बरियतिया 
हे सुहावन लगे,
कौने नगरिया भइले शोर हे सोहावन लागे
कौने नगरिया भइले शोर हे सोहावन लागे

अवध नगरिया से चललै बरियतिया 
हे सोहावन लागे
जनक नगरिया भइले शोर हे सोहावन लागे

सब देवतन मिलि, चललै बरियतिया
हे सोहावन लागे
बजवा बजेला घनघोर, हे सोहावन लागे .

बजवा के शब्द सुनि ,हुलसे मोर छतिया
हे सुहावन लागे 
रौशनी सं भेलय इजोर हे सुहावन लागे 

परिछन चलली सब, सखियां सहेलियां
हे सुहावन लागे 
पहिरेली लहंगा पटोर, हे सुहावन लागे 

कहत रसिक जन, दूलहा के सुरतिया
हे सुहावन लागे
सुफल मनोरथ भइले मोर, हे सुहावन लागे 

इहो पढ़ब :-

20 जुल॰ 2026

Kohbar Geet

लाल रंग कोबर गुलाल रंग हे लिरिक्स - Laal Rang Kobar Gulaal Rang He Lyrics

मिथिला धरोहर
लाल रंग कोबर गुलाल रंग हे
सखि हरे रंग कोबर
लाल रंग कोबर गुलाल रंग हे
सखि हरे रंग कोबर

ताहि कोबर सुतला दूल्हा से राम दूल्हा
ताहि कोबर सुतला दूल्हा से राम दूल्हा
पीठ लागि सिया सुकुमारी हे
सखि हरे रंग कोबर
लाल रंग कोबर गुलाल रंग हे
सखि हरे रंग कोबर

घुरि सुतु फिरि सुतु सुसुर जी के बेटिया 
घुरि सुतु फिरि सुतु सुसुर जी के बेटिया 
अंहुँ देह गर्मी बहुत हे
सखि हरे रंग कोबर
लाल रंग कोबर गुलाल रंग हे
सखि हरे रंग कोबर

एतबा वचन जौं सुनलनि सुहबे
एतबा वचन जब सुनलनि दूल्हा
सेज छोड़ी भुइयां लोटी जाय हे
सखि हरे रंग कोबर
लाल रंग कोबर गुलाल रंग हे
सखि हरे रंग कोबर

अंगना बहारते तोहे सिलखि के चिड़िया
अंगना बहारते तोहे सिलखि के चिड़िया
सरहोइज दिअ ने बजाय हे
सखि हरे रंग कोबर
लाल रंग कोबर गुलाल रंग हे
सखि हरे रंग कोबर

अयलन सरहोइज बैसथ पलंग चढ़ी
अयलन सरहोइज बैसथ पलंग चढ़ी
देख लथु नन्दो चरित्र हे
सखि हरे रंग कोबर
लाल रंग कोबर गुलाल रंग हे
सखि हरे रंग कोबर

हमरो ननदिया दूल्हा गंगा जी के मांगल
हमरो ननदिया दूल्हा गंगा जी के मांगल
इहो नही सहथि कुबोल हे
सखि हरे रंग कोबर
लाल रंग कोबर गुलाल रंग हे
सखि हरे रंग कोबर
लाल रंग कोबर गुलाल रंग हे
सखि हरे रंग कोबर

इहो देखब :-


14 जुल॰ 2026

Kohbar Geet

सिया के सजन मोरा बड़ा रे दुलरुआ लिरिक्स - Siya Ke Sajan Mora Bada Re Dularua in Lyrics

मिथिला धरोहर
(पारम्परिक मैथिली कोहबर गीत) 

सिया के सजन मोरा बड़ा रे दुलरुआ
रखितंहुँ हिया में लगाय हे
सिया के सजन मोरा बड़ा रे दुलरुआ
रखितंहुँ हिया में लगाय हे

एकहूँ पलक लय संग नहि छोरितहूँ
देखितहि नैना अघाय हे 
एकहूँ पलक लय संग नहि छोरितहूँ
देखितहि नैना अघाय हे 

फुलबा के हार जौं हम बनि जैतहँ
प्रीतम करल पटाय हे
फुलबा के हार जौं हम बनि जैतहँ
प्रीतम करल पटाय हे

पीताम्बर जौं हम बनि जैतहँ
लिहथत अंग लपटाय हे
पीताम्बर जौं हम बनि जैतहँ
लिहथत अंग लपटाय हे
सिया के सजन मोरा बड़ा रे दुलरुआ
रखितंहुँ हिया में लगाय हे
सिया के सजन मोरा बड़ा रे दुलरुआ
रखितंहुँ हिया में लगाय हे

इहो पढ़ब:-


4 जुल॰ 2026

Gauri Puja Geet

गौरी पूजन हम जायब यौ रघुनंदन स्वामी लिरिक्स - Gauri Pujan Ham Jaayb Yau Raghunandan Svami Lyrics

मिथिला धरोहर
मैथिली गौरी लोकगीत

गौरी पूजन हम जायब यौ रघुनंदन स्वामी
गौरी पूजन हम जायब यौ रघुनंदन स्वामी
गिरजा पूजन हम जायब यौ रघुनंदन स्वामी
गिरजा पूजन हम जायब यौ रघुनंदन स्वामी

आसन कम्बल हम अपने सं आनब
आसन कम्बल हम अपने सं आनब
आहाँ सिंघासन लेने ऐब यौ रघुनंदन स्वामी
आहाँ सिंघासन लेने ऐब यौ रघुनंदन स्वामी
गौरी पूजन हम जायब यौ रघुनंदन स्वामी

फूल बेलपत्र हम अपने सं आनब
फूल बेलपत्र हम अपने सं आनब
आहाँ गंगाजल लेने ऐब यौ रघुनंदन स्वामी
आहाँ गंगाजल लेने ऐब यौ रघुनंदन स्वामी
गौरी पूजन हम जायब यौ रघुनंदन स्वामी

सिंदूर सपरि हम अपने सं आनब
सिंदूर सपरि हम अपने सं आनब
आहाँ नबेद लेने ऐब यौ रघुनंदन स्वामी
आहाँ नबेद लेने ऐब यौ रघुनंदन स्वामी
गौरी पूजन हम जायब यौ रघुनंदन स्वामी

गौरी पूजीए पूजी भाग्य जे मांगब
गौरी पूजीए पूजी भाग्य जे मांगब
मांगी लेब दीर्घ अहिवात  यौ रघुनंदन स्वामी
मांगी लेब दीर्घ अहिवात  यौ रघुनंदन स्वामी
गौरी पूजन हम जायब यौ रघुनंदन स्वामी
गिरजा पूजन हम जायब यौ रघुनंदन स्वामी

Maithili Lokgeet

कतेक दिन सं असरा लगयलहुँ लिरिक्स - Katek Dinana Saun Asra Lagaylahun

मिथिला धरोहर
पारंपरिक मैथिली खोइछा खोलबाक गीत

कतेक दिन सं असरा लगयलहुँ 
कतेक दिन सं असरा लगयलहुँ 
भैया के होयत बियाह हे
भैया के होयत बियाह हे

भौजो के खोंइछा में हीरा मोती आयत
भौजो के खोंइछा में हीरा मोती आयत
ओहि लए गहना घडाऐब हे
ओहि लए गहना घडाऐब हे

एहन दरिद्र घर भैया बियाहलनी
एहन दरिद्र घर भैया बियाहलनी
भौजो के खोंइचा दुभि धान हे
भौजो के खोंइचा दुभि धान हे
कतेक दिन सं असरा लगयलहुँ 
कतेक दिन सं असरा लगयलहुँ 
भैया के होयत बियाह हे
भैया के होयत बियाह हे


25 अक्टू॰ 2018

Maithili Lokgeet

ओठंगर काल के गीत - Othangar मैथिली लोकगीत

मिथिला धरोहर

चारू बरबासँ धनमा कुटाएब - लिरिक्स

चारू बरबासँ धनमा कुटाएब हे सखि
कथी केर उखरि कथीक मुसर
आठ चोट गनि कुटब सम्हारि
आइ धनमा कुटायब चारू बरबासँ
बेल के उखरि बबुर के समाठ
आठ चोट गनि कूटल हे
एको चाउर नहि छूटल हे

चितचोरबा आजु बन्हएलनि हे - लिरिक्स

चितचोरबा आजु बन्हएलनि हे
सान गुमान देखओलनि हे
बेलक उखरि, बबूर केँ समाठ
घूमि-घूमि डोरी कसलनि हे
चितचोरबा आजू बन्हएलनि हे
ओहि चितचोरबा के लाले-लाल धोतिया
ओहि चितचोरबा के लाले-लाल पगिया
सान गुमान देखओलनि हे
नउआ आबि कसि डोरिसँ बान्हल
कंगन बन्हाओल आम पातसँ
आठ जन मिलि कूटल ओठंगर
कुटि एको चाउर नहि छुटल हे

एहो पढ़ब :-

एला चारू भइया अबधबा स - लिरिक्स

एला चारू भइया अबधबा सऽ
आइ जनकपुर बाजे बधइया हे

नाउनि नगर हकार पठाओल
सखि मिलि आए अंगनमामे
सखि एला चारू भइया अबधबा सऽ

कथी के उखरी कथी के मूसर
कोने डोरी बन्हबनि दुलहबाके
सखि एला चारू भइया अबधबा सऽ

सोना के उखरि रूपे के मूसर
रेशम डोरी बन्हबनि दुलहा के
सखि एला चारू भइया अबधबा सऽ

पाँच ब्राह्मण वेद पढ़ाओल
आठ चोट चाउरो ने बनल दुलहबा सऽ
सखि एला चारू भइया अबधबा सऽ

2 अक्टू॰ 2018

Maithili Lokgeet

वेदी घुमयबा काल के गीत - मैथिली लोकगीत वेदी घुमैबा काल के गीत

मिथिला धरोहर

घूमू-घूमू महादेव आजु वेदी हे - वेदी घुमैबा काल के लोकगीत

घूमू-घूमू महादेव आजु वेदी हे
एक नागरि जे नाक धयने
एक लगौने गराती हे
चारू कोना चारि कर बैसाओल
घूमि-घूमि ताहि पर बैसू हे
तीन बेर जे घूमि लेब दुलहा
पहिरि लिअ विधिक धोती हे
भनहि विद्यापति सुनू मनाइनि
गौरी ब्याहन आयल योगी हे

इहो पढ़ब:-

27 सित॰ 2018

Maithili Vivah Geet

घीढारी करथि नर नारी सुमंगल के फूल बरसे - घीढारी गीत लिरिक्स Gheedhari karthi nar nari geet

मिथिला धरोहर
-: घीढारी गीत :-

घीढारी करथि नर नारी
सुमंगल के फूल बरसे

पुरजन परिजन कोउ बेढावे
नारि सोहागिन मंगल गावे
रोपल बांस विचार, सुमंगल के फूल बरसे...

आनन्द मंगल सगुन सब नीचे
पुरहित धेल पोथी बांचे
आनन्द मगन नर नारी, सुमंगल के फूल बरसे...

माली हजाम के किस्मत जागल
याचक वृन्द निछल जागल 
मंगलनाचथि पौनी पसारी, सुमंगल के फूल बरसे...

बाजय विविध ढोल शहनाई 
स्नेहलता उर आनन्द गाई 
नाचे फुआ महतारी, सुमंगल के फूल बरसे....

20 सित॰ 2018

Maithili Vivah Geet

कोनो क दिये गारी हे सिया साजन लिरिक्स - Kona ka Diye Gari He Siya Saajan

मिथिला धरोहर
मैथिली गाली गीत:-

कोनो क दिये गारी हे सिया साजन, 
जिनका जे गारी पढ़े केहन पढ़ता, 
हमरा लगैयह दोसर सरोकारी,
हे सिये साजन, कोना क दिये गारी, 

एक दिन क देखने मिथिला मोहित भेल, 
त बचली कोना का अवधपुर क नारी 
कोना क दिये गारी हे सिये साजन, 

ई बतिया सुनि छक द' लगैइह 
जौ किये कहैड्य हिनकर बहिनी छिनारी, 
कोनो क दिये गारी हे सिय साजन,

स्नेहलता अपनौति का कारण 
अपने मे करि कतैक उघारी, 
कोना क' दिय गारी हे सिया साजन

Maithili Vivah Geet

अनका कहल किए ऐला महल - ओठगर गीत लिरिक्स

मिथिला धरोहर
 ओठगर गीत :-
Anaka kahal kie Aela mahal lyrics

अनका कहल किए ऐला महल, 
चारू लालना सँ पुछियौन है। 
बान्हू सखि कसि बन्धन प्रबल, 
कसि लालन के बधियौन है।

मिथिला में घुमि घुमि शेखी देखौलनि,
आइये घुसरतैन शेखी सकल, 
कसि लालन के बंधियौन हे। 

चौदह भुवन जे अनका बन्धैछथि,
बूझ कतेक मिथिलानी मे बल, 
कसि लालन के बंधियौन हे।

बान्हि दियौन तखन ओखर मुसरवा
आठ चोट गनि कूटथि सम्भल, 
आई धनमा कुटथियौन हे। 

स्नेहलता किए चित के चुरौलनि,
भोगथु अपन चित चोरी के फल, 
कसि लालन के बंधियौन हे।

19 सित॰ 2018

Maithili Vivah Geet

अहाँ चिन्हियौ ओ दूल्हा अपन कनिया लीरिक्स - कन्या निरीक्षण गीत

मिथिला धरोहर
कन्या निरीक्षण गीत :-
Ahan Chinhiyau O Dulha Apan Kaniyan Lyrics

अहाँ चिन्हियौ ओ दुलहा अपन कनिया। 
वाम दहिन भय बैसलि सुन्दरि,

एके पटोर पर दुई जनियाँ । अहाँ चिन्हियौ ।। 
लिय कमल कर आमक पल्लव,

परखि उठावू सुन्दर धनिया । अहाँ चिन्हियौ ।। 
चालि चलनि एखने हम जाँचब,

कहेन अहाँ के रघुकुल बनियाँ । अहाँ चिन्हियौ। 
चतुर शिरोमणि छुवि पल्लव सौ, 
विहँसि उठौलनि पटरनियाँ ।

2 अग॰ 2018

Maithili Lokgeet

पायर धोयबा काल के गीत - मैथिली लोकगीत

मिथिला धरोहर

कोना कऽ चरण पखारू | Maithili Lokgeet

कोना कऽ चरण पखारू हे छोट बभना के
हमर धिया छथि सोइतक बेटी
अहाँ छोट लोकक बेटा हे, छोट बभना के कोना ....
सुनू-सुनू ओझा बात, रुपैया लियऽ हाथ
अपन बहिनि करू दान, हमर भइया लय
सुनू-सुनू सरहोजि बात, नै अछि रुपैया पैसा हाथ
भइया लयलहुँ साथ, छोटकी सारि लय

22 जुल॰ 2018

Maithili Lokgeet

ठक बक चिन्हबा काल के मैथिली लोकगीत

मिथिला धरोहर

चलू चलू चलू दुलहा अंगना - ठक बक चिन्हबा काल के गीतक लिरिक्स

चलू चलू चलू दुलहा अंगना हमार यौ
अंगनामे होयत दुलहा विधि तोहार यौ

ठक के कहलखिन दुलहा माटी के मुरुत यौ
किछु नहि सिखौलकनि दुलहा के मइया छिनारि यौ

बक के कहलखिन दुहा माटि के मुरुत यौ
किछु नहि सिखौलकनि दुलहा के काकी छिनारि यौ

बेसन के कहलखिन दुलहा उरदिक घाटि यौ
किछु नहि सिखौलकनि दुलहा के पीसी छिनारि यौ

भालरि के कहलखिन दुलहा केराक पात यौ
किछु नहि सिखौलकनि दुलहा के बहीन यौ

मंजू के कहलखिन दुलहा इहो थिक कर यौ
किछु नहि सिखौलकनि दुलहा के भउजी छिनारि यौ

17 जुल॰ 2018

Maithili Vivah Geet

अँचरा से झॉपी झॉपी मइया सुनैना के दुलारी - कमला पूजन गीत लिरिक्स

मिथिला धरोहर
-: कमला पूजन गीत :-

अँचरा से झॉपी झॉपी 
मइया सुनैना के दुलारी 
अंचरा से झांपी झांपी लेलतिय गन हे 
चलली शलोनी धीया कमला पुजन हे 
साजी साजी अंग अंग अपन अपन हे

चली भेली सिया सखि आनन्द मगन हे 
धूप दीप माला दुभी तुलसी शुमण हे 
साजी लेल डाला बीच, अछत चन्दन हे 
गावति सुमंगल गीत वाजत वाजून हे 
मुदित स्नेह लता, धिया मन मन हे

19 जून 2018

Maithili Lokgeet

पान खायब काल के गीत - मैथिली लोकगीत

मिथिला धरोहर

Paan Khayab Kaal Lokgeet Lyrics

कोने सार बेसाहल पान गे माइ
किनका बहिन के बड़ैबा नेने जाइ
अपन सार बेसाहल पान गे माइ
पाहुन बहिन के बड़ैबा नेने जाइ
अहाँ सभ देबनि तऽ दियनु
सिया के कोना देब गारि हे
हमरा तऽ लगता ओ सरोकारी हे
अपन सार बेसाहल सुपारी गे माइ
पाहुन बहिन केँ बनियाँ नेने जाइ


29 मई 2018

Maithili Lokgeet

लाबा भुजबा काल के गीत - मैथिली लोकगीत

मिथिला धरोहर

लाबा भुजबा काल के गीत लिरिक्स

लाबा भूजय बैसली बहिनियां
चुलहा दहिनिया हे
हे सुन्दरि मंगल अग्नि पजारल हे
साजी पत्रमे राखल
लाबा पुनि भूजल हे
दुलहिन गृहमे बैसि जे ब्याहन हे
कहय हे सखि सब आनन्द मनाबिय
प्रभु गोहराबिय हे
जुगे-जुगे बढू़ आहिबात
कि अइहब गाबिय हे


11 अप्रैल 2018

Maithili Lokgeet

नाक पकड़बा काल के गीत - मैथिली लोकगीत

मिथिला धरोहर

 Naak Pakarba Kaal Ke Geet Lyrics

माइ हे नासिका दबाइ बरकेँ Lyrics

माइ हे नासिका दबाइ बरकेँ जाँचू बहिना
माइ हे योगी छथि की भोगी, से हम बुझबनि कोना
वस्त्र बहार कए देखू बहिना
माइ हे मोट छथि कि पातर, हम बुझबनि कोना
माइ हे हाथ पयर निकालि कनी जाँचू बहिना
हाथ सोझ छनि कि टूटल, देखू बहिना
चलाय - फिराय वरकेँ देखू बहिना
माइ हे चलै छथि कि नाँगर, से देखू बहिना
माइ हे हँसाय - बजाय हिनका देखू बहिना
माइ के पंडित छथि कि बकलेल, जाँचू बहिना

दुर्गा सन गौरी छथि सुन्दर

दुर्गा सन गौरी छथि सुन्दर
तिनका वर भेलखिन जोगी हे
पानक पात लए नाक पकड़बनि
नाक देबनि हम तोड़ि हे
हमरा गोरी दिस दृष्टि घुमयता
नयना देबनि हम फोड़ि हे
गरदनिमे चादरि लगएबनि
गरदनि देबनि हम तोड़ि हे
बसहा बरद सन मंडप घुमयबनि
करता कहथिन जे गौरी हे
दुर्गा सन गौरी छथि सुन्दर
तिनका वर भेलखिन जोगी हे

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मिथिला धरोहर — मैथिली भाषा, संस्कृति, लोकगीत, पंचांग, भजन और साहित्य केँ समर्पित एकटा डिजिटल मंच अछि। हमर लक्ष्य अछि मिथिला केँ पुरान परंपरा आ ज्ञान केँ आधुनिक पीढ़ी तक पहुँचाएब। चैटबॉट संगी अहाँक हर सवालक जवाब देबाक लेल सदैव तत्पर अछि। संस्थापक: प्रभाकर मिश्रा
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कहानी खोजी रहल छी त:
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मधुश्रावणी पहिल दिन कथा मधुश्रावणी पांचम दिन कथा

मंदिर खोजी रहल छी त:
श्याम मंदिर दरभंगा उच्चैठ भगवती उग्रतारा मंदिर

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